चंपत को राम-राम: खुलासा फर्स्ट ने कल ही कर दिया था चंपत राय के उत्तराधिकारी के नाम का खुलासा
KHULASA FIRST
संवाददाता

अयोध्या: चंपत राय व अनिल मिश्रा की राम मंदिर ट्रस्ट से हुई विदाई
पूर्व आईएफएस कृष्ण मोहन मंदिर ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव बने
चढ़ावा-दान चोरी की घटना के बाद पहली बार हुई ट्रस्ट की बैठक, चंपत राय, अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर
ट्रस्ट ने देश को दिया भरोसा- दान की गई सब वस्तुएं सुरक्षित, जिसे देखना हो, अयोध्या आकर देख ले
ट्रस्ट की दो टूक- अपराधियों को हर हाल में सजा दिलाई जाएगी, जो कमियां सामने आईं, वे दूर करेंगे
ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन लेंगे चंपत राय की जगह, भारतीय वन सेवा में महाराष्ट्र कैडर के अधिकारी रहे, आरएसएस से जुड़े
ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को, कौन दोषी-कौन नहीं, फैसला एसआईटी व न्यायालय करेगा, ट्रस्ट के खातों की जानकारी उपलब्ध
अब देश की नजर इस बात पर कि इस्तीफे के बाद चंपत राय व अनिल मिश्रा पर भी तय होंगे आरोप? नाक के नीचे चढ़ावा चोरी की तय होगी जिम्मेदारी?
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
आखिरकार स्वयंभू संत मुकर्रर किए गए विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी व अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम-राम कर लिया। चंपत राय व अनिल मिश्रा का इस्तीफा अंततोगत्वा स्वीकार हो गया।
अब देश की नजरें इस बात पर हैं कि इनकी नाक के नीचे हुई चढ़ावा चोरी पर क्या इनकी कोई जवाबदेही तय होगी या मामला बस इस्तीफे तक आकर ही सिमट जाएगा? देश-धर्म-रामभक्तों व जन-जन की आस्था के आघात से जुड़े इस मसले पर ट्रस्ट तो फिलहाल इन दोनों का बचाव करता ही नजर आ रहा है।
सुकून की बात फिलहाल तो इतनी है कि वे सब दुर्लभ, बेशकीमती व आस्था से जुड़ी वस्तुएं, सामग्री, भेंट सुरक्षित हैं, जिनके चोरी हो जाने का शोर मचा हुआ था। किलो से क्विंटलों तक चांदी भी सुरक्षित है। बस नकद पर ही पापियों ने हाथ साफ किया है।
चंपत राय की जगह कृष्ण मोहन अब महासचिव होंगे। अयोध्या, उत्तर प्रदेश में हुए इस महत्वपूर्ण फेरबदल पर इनके नाम का आपके प्रिय खुलासा फर्स्ट ने कल के अंक में ही खुलासा कर दिया था।
अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कल हुई महत्वपूर्ण बैठक में चंपत राय (महासचिव) और अनिल मिश्रा (ट्रस्टी) की रवानगी हो गई। मंदिर ट्रस्ट ने इन दोनों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए हैं। दान में कथित अनियमितताओं के विवाद के बीच हुई इस बैठक में ट्रस्टी कृष्ण मोहन को नया अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया है। ट्रस्ट के सीईओ की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय कमेटी, जिसमें रिटायर्ड जज प्रमोद कोहली शामिल हैं, का गठन किया गया है। बैठक में चढ़ावा चोरी और दान विवाद की घटना पर गहरा दु:ख जताते हुए दोषी को सजा दिलाने और मामले की जांच पर जोर दिया गया। बैठक में चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा उपस्थित नहीं थे।
बैठक में चढ़ावा गणना में सामने आई अनियमितताओं पर गहन मंथन हुआ। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के अनुसार कठोरतम कार्रवाई कराई जाएगी। बैठक में महामंत्री और एक न्यासी के त्यागपत्र, अंतरिम व्यवस्थाओं तथा हालिया घटनाक्रम पर भी चर्चा हुई।
बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान में ट्रस्ट ने कहा कि दानपात्रों से प्राप्त राशि की गणना में अनियमितता सामने आने से सभी न्यासी आहत और चिंतित हैं। मामले की जानकारी मिलते ही ट्रस्ट ने प्रारंभिक तथ्य जुटाने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार से निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया, जिसके बाद शासन ने तत्काल उच्चस्तरीय एसआईटी का गठन किया।
ट्रस्ट ने कहा कि एसआईटी की प्रारंभिक जांच में आठ लोगों के खिलाफ प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिले, जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज कराया गया और गिरफ्तारियां भी हुईं। अब पूरा मामला कानून के अनुसार आगे बढ़ रहा है। ट्रस्ट का स्पष्ट मत है कि जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
ट्रस्ट ने अपील की कि यदि किसी व्यक्ति, संस्था या पत्रकार के पास मंदिर से जुड़े किसी भी व्यक्ति के खिलाफ ठोस साक्ष्य है, तो उन्हें सार्वजनिक आरोप लगाने के बजाय सीधे एसआईटी या जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराया जाए, ताकि प्रमाणों के आधार पर कार्रवाई हो सके।
बैठक में ट्रस्ट ने यह भी कहा कि कुछ लोग इस प्रकरण का उपयोग श्रीराम जन्मभूमि, रामलला मंदिर और हिंदू आस्था को कमजोर करने के लिए कर रहे हैं तथा बिना साक्ष्य के आरोप लगाकर भ्रम फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके बावजूद मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या और उनकी आस्था में कोई कमी नहीं आई है।
ट्रस्ट ने अपने छह वर्षों के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अवधि में भव्य राम मंदिर का निर्माण, मुख्य मंदिर और परकोटे के सभी मंदिरों में प्राण प्रतिष्ठा, ध्वजारोहण तथा श्रीराम यंत्र की स्थापना जैसे ऐतिहासिक कार्य सफलतापूर्वक पूरे किए गए हैं।
मार्च तक रामलला को मिला 582 करोड़ का चढ़ावा
ट्रस्ट के अनुसार 31 मार्च 2026 तक रामलला को कुल 582 करोड़ रुपए का चढ़ावा प्राप्त हुआ। इसमें से 391 करोड़ रुपए संचालन व्यय पर खर्च किए गए हैं। वहीं निधि समर्पण अभियान और कॉर्प्स दान से प्राप्त 3264 करोड़ रुपए में से 2370 करोड़ रुपए मंदिर निर्माण एवं पूंजीगत कार्यों पर व्यय किए जा चुके हैं। शेष राशि ट्रस्ट के बैंक खातों में सुरक्षित है। ट्रस्ट ने दावा किया कि वित्तीय विवरण समय-समय पर सार्वजनिक किए जाते रहे हैं।
कानून के अनुसार आगे बढ़ रहा पूरा मामला: गोविंद गिरि... ट्रस्ट कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरि महाराज ने कहा कि एसआईटी का कार्य केवल दोषियों की पहचान तक सीमित नहीं है। जांच दल यह भी सुझाव देगा कि ट्रस्ट की व्यवस्थाओं में कौन-कौन से सुधार किए जाएं, जिससे चढ़ावा गणना और वित्तीय प्रबंधन की व्यवस्था और अधिक सुदृढ़, पारदर्शी तथा जवाबदेह बन सके।
ट्रस्ट ने दोहराया कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के साथ-साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी आवश्यक सुधार लागू किए जाएंगे।
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