पेमेंट मांगा तो केस मिला: अत्रिवाल परिवार फिर विवादों में
KHULASA FIRST
संवाददाता

पवन चक्की परियोजना का काम करने वाली कंपनी पर भुगतान रोकने, धमकाने और प्रशासन से सांठगांठ के गंभीर आरोप
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
रोज-रोज मरने से अच्छा है अब मर ही जाना...! चार साल पहले 12 पेज के सुसाइड नोट में लिखी गई यह दर्दनाक लाइनें इंटीरियर डिजाइनर करुणा शर्मा आत्महत्या कांड के साथ सुर्खियों में आई थीं। उस मामले में बिल्डर हेमंत अत्रिवाल की पत्नी प्रमिला अत्रिवाल का नाम सामने आया था।
अब एक बार फिर अत्रिवाल परिवार विवादों के केंद्र में है। इस बार प्रमिला अत्रिवाल के बेटे हिमांशु अत्रिवाल और उसकी कंपनी अत्रिवाल इंफ्रास्ट्रक्चर पर करोड़ों के भुगतान रोकने, ठेकेदारों को धमकाने, किसानों से किए वादे तोड़ने और प्रशासन से कथित सांठगांठ कर पीड़ितों पर ही केस दर्ज करवाने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।
आरोप लगाने वाला पीडि़त पक्ष अब न्याय के लिए लंबी लड़ाई के मूड़ में हैं। पवन ऊर्जा परियोजनाओं से जुड़ी वाईब्रेंट एनर्जी के देवेन्द्र असोले (अब आईनॉक्स कंपनी के स्वामित्व में हैं।) और इंदौर में बापट चौराहे के पास रहने वाले हिमांशु अत्रिवाल की कंपनी अत्रिवाल इंफ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ धार और इंदौर में विवाद गहराता जा रहा है।
दोनों ही कंपनियां छोटे ठेकेदारों/कंपनी/वेंडरों से काम करवाती है और उन्हें भुगतान करती है। मां नागणेचा सिक्योरिटीज एंड डेवलपमेंट के संचालक अविनाश प्रताप सिंह राठौर का आरोप है कि दोनों कंपनियों के लिए वर्षों तक काम करने के बावजूद लाखों रुपये का भुगतान रोक लिया गया। शुरुआत में हिमांशु अत्रिवाल ने उन्हें वाईब्रेंट एनर्जी से जोड़कर काम दिलाया, लेकिन बाद में उन्हें किनारे कर दूसरे लोगों के माध्यम से काम कराया जाने लगा।
थाने में राजीनामा फिर मुकरा
अविनाश प्रताप सिंह राठौर के अनुसार 27 जून को धार जिले की राजगढ़ तहसील के अमझेरा थाने में टीआई राजू मकवाना की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच बातचीत और राजीनामा हुआ था। पहले हिमांशु अत्रिवाल ने किसी भी बकाया से इनकार किया, लेकिन बाद में हिसाब में करीब 49 लाख रुपये सामने आए।
32 लाख रुपये देने पर सहमति बनी, लेकिन मई में केवल 5 लाख रुपये ही दिए गए। 27 लाख रुपए आज भी लेना बाकी है। जब उन्होंने शेष राशि मांगी तो उन्हें अपशब्द कहकर धमकाया गया और कहा गया कि जो करना है कर लो, एक रुपया नहीं मिलेगा।
राजनीतिक दबाव से दर्ज कराया झूठा प्रकरण... अविनाश प्रताप सिंह राठौर ने आरोप लगाया कि पैसे देने से इनकार करने के बाद हिमांशु अत्रिवाल ने इंदौर के बड़े भाजपा नेता के जरिए राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर उनके खिलाफ ही गंभीर धाराओं में मामला दर्ज करा दिया गया।
उनका कहना है कि उन्होंने आईजी कार्यालय तक शिकायत पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन आवेदन तक नहीं लिया गया। अब वे कंपनी और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ ऑनलाइन ई-एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया में हैं।
प्रशासन दे रहा आरोपी का साथ
हिमांशु अत्रिवाल का का शिकार धार जिले के ग्राम सगवाल का किसान अभिषेक सालित्रा भी है। पेमेंट नहीं मिलने पर अविनाश प्रताप सिंह राठौर के काम करना बंद करने के बाद अभिषेक की जमीन से हैवी क्रेन, पवन चक्की के उपकरण सहित अन्य भारी सामान हटाने के लिए हिमांशु अत्रिवाल ने पुलिस-प्रशासन के नुमाइंदों से सांठगांठ कर ली।
किसान अभिषेक का आरोप लगाया है कि लीज पर दी गई जमीन पर उनकी सहमति के बिना प्रशासन और कंपनी द्वारा उक्त सामान को निकलवाने के लिए सड़क निर्माण तथा अन्य कार्य कराने का प्रयास किया गया। तीन दिन पहले खेत पर एएसपी पारुल बेलापुरकर, एसडीएम, तहसीलदार और पुलिस बल मौजूद था, जबकि उन्हें वैधानिक आदेश नहीं दिखाया गया।
जब उन्होंने शिकायत प्रदेश स्तर पर करने को कहा, तब अफसर रवाना हुए। अभिषेक सालित्रा का आरोप यह भी है कि जमीन लीज पर लेते समय परिवार के सदस्यों को रोजगार देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन वह आज तक पूरा नहीं हुआ।
वहीं, पर्यावरण संरक्षण के तहत लगाए गए पीपल के पौधों को आरोपी कंपनी नुकसान पहुंचना सकती है। दूसरी ओर, वाइब्रेंट एनर्जी और आत्रिवाल इंफ्रास्ट्रक्चर पर छोटे ठेकेदारों और वेंडरों का आरोप है कि ये कंपनियां काम पूरा होने के बाद भुगतान टालती हैं और फिर नए ठेकेदारों से काम शुरू कर देती हैं।
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