मौत से पहले पिता को भेजे संदेश बने अहम सबूत: आदिवासी युवक की आत्महत्या का मामला; हाईकोर्ट ने तीन आरोपियों को जमानत देने से किया इनकार
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने आदिवासी युवक की आत्महत्या से जुड़े मामले में तीन आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। कोर्ट ने मृतक द्वारा आत्महत्या से पहले अपने पिता को भेजे गए व्हाट्सऐप संदेशों को प्रथम दृष्टया महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य माना है।
मामला धार जिले के संतोष उर्फ लक्ष्मण ओसारी की आत्महत्या से जुड़ा है। अभियोजन के मुताबिक कृषि भूमि को लेकर चल रहे विवाद में करण जाट, धर्मेंद्र जाट और उमेश जाट पर संतोष को लगातार प्रताड़ित करने का आरोप है। दावा है कि इसी मानसिक उत्पीड़न से परेशान होकर उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
मौत से पहले पिता को भेजे थे तीन संदेश
पुलिस जांच में मृतक के मोबाइल से उसके पिता के नंबर पर भेजे गए तीन व्हाट्सऐप संदेश सामने आए। अभियोजन के अनुसार इन संदेशों में संतोष ने अपने साथ हो रही कथित प्रताड़ना का उल्लेख किया था।
मामला हाईकोर्ट पहुंचने पर अदालत ने इन संदेशों को गंभीरता से लिया। कोर्ट ने माना कि आत्महत्या से ठीक पहले भेजे गए संदेश मामले में प्रथम दृष्टया महत्वपूर्ण हैं और जमानत पर विचार करते समय इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
तीनों आरोपियों की जमानत खारिज
इन्हीं परिस्थितियों और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री को देखते हुए हाईकोर्ट ने करण जाट, धर्मेंद्र जाट और उमेश जाट की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
हालांकि, जमानत के स्तर पर की गई टिप्पणियां प्रथम दृष्टया आकलन हैं। आरोपों की अंतिम सत्यता का फैसला मामले की सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद होगा।
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