अपनों ने डुबोया गैरों में कहां दम: हार की समीक्षा; निशाने पर नरोत्तम
KHULASA FIRST
संवाददाता

उपचुनाव : घात-प्रतिघात पर सख्त हुई प्रदेश भाजपा, पूरी जिला कार्यकारिणी भंग
जिन्हें चुनाव जिताने की दी थी जिम्मेदारी, वे भी हालात व माहौल भांप नहीं पाए, कांग्रेस की फूट के भरोसे बैठे रहे चुनाव संचालक
दतिया उपचुनाव में मिली हार पर सीएम हाउस में हुई समीक्षा बैठक, रिपोर्ट हाथोहाथ दिल्ली रवाना
क्रॉस वोटिंग के जरिये हुआ भितरघात, जिला इकाई से लेकर नगर पालिका के पार्षद तक ने की मुखालफत
वोटिंग के एक दिन पहले क्षेत्र में अकस्मात चलने लगे नरोत्तम मिश्रा के रोते हुए वीडियो व ‘दद्दा’ का बदला लेने के संदेश
हार के महज 48 घंटे में ही प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने भितरघातियों के खिलाफ दिखाए कड़े तेवर, दतिया में अब नए संगठन की तैयारी
संगठन ने भी सीखा सबक, सत्ता के हाथ में संगठन भी सौंपने के कारण बने ये हालात
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
दतिया उपचुनाव में कमलदल को मिली हार के मामले में ‘गैरों में कहां दम था, अपनों ने डुबोया’ वाले खुलासा फर्स्ट के कल कहे गए जुमले पर आज मुहर लग गई। मुख्यमंत्री आवास पर हार की समीक्षा बैठक में ये साफ हो गया कि दतिया में भाजपा ने ही भाजपा को हराया, जैसा कभी कांग्रेस किया करती थी। बैठक में मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष व पार्टी प्रत्याशी के साथ-साथ वे सब नेता थे, जो दतिया में चुनावी कमान संभाले हुए थे।
सबके निशाने पर दतिया के ‘दद्दा’ यानी नरोत्तम मिश्रा थे। मिश्रा पर बैठक में खुलकर आरोप लगे कि उन्होंने और उनके समर्थकों ने ऐनवक्त पर धोखा दे दिया। पहले भरोसे में रखा और फिर मतदान के ठीक पहले भरोसा तोड़ दिया। खुल्लमखुल्ला लगे आरोप के बाद सदमे में आए प्रदेश भाजपा संगठन ने सख्त तेवर दिखाते हुए दतिया की पूरी की पूरी वो संगठन रचना ही भंग कर दी, जिस पर नरोत्तम मिश्रा का दबदबा था।
अगली बारी अब जनता के द्वारा चुने गए उन नेताओं की है, जो कमल निशान पर जीते, लेकिन कमल को ले डूबे। इनमें बड़ी संख्या पार्षदों की है। बैठक में संगठन को इस बात का भी अहसास हुआ कि सत्ता के हाथों संगठन सौंपने का ये दुष्परिणाम है।
वहीं जिन्हें चुनाव जिताने की जिम्मेदारी दी गई थी, वे भी अंटागाफिल साबित हुए। ऐसे नेता न माहौल भांप पाए, न भितरघात की साजिश सूंघ पाए। हार के कारणों की रिपोर्ट अब दिल्ली दरबार रवाना कर दी गई है।
नरोत्तम को लेकर कोई भी कार्रवाई दिल्ली के इशारे के बाद ही होगी। अब होगी भी या नहीं? ये बात कम से कम भोपाल भी दावे के साथ कहने की स्थिति में नहीं है। ये ही है आज की, यानी ‘सत्ता वाली’ भाजपा।
द तिया उपचुनाव में हार के बाद प्रदेश भाजपा ने मंगलवार को बड़ा एक्शन लिया। जिला अध्यक्ष रघुवीरसिंह कुशवाहा समेत जिले की पूरी की पूरी संगठन इकाई भंग कर दी। अनुशासनहीनता व चुनावी नतीजों की समीक्षा के लिए गठित समिति की अनुशंसा पर प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने ये कार्रवाई की। पार्टी के आदेश में जिला कार्यसमिति, सभी मंडलों, मोर्चो, प्रकोष्ठों, प्रकल्पों व विभागों के पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से दायित्वमुक्त कर दिया गया है।
यही नहीं, पार्टी अब दतिया में डैमेज कंट्रोल में भी जुट गई है। जल्द ही यहां नई जिला कार्यकारिणी गठित की जाएगी। इस कड़े एक्शन के जरिये भाजपा के प्रदेश संगठन ने खराब प्रदर्शन और अनुशासनहीनता पर सख्त संदेश दिया है।
दतिया उपचुनाव में हार के महज 48 घंटे में ही भाजपा एक्शन में आ गई। मंगलवार को मुख्यमंत्री निवास पर करीब 1 घंटे तक समीक्षा बैठक हुई। बैठक में चुनाव का काम देख रहे नेताओं ने खुलकर पूर्व गृहमंत्री व दतिया से पूर्व विधायक नरोत्तम मिश्रा को हार का जिम्मेदार बताता। नेताओं ने बताया कि मिश्रा समर्थक पहले तो ठीक से काम करते रहे, लेकिन वोटिंग के पहले भितरघात शुरू कर दिया।
मिश्रा के रोने के वीडियो तेजी से इलाके में सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे। ये वीडियो एक-दूसरे के बीच खूब शेयर भी होने लगे। ‘दद्दा का बदला लेना है’ जैसे संदेश भी चलने लगे। चुनाव संचालकों के जरिये जो प्रचार सामग्री नीचे बूथ स्तर तक पहुंचना थी, वह नहीं पहुंच पाई। आरोप तो ये भी लगे कि ये भाजपाई प्रचार सामग्री कांग्रेस के दफ्तर तक पहुंचा दी गई। इस मामले में दतिया नगर पालिका के पार्षदों की भूमिका संदिग्ध रही।
दतिया नगर पालिका के 36 में से 30 पार्षद पार्टी के खिलाफ काम कर रहे थे और वह भी खुलकर। मंडल अध्यक्ष की भूमिका भी ठीक नहीं थी। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव व प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि समीक्षा बैठक के अलावा भी अगर किसी को कुछ अलग से कहना है, तो वह प्रत्यक्ष मिलकर बता सकता है।
इसके बाद कई गंभीर बातें सामने आईं। सब बातों को मिलाकर एक विस्तृत रिपोर्ट हाथोहाथ तैयार कर तुरंत दिल्ली दरबार रवाना कर दी गई। बैठक में कुशवाह समाज के वोट नहीं मिलने की बात पर तकरार भी हुई, वहीं नरोत्तम मिश्रा पर कई गंभीर आरोप भी लगे।
हार के बाद हुए मंथन पर मुख्यमंत्री ने स्वयं को संयत रखते हुए पूरे मामले को संगठन के हवाले कर दिया। सहज-सरल प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल भी इस घात-प्रतिघात से असहज, दुःखी व खिन्न नजर आए।
हालांकि पार्टी का एक धड़ा दतिया में हुई संगठन की सख्त कार्रवाई को उचित नहीं मान रहा। उसका कहना है कि एक तो जबरन प्रत्याशी थोप दिया गया और उस पर इस तरह का एक्शन पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ न्याय नहीं है।
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