150 किमी पैदल चलकर जल लेकर महाकाल के द्वार पहुंचे श्रद्धालु का छलका दर्द: बोले- शिखर दर्शन के दौरान सुरक्षाकर्मी ने दिया धक्का; VIP व्यवस्था पर उठाए सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, उज्जैन।
महेश्वर से मां नर्मदा का जल लेकर करीब 150 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी कर उज्जैन स्थित बाबा महाकाल के दरबार पहुंचे इंदौर निवासी श्रद्धालु नीरज याग्निक ने मंदिर की सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
दर्शन का संयोग नहीं बन पाया
नीरज याग्निक का कहना है कि उन्होंने महेश्वर से बेहद कम समय में पैदल यात्रा पूरी की, लेकिन महाकाल मंदिर पहुंचने के बाद दर्शन का संयोग नहीं बन पाया। इसे लेकर उन्हें कोई दुख नहीं हुआ, लेकिन मंदिर के बाहर शिखर दर्शन के दौरान कथित तौर पर निजी सुरक्षा कर्मचारियों द्वारा धक्का देकर हटाए जाने से वह आहत हुए है।
श्रद्धालु ने जानकारी देते हुए पर अपनी पूरी यात्रा और मंदिर के बाहर हुए घटनाक्रम का जिक्र करते हुए व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
150 किमी की यात्रा में बाबा स्वयं साथ थे
नीरज ने बताया कि उन्होंने महेश्वर से मां नर्मदा का जल लेकर करीब 150 किलोमीटर की पैदल यात्रा एक दिन और कुछ घंटों में पूरी की और बाबा महाकाल के दरबार तक पहुंचे।
लेकिन मंदिर पहुंचने के बाद उन्हें दर्शन का अवसर नहीं मिला, लेकिन इसका उन्हें जरा भी दुख नहीं है। उसका कहना है कि इतनी लंबी और कठिन यात्रा पूरी होने के पीछे बाबा महाकाल का ही आशीर्वाद था।
शिखर दर्शन के दौरान परिवार पहना रहा था हार
श्रद्धालु के मुताबिक, दर्शन नहीं होने के बाद वह मंदिर प्रांगण के बाहर से बाबा महाकाल के शिखर दर्शन कर रहे थे। इसी दौरान परिवार के सदस्य लंबी पैदल यात्रा पूरी करने पर उसे हार पहनाकर सम्मानित कर रहे थे।
आरोप है कि इसी दौरान मंदिर की निजी सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मचारी द्वारा उन्हें धक्का देकर वहां से हटा दिया। इसी व्यवहार को लेकर श्रद्धालु ने नाराजगी जाहिर की है।
VIP और अलग-अलग दर्शन व्यवस्थाओं पर उठाए सवाल
नीरज याग्निक ने मंदिर में रसूख, चिट्ठी, टोकन और अलग-अलग लाइनों से होने वाले दर्शन की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि धर्मस्थल पर भक्तों को पैसे, टिकट या प्रभाव के आधार पर अलग-अलग लाइनों और गेटों में बांटने की व्यवस्था पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।
मंदिर धर्म का, सेवा पुजारी की और आस्था भक्तों की
श्रद्धालु ने सवाल उठाए कि जब मंदिर धर्म का है, सेवा पुजारियों की है और आस्था भक्तों की है तो व्यवस्था में निजी एजेंसियों की भूमिका और अधिकारों की सीमा क्या है। उन्होंने निजी सुरक्षा एजेंसियों और बैरिकेडिंग व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जाहिर करते हुए सवाल किया कि श्रद्धालुओं के साथ होने वाले व्यवहार के लिए जिम्मेदारी किसकी है।
प्रभु के द्वार पर अपमानित किया गया'
उन्होंने आगे कहा कि वह सुविधाओं या विशेष व्यवस्था के सहारे नहीं, बल्कि कांवड़ लेकर लंबी पैदल यात्रा पूरी कर अपने आराध्य के द्वार पहुंचे थे। लेकिन बाबा महाकाल के द्वार पर कथित रूप से अपमानित किए जाने की घटना ने आहत किया।
सोशल मीडिया पर साझा की अपनी पीड़ा
नीरज याग्निक ने अपनी इस पीड़ा को सोशल मीडिया (फेसबुक) पर भी साझा किया है, जिस पर लोग अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
यहां पढ़े कमेंट
शहर से भी कावड़ यात्रा आ रही है
अभ ये देखना होगा की प्रशासन ऐसे ही व्यवहार करता है ?
या वीआईपी प्रोटोकॉल देता है ?
जय श्री महाकाल 🔱
कुणाल वर्मा
जो भी वस्तु स्तिथि से गुज़रता है उसे यह यकीन हो जाता है की आपने जो सिक्यूरिटी गार्ड रखे है वो vyavastha संभालने के लिए रखे है ना की बिगाड़ने के लिए अपमान आपका हो की सबका बात समान है जय महाकाल
नितिन गोयल
आपकी अभूतपूर्व धार्मिक यात्रा को दिल से सलाम भैया लेकिन प्रश्न यही उठता है की क्या जितने भी हमारे नामी ग्रामी मंदिर, देव स्थल है वहां की व्यवस्था सुधारनी चाहिए कि नहीं, आने वाले श्रद्धालु धर्मालुओं को सम्मान मिलना चाहिए कि नहीं वर्तमान में इतनी बुरी स्थिति है छूना तो दूर दर्शन करने के पूर्व, जैसा कि आपने कहा तथाकथित ठेकेदार के लोग धक्का मार के मंदिर के सामने से हटा देते हैं जो की बहुत ही चिंतनीय है इनका यह बरताव वापस एक बार हिंदुओं को मंदिर से दूर कर देगा इसके ऊपर बहुत गंभीर विचार होना चाहिए🙏🙏
सुशील अरोरा
भाई साहब आप अभी यह तक सीमित नहीं है नाग पंचमी पर साल में एक बार खुलने वाले नागचन्द्रेश्वर मंदिर पर गजब की नेता गिरी होती है इंदौर उज्जैन के बड़े दिग्गज नेता पहले दर्शन का लाभ लेते हैं बाद में जनता जनार्दन के लिए द्वार खोले जाते हैं
भगवान शिव शंकर सद्बुद्धि दे
अभिषेक सिंह सोनगरा
पुराना ढर्रा चला आ रहा है.
सब प्रदेश के टटपूजिये नेताओ की देन है.
पर अब अति शीघ्र बदलाव की सख्त आवश्यता है..
जय जय श्री महाकाल
प्रणय मिश्रा मोंटो
भाई साहब यह आप की सादगीं हैं इतनी काबिलियत होने के बाद भी इतना शांत स्वभाव और इतनी पहचान होने के वाबजूद आप चाहते तो पूरा VIP प्रोटोकोल रहता लेकिन आप का यह स्वभाव हर कोई नही समझ सकता !
निलेश पाल
सो जा मोहन प्यारे कम से अन्य ज्योतिर्लिंग जैसा ही कावड़ियों के लिए कुछ अलग व्यवस्था की जाए ।व्यक्ति अपनी अंतिम शक्ति का जोर लगाकर बाबा की चौखट तक पहुंचता है।
आगे महाकाल जाने।
नर्मदे हर।
अभिषेक सिंह राठौर
भैया आप जैसे आस्थावान व्यक्ति के साथ ये व्यवहार बड़ा ही दुःखद है ये आज कल हर धार्मिक स्थानों पर हो रहा है ये ठेकेदार धक्का मुक्की ऐसे करते है जैसे हम कोई दूसरे धर्म के लोग है या कोई आतंकवादी ऐसा हर श्रद्धालुओं के साथ होता है इनका एक ही इलाज है ये ठेकेदारों की संख्या श्रद्धालुओं की संख्या से मात्र चंद प्रतिशत रहती है मंदिर प्रांगण मे अगर सभी एकता के साथ इनका सार्वजनिक उतारा एक दो बार उतार दे तो शायद ये थोड़े सुधर जायेगा और श्रद्धालुओं का शायद सम्मान भी करने लगेंगे।
रवि पांचाल
पिछले दिनों उज्जैन में काल भैरव के दर्शन का अवसर मिला।मगर यहां के हालत महाकाल से भी बहुत गए गुजरे हैं। दर्शनार्थियों के लिए जो बेरीकेडिंग की है, उसकी हालत यह है कि भक्त को उल्टियां हो जाए। इस बेरिकेडिंग में लगता है महिनों से साफ सफाई नहीं हुई हो। कीचड़ और वहां बंधें धागों से बड़ी हुई दुर्गंध से भक्त की हालत खराब हो जाती है। महाकाल इन व्यवस्थाओं को देखते वालों को कुछ सद्बुद्धि दे।
ईश्वर सिंह चौहान
जय श्री महाकाल, कावड़ यात्रा का सुनकर बड़ी प्रसन्नता हुई और मंदिर परिसर के ठेकेदारों की आपके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार व्यथा सुनकर बड़ा दुख हुआ, बाबा महाकाल की नजर सब पर है, सनातन धर्म की जय हो जय जय श्री महाकाल
अजय पाण्डेय
सभी मंदिरों का यही हाल है, भस्मारती के लिए एक महीने पहले ऑनलाइन बुकिंग शुरू होती है जो बुकिंग शुरू होने के पहले ही फुल हों जाती है, है न जादू, और फिर पैसा दो और आरती करो या फिर आप रसूखदार हो । अब आम आदमी का भस्मारती मै शामिल होना असंभव सा है। वह दिन दूर नहीं जब सिर्फ शिखर दर्शन ही होंगे।
विनोद दूसने
आदरणीय बड़े भाई साहब स्वस्थ शरीर के लिए एवं स्वस्थ जीवन के लिए आपका उद्देश्य सनातन धर्म को सर्वोपरि मानते हुए सबको समान रूप से मज़बूत बनाना है कुछ समस्याए भी आएँगी उनको छोड़कर आप अपने धर्म एवं राष्ट्र के प्रति समर्पण को हमेशा तत्पर रहेंगे यही ईश्वर से प्रार्थना है बाक़ी सब बाबा महांकाल की कृपा है आपके ऊपर 🙏💐
जय श्री महांकाल
जय श्री राम
चंद्रशेखर मालवीय
सर मुझे आपकी इस बात से बड़ा आश्चर्य हो रहा है कि
आप नवरात्रि का इतना बड़ा आयोजनइंदौर में करते हो
मैं आपका आयोजन टीवी के प्रोग्राम में लाइव देखता हूं ,मुझे आपके प्रोग्राम में आने का सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ है ,आज तक,आपके आयोजन में इंदौर शहर के नामी राजनेता, मंत्री, पत्रकार, पुलिस अधिकारी, एवं प्रशासनिक अधिकारी, शिरकत करते हैं आप उनको मान सम्मान से अपने पंडाल में बिठाते हैं उनका स्वागत करते हो, यह बंद करदो, अब उनको भी पता चले की आप जैसी शख्सियत को अगर महाकाल मंदिर में vip दर्शन प्राप्त नहीं हो तो, आम दर्शनार्थियों की क्या हालत होती होगी, बाकी आप और आपकी पूरी टीम बहुत समझदार है,? मैं ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता मुझे बहुत दुख हुआ आपकी यह पोस्ट देखकर,
धर्मेंद्र पुरोहित
इन धर्मद्रोहियों ने vip चार्ज और लाइन लगाकर धार्मिक स्थलों को कलंकित ही किया है। प्रभु के दर्शन में क्या राजा और क्या रंक?? जब देवाधिदेव महादेव अपने भक्तों में कोई फर्क नहीं करते तो भगवान के दरबार में ये छद्म धर्मधुरंधर क्यों अपनी उगाही चलाते हैं। कोई भी भक्त अपने इष्ट के दर्शन के लिए किसी भी प्रकार का टैक्स क्यों दे भला ? ये तो भक्त की आस्था और प्रभुकृपा को सिक्कों में तोलने जैसा है।😌 अरे धूर्तों जितना आप vip लाइन का सालभर का टैक्स लेते हो बता दो और अपना QR कोड दे दो। बाबा के अनन्य भक्त उसकी भरपाई ऑनलाइन ही कर देंगे और आपको इसके लिए अलग से कोई वसूली नहीं करनी होगी।
रामजी सद्बुद्धि दें 🚩 🚩
शरद पवार
आपकी यात्रा मंगलमय रही और महादेव सरकार ने शिखर दर्शन देकर आपके शिखर तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त किया। व्यवस्था की कमी के बावजूद आपकी भक्ति और आस्था ने लोगों के दिलों में जगह बना ली है। आप सच में बधाई के पात्र हैं और लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हैं। महादेव आपको और शक्ति दें और आपकी भक्ति को और मजबूत बनाए रखें। 🙏🙏🙏
आशुतोष शुक्ला
दादा साउथ की यात्रा पर हैं हम, यहाँ मंदिरो की व्यवस्था देखने और सीखने लयक है। जनता भी और व्यस्थापक और व्यवस्था सब स्वतः व्यवस्थित हो जाता है जब भाव व्यवस्थित और प्रभु समर्पित हों, अन्यथा अब तो भक्त और व्यस्थापक भगवान को भी अपनी बपौती समझने लगे हैं। हमारे लिए तो हमारी देवी हमारी माँ प्रकृति और हमारे पिता हमारे भगवान हमारे गुरु भोलेनाथ पहाड़ों में सदैव विराजते हैं।
प्रभु सबका कल्याण करें 🙏🏻🌹
जगत कुमार
मंदिरों में गार्ड क्यों लगाए जाते हैं ???
भक्तों को सुरक्षा व्यवस्था देने के लिए .....
ना की भक्तों को मारने के लिए....
तिरस्कार करने के लिए.....
भगाने के लिए .....
बेइज्जती करने के लिए .....
गार्ड को उनकी ड्यूटी समझाना बहुत जरूरी हो गया है
रजनी प्रणव जायसवाल
भैया ! अब तो इस विषय पर बोलने लिखने और सोचने में भी कष्ट होने लगा है... महाकाल ने अपनी अवंतिका से प्रदेश के संचालन को मुख्यमंत्री दिया परंतु मुखिया ने ही मंदिर और भक्तों का तिरस्कार कर दिया... सबसे लचर व्यवस्था, तानाशाही, गुंडागर्दी पता नहीं क्या क्या प्रतीत होता है.... ऐसे भद्दे निर्णय कि समझ ही नही आता की क्या प्रशासनिक बुद्धिमत्ता का पूर्णतः नाश हो गया है... दिसंबर महीने से महाकाल का लाइव दर्शन बंद है, प्रवेश में अधिकार केवल रईसों, सेलिब्रिटियों, नेताओं और दबंगों के पास सुरक्षित है... अब सावन के महीने में तो अति कर दी है कावड़ यात्रियों को सोमवार को प्रवेश निषेध कर दिया है... पता नहीं क्यों महाकाल भी सुध नहीं ले रहे ? जल्द ही इन व्यापारियों का हिसाब किताब करे बाबा....
गौरव तिवारी
मंदिर सिर्फ और सिर्फ vip कल्चर को बेच दिया गया है
हज़ारो किलोमीटर से दर्शन करने आये आम श्रद्धालू हर रोज़ इस घनघोर और दुर्भाज्ञापूर्ण भेदभाव से गुज़रते हैँ
ये धर्म के स्वम्भू ठेकेदारों की करनी है जिसका खामियाज़ा आम जनता भुगत रही है
यशवर्धन सिंह
नीरज भैया अब आप समझो एक आम साधारण परिवार पति पत्नी और बच्चे के साथ जब दर्शन करने जाता है तो उसे महाकाल में कितनी पीड़ा होती है अभी हमारे एक रिश्तेदार सोमनाथ दर्शन करने गए थे कह रहे थे इतने बढ़िया दर्शन हुए त्रंबकेश्वर में दर्शन बढ़िया हो जाते हैं रामेश्वरम में हो जाते हैं महाकाल एक दर्शन करने वाले के लिए इतनी सुरक्षा इतनी सुरक्षा उज्जैन जाने के नाम से ही मन हट गया है भैया सावन और भादो में इससे तो अच्छा है जंगल के अंदर छोटा सा भोलेनाथ का कोई शिवलिंग हो इस पर ही हम जल चढ़ा दे तो ही हमारा पुण्य हो जाएगा आप शहर वरिष्ठ व्यक्ति हो आपकी यह स्थिति है तो हम जैसे लोग तो महाकाल मंदिर में व्यवस्थापक कचरे के रूप में मानती होगी भोलेनाथ के दर्शन करने के लिए केवल एक से इजाजत लेना होती है वह होते हैं नंदी बाबा पर यहां तो मेरे को लगता है नंदी बाबा से बड़े लोग बैठे हैं
राजेश शर्मा
राजनीति नेतानगरी केवल इनका प्रभुत्व रह गया है महाँकाल के दरबार में... आम आदमी को दूर से धकेल दिया जाता है ठीक से दर्शन भी नहीं हो पाते वही दूसरी तरफ नंदी के पास वीआईपी लोग आराम से बैठ कर दर्शन कर लेते है धर्मस्थलों पर होनेवाले VIP Culture को खत्म करना जरुरी है आप जैसी शख्सियत को रोकना समझ से परे है आप भी अगर किसी नेता की भव्य कावड़ यात्रा या कावड़ इवेंट का हिस्सा होते तो आप को भी महाँकाल बाबा के दर्शन आसानी से हो जाते.... सफल कावड़ यात्रा की हार्दिक बधाई सुबह मिलते है रोज की तरह... जय श्री राम 🙏
शैलेंद्र सिंह सोलंकी
हमारे सभी धर्मिक स्थलों पर यही हाल है हर जगह धर्म के ठेकेदार मौजूद हैं। ये इतने ताकतवर हैं कि कोई इनके खिलाफ नहीं जा सकता है। प्रशासन और ये सब मिले हुए हैं। यही महाकाल में ताकतवर लोग गर्भ गृह में जाकर पूजा करते हैं उस समय वहां के CCTV तक बंद हो जाते हैं क्या यही सनातन की परिभाषा है।
सुनील तिवारी
बिल्कुल भैया आप ठीक कह रहे हो महाकाल बाबा के दरबार मे इन कथित दरबारियों द्वारा जो व्यवहार आम जन के साथ किया जाता हैं बिल्कुल निंदनीय है मुझे पता है आप अगर चाह लेते तो बिल्कुल vip व्यवस्था हो जाती पर आपकी लगन आपकी सादगी और एक आम कावड़ यात्री की भांति दर्शन की इच्छा के कारण ही आपने सिर्फ शिखर दर्शन किये वैसे भी जिसके मन मे महाकाल बसे हो उसको दर्शन तो आत्मिक ही हो जाते है खेर आपने जो अव्यवस्था है उसको उठाया शायद जिम्मेदार को कुछ होश आये और व्यवस्था में सुधार हो ताकि सभी दर्शन करने वालो कोकुछ सुविधा हो सके
प्रमोद अवस्थी
बेहद शर्मनाक नीरज भाई आप चाहते तो आप भी वी वी आई पी प्रोटोकाल ले सकते थे लेकिन यह आपकी आस्था और आपके आचरण के विपरीत होता खैर इन्हें सद्बुद्धि आएगी नहीं और इसी तरह हिन्दू धर्मस्थल बदनाम होते रहेंगे 😡😡
बाबा महाकाल राजा की कृपा आप पर सदैव बनी रहे 💐🙏
श्रीकांत शर्मा
मुझे भी भैया आहे बात सुनकर कोई आश्चर्य नहीं और कोई दुख नहीं हुआ 🤔 क्योंकि मुझे विकलांग देखकर भी वह व्हीलचेयर की व्यवस्था वहां तक नहीं दे पाते हैं बहुत दूर से गोद में उठा कर ले जाना पड़ता है तब कहीं व्हीलचेयर देते हैं व्यवस्था के नाम पर बड़ी-बड़ी बातें हैं कुछ भी सुविधा नहीं इन लोगों ने ही सब सत्यानाश कर रखा है मंदिरों की व्यवस्था का ❓🤔 हमारे साथ श्री रघुनाथ तो किस बात की चिंता ❤️
जय. महाकाल
सिंगर पंडित कैलाश शर्मा
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