महिला सुरक्षाकर्मियों को पैंट-शर्ट पहनने का फरमान जारी: सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली आउटसोर्स कंपनी बीवीजी की तानाशाही
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
एमवायएच सहित प्रमुख स्वास्थ्य केंद्रों एमटीएच, चाचा नेहरू, न्यू चेस्ट वार्ड टीबी अस्पताल, मनोरोग विभाग और बाणगंगा मेंटल अस्पताल में सुरक्षा कंपनी के अफसरों की मनमानी चरम पर है। आउटसोर्स कंपनी बीवीजी के अफसरों ने महिला सुरक्षाकर्मियों के लिए पैंट-शर्ट (वर्दी) अनिवार्य कर दिया।
इसके चलते खासकर वे बुजुर्ग महिला सुरक्षाकर्मी खुद को असहज महसूस कर रही हैं, जो अब तक शालीन और मर्यादित सलवार-सूट पहनकर पूरी निष्ठा से अपनी ड्यूटी करती आई हैं।
सुरक्षा एजेंसियों ने महिलाओं की आयु और सामाजिक परिवेश को ध्यान में रखते हुए उन्हें सलवार-सूट का विकल्प दिया था, लेकिन वर्तमान प्रबंधन ने संवेदनशीलता को ताक में रख उन पर पश्चिमी पहनावा थोप दिया। वहीं इन्हें कई महीनों से वेतन तक नहीं दिया जा रहा।
कंपनी के सुपरवाइजरों से लेकर वरिष्ठ अफसरों तक का रवैया इतना क्रूर और अड़ियल है कि वे इन महिलाओं की शारीरिक और मानसिक असहजता को समझने के बजाय उन्हें लगातार अपमानित कर रहे हैं।
प्रबंधन के इस अमानवीय रवैये के कारण वे अपनी ड्यूटी पर जाने से भी कतराने लगी हैं। उनका कहना है अचानक थोपा गया यह ड्रेस कोड उनके लिए एक मानसिक बोझ बन गया है।
नौकरी से बर्खास्त करने की देते हैं धमकी
बीवीजी कंपनी के अधीन सेवाएं दे रही महिला सुरक्षाकर्मियों का कहना है ड्रेस कोड का पालन न करने पर उन्हें तत्काल नौकरी से बर्खास्त करने की धमकी दी जा रही है। वहीं मामले में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस मामले पर खामोश हैं।
यह केवल एक वर्दी का विवाद नहीं, बल्कि कामकाजी महिला के उस अधिकार का सीधा हनन है, जिसमें वह अपने कार्यस्थल पर सहज और सम्मानित महसूस कर सके।
इनका कहना है प्रशासन सरकारी अस्पतालों में सेवाएं देने वाली महिला सुरक्षाकर्मियों को सामाजिक पहनावा सलवार-सूट पहनने की अनुमति दिलाए, ताकि वे सम्मानजक तरीके से अपनी ड्यूटी दे सकें।
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