‘रामलला ‘का सीईओ कौन: पूर्व आईएएस; आईपीएस और सैन्य अधिकारी रेस में शामिल
KHULASA FIRST
संवाददाता

5 हजार से ज्यादा आए आवेदनों में से 18 उम्मीदवारों के तीन दिन चले इंटरव्यू, इनमें से 3 नाम होंगे शॉर्ट लिस्ट
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की अगुआई में तीन सदस्यीय पैनल कर रही है सीईओ का चयन, मंदिर परिसर में ही हुए इंटरव्यू
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
रामलला की प्राकट्य व लीला स्थली अवधपुरी यानी अयोध्या अब ‘काॅर्पोरेट कल्चर' में तब्दील होने जा रही है। ‘रामलला विराजमान' की साज-संभाल व देखरेख के लिए कॉर्पोरेट हाउस की तरह राम मंदिर भी सीईओ के हवाले होने जा रहा है। इसके लिए पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी का चयन हो रहा है। देश की नजर अयोध्या की तरफ है कि ‘रामलला' का सीईओ कौन होगा? अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी के चयन की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है।
ट्रस्ट को सुचारू और पारदर्शी प्रशासनिक कामकाज चलाने के लिए इस पद पर नियुक्ति करनी है, जो कि चंदे में गड़बड़ी के मामलों के सामने आने के बाद तय किया गया था। इस पोस्ट के लिए कुल 5,200 आवेदन आ गए।
इनमें से 18 उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए अयोध्या बुलाया गया था। अयोध्या स्थित राम मंदिर परिसर में उच्चस्तरीय चयन समिति द्वारा उम्मीदवारों के इंटरव्यू पूरे किए जा चुके हैं। इस तीन सदस्यीय पैनल की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस प्रमोद कोहली कर रहे हैं। पैनल इन 18 दावेदारों में से 3 नाम शॉर्टलिस्ट करके ट्रस्ट को सौंपेगा, इसके बाद अंतिम मुहर लगेगी।
‘रा मलला' के सीईओ पद के लिए हिंदू, सेवानिवृत्त आईएएस, आईपीएस या सैन्य अधिकारी को प्राथमिकता दी गई है। उम्र का पैमाना 50 से 70 वर्ष तक बीच रखा गया है। आयु सीमा तय की गई थी। उम्मीदवारों के लिए प्रशासनिक दक्षता के अलावा उम्मीदवारों की जीवनशैली, खान-पान (शाकाहारी होना) और धार्मिक झुकाव से जुड़े सवाल भी पूछे गए।
हालांकि, सीईओ चयन की पारदर्शिता पर सवाल भी उठना शुरू हो गए हैं। पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक न करने पर चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं।
अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति के लिए चयन प्रक्रिया के तहत मंदिर परिसर के उत्तरी हिस्से में स्थित ग्रीन हाउस में बंद कमरे में दो दिनों से इंटरव्यू चल रहे हैं।
चयन समिति के सदस्य रिटायर्ड न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, डॉ. सुरेश हावड़े और रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी शॉर्टलिस्ट किए गए 18 उम्मीदवारों की योग्यता और अनुभव का मूल्यांकन कर रहे हैं।
पहले दिन 10 पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों के इंटरव्यू लिए गए। मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था, सुरक्षा, प्रबंधन क्षमता और धार्मिक आस्था के आधार पर उम्मीदवारों की समझ को परखा जा रहा है।
मंदिर में सीईओ की क्या जरूरत? एक धड़ा विरोध में... रामदल ट्रस्ट ने सीईओ की नियुक्ति पर गंभीर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि अगर ट्रस्ट में सीईओ की नियुक्ति होती है तो इससे भव्य राम मंदिर की पवित्रता और धार्मिक गरिमा को भारी ठेस पहुंचेगी।
उनका तर्क है कि सीईओ जैसे प्रशासनिक पदों पर बैठे अधिकारी अक्सर मनमाने ढंग से काम करते हैं और मनमाने फैसले लेते हैं, जो कि धार्मिक आस्था और मंदिर की सदियों पुरानी परंपराओं के बिल्कुल खिलाफ है।
ट्रस्ट की बैठक में समितियों के पुनर्गठन पर होगा फैसला... राम मंदिर ट्रस्ट की अगली बैठक मणिराम दास छावनी में प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इस बैठक में ट्रस्ट की मौजूदा समितियों को भंग कर उनका नए सिरे से पुनर्गठन करने पर चर्चा होगी।
प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से कुछ समितियों में नए सदस्यों को जिम्मेदारी भी सौंपी जा सकती है। इस बैठक में समितियों के पुनर्गठन के अलावा प्रशासनिक सुधारों और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर कई अहम फैसले लिए जा सकते हैं।
इंटरव्यू की रेस में देश की प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था का लंबा अनुभव रखने वाले दिग्गज अधिकारी शामिल हैं। मंगलवार को पहले दिन हुए इंटरव्यू में तीन पूर्व आईएएस, एक रिटायर्ड आईपीएस, चार पूर्व सैन्य और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों सहित कुल 10 लोगों के साक्षात्कार लिए गए।
ग्रीन हाउस में सुबह 9 बजे से शुरू होकर दो सत्रों में चले इंटरव्यू में हर अभ्यर्थी को 25 से 30 मिनट का समय दिया गया। उम्मीदवारों से उनके पिछले कार्य अनुभव के साथ-साथ राम मंदिर और भगवान श्रीराम के प्रति उनकी आस्था, धार्मिक-सामाजिक संस्थाओं के संचालन और मंदिर व्यवस्था के विजन पर सवाल पूछे गए हैं।
इंटरव्यू प्रक्रिया के दौरान चयन समिति के तीनों सदस्यों के साथ राम मंदिर ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन भी मौजूद रहे। पूरी प्रक्रिया में कड़ी गोपनीयता बरती जा रही है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि चयन समिति अंतिम चरण के लिए किन नामों को आगे बढ़ाती है।
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