जीवन बचाने के लिए अनिवार्य है पानी का शुद्धिकरण: डॉ. तेज प्रकाश पूर्णानंद व्यास
KHULASA FIRST
संवाददाता

डॉ. तेज प्रकाश पूर्णानंद व्यास एंटी एजिंग वैज्ञानिक खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भागीरथपुरा जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में जहां सीवरेज मिक्सिंग और मल संदूषण (Faecal contamination) की गंभीर समस्या सामने आई है, वहां पानी का शुद्धिकरण केवल स्वाद के लिए नहीं बल्कि जीवन बचाने के लिए अनिवार्य है। मल में मौजूद E. coli और अन्य रोगाणु हैजा, टाइफाइड और हेपेटाइटिस जैसी घातक बीमारियों का कारण बनते हैं।
कोशिका के स्वास्थ्य के महत्व को जानते हैं; दूषित पानी सीधे ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और इन्फ्लेमेशन को बढ़ाता है। यहाँ घरेलू स्तर पर जल शुद्धिकरण की ‘बेस्ट ऑफ द बेस्ट’ विधियां विस्तार से दी गई हैं।
किफायती और प्रभावी विधि
नागपुर स्थित राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (एनईईआरआई) ने भारतीय परिस्थितियों के लिए कुछ उत्कृष्ट तकनीकें विकसित की हैं। नीरी-जेड -यह एक पोर्टेबल फिल्टर है जो विशेष रूप से आपदा और दूषित क्षेत्रों के लिए बनाया गया है।
यह पानी से टर्बिडिटी (गंदगी) और सूक्ष्मजीवों को हटाने में सक्षम है। क्लोरीन गोलियां/घोल- नीरी ने विशिष्ट सांद्रता वाली क्लोरीन गोलियां विकसित की हैं। भागीरथपुरा जैसे क्षेत्रों में जहां जल जनित रोगों का प्रकोप हो, वहां प्रति लीटर पानी में 0.5 mg अवशिष्ट क्लोरीन सुनिश्चित करना ‘लाइफ सेविंग’ साबित होता है। यह बैक्टीरिया की कोशिका झिल्ली को नष्ट कर उन्हें मार देता है।
लाइम-एलम शोधन
यह विधि विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए कारगर है जहाँ पानी में घुली हुई अशुद्धियाँ और भारी धातुएं अधिक होती हैं। इसमें सबसे पहले पानी में चूना मिलाया जाता है जो पीएच स्तर को नियंत्रित करता है, फिर इसमें फिटकरी डाली जाती है।
फिटकरी पानी में मौजूद सूक्ष्म गंदगी और बैक्टीरिया को आपस में चिपकाकर भारी कण बना देती है, जो बर्तन के नीचे बैठ जाते हैं। यह न केवल पानी को साफ करता है बल्कि आर्सेनिक और फ्लोराइड के स्तर को भी कम करने में मदद करता है।
थ्री-पॉट सिस्टम
मल जनित रोगाणुओं के खिलाफ यह एक प्राचीन लेकिन वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित घरेलू विधि है। इसमें तीन बर्तनों का उपयोग क्रमिक रूप से किया जाता है। पानी को एक बर्तन से दूसरे में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया में बैक्टीरिया के बसने और मरने का समय मिल जाता है, जिससे बैक्टीरिया का लोड 80-90% तक कम हो जाता है।
सोलर वाटर डिसइन्फेक्शन
यह तकनीक बैक्टीरिया और वायरस को मारने के लिए यूवी किरणों और ऊष्मा का उपयोग करती है। इसमें साफ बोतलों में पानी भरकर उन्हें 6 घंटे तक सीधी धूप (छत पर) में रखा जाता है। सूरज की यूवी-ए किरणें सीधे सूक्ष्मजीवों के डीएनए को नष्ट कर देती हैं। भागीरथपुरा जैसे क्षेत्रों में जहाँ बिजली की समस्या हो, यह विधि जीवन रक्षक हो सकती है।
सबसे विश्वसनीय ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’
जब बात मल के सूक्ष्मजीवों को पूरी तरह खत्म करने की हो, तो उबालना सबसे सुरक्षित तरीका है। प्रति इक लिटर पानी में एक लोंग डालकर पानी को केवल गर्म न करें, बल्कि उसमें ‘रोलिंग बॉयल’ (तेजी से उबाल) आने दें और इसे कम से कम 1 से 3 मिनट तक जारी रखें। यह विधि बैक्टीरिया, वायरस और प्रोटोजोआ (जैसे जियार्डिया) को 100% तक निष्क्रिय कर देती है।
उन्नत घरेलू तकनीकें
आधुनिक युग में, यदि संसाधन उपलब्ध हों, तो बहु-चरणीय शुद्धिकरण सबसे प्रभावी है। आरओ पानी से भारी धातुओं और घुले हुए ठोस पदार्थों को हटाता है। यूवी अंतिम चरण में बचे हुए किसी भी जीवित रोगाणु को नपुंसक बना देता है ताकि वे शरीर में प्रजनन न कर सकें। यूएफ शारीरिक रूप से मृत बैक्टीरिया और उनके अवशेषों को पानी से छान देता है, जो अन्यथा इन्फ्लेमेशन का कारण बन सकते हैं।
सक्रिय कार्बन और नैनो-सिल्वर
नैनो-सिल्वर कोटेड फिल्टर बैक्टीरिया के एंजाइमेटिक सिस्टम को ब्लॉक कर देते हैं। सक्रिय कार्बन पानी से कीटनाशकों, क्लोरीन की गंध और अन्य कार्बनिक अशुद्धियों को सोख लेता है, जिससे पानी की गुणवत्ता सेलुलर स्तर पर सुरक्षित हो जाती है।
शुद्धिकरण के बाद पानी के ओआरपी और Alkalinity का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण है। शुद्धिकरण के दौरान नष्ट हुए आवश्यक खनिजों को पुनः प्राप्त करने के लिए तांबे के बर्तन का उपयोग या प्राकृतिक खनिज बूंदों का समावेश किया जा सकता है।
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