विजयवर्गीय के बदले मिजाज: पत्रकारों को दिए संतुलित जवाब; आमतौर पर पत्रकारों के सवालों पर हंसी-ठहाके लगाने वाले कद्दावर मंत्री इस बार गंभीर नजर आए
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
बात-बात पर खिलखिलाने, ठहाके लगाने वाले मंत्री कैलाश विजयवर्गीय कल पत्रकारों के सामने गंभीर नजर आए। करीब 35 मिनट चली प्रेस कॉन्फ्रेंस में वे एक बार भी नहीं हंसे, न कोई ठिठौली की। लग रहा था जैसे एक-एक शब्द तौलकर बोल रहे हों।
ये भी पहला मौका था, जब उन्होंने पत्रकारों से दो-टूक कहा कि वे केवल विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी जी राम जी) योजना पर ही बोलेंगे। उसी पर प्रश्न पूछें। किसी और प्रश्न का उत्तर नहीं दूंंगा।
विजयवर्गीय की पत्रकार वार्ता में हमेशा की तरह कोई न कोई ब्रेकिंग न्यूज मिलने की उम्मीद लिए पहुंचे पत्रकार उनके इस बदले रूप को देख चकित रह गए। हंसी गायब थी, पत्रकारों से ठिठौली का पुराना चिरपरिचित अंदाज भी नहीं था।
नपे-तुले शब्दों में अपनी बात कहने के बाद वे चुप-चुप से रहे। उनका यह अंदाज देख एक-दो पत्रकारों ने जी वीबी जी रामजी योजना पर कांग्रेस के धरने से संबंधित सवाल पूछा तो वे चुप्पी साध गए।
राहुल की यात्रा पर भी कोई जवाब नहीं दिया। ज्यादा कुरेदने पर सिर्फ इतना कहा कि कांग्रेसी इस दिन उपवास रखेंगे तो अच्छा है, देश का अन्न बचेगा।
उनका बदला हुआ अंदाज संभवत: पहली बार था, जबकि आमतौर पर वे पत्रकारों से हंसी-मजाक के अंदाज में मुलाकात करते और ठहाके लगाते रहे हैं। इतना ही नहीं, पत्रकारों को नाम लेकर बुलाते और हालचाल पूछते, लेकिन कल ऐसा कुछ नहीं किया।
निर्धारित 2 के बजाय 2.30 बजे आए और करीब 3.05 बजे कुछेक लोगों से मिलते हुए कक्ष से बाहर चले गए। फिर ऊपरी मंजिल पर पदाधिकारियों के साथ चले गए। काफी देर रुकने के बाद वे जब रवाना हुए, तब भी पत्रकारों ने उन्हें घेरने की कोशिश की, लेकिन वे बिना कुछ बोले गाड़ी में बैठकर रवाना हो गए।
उनके इस बदले व्यवहार को लेकर हर पत्रकार की जुबान पर यही था कि विजयवर्गीय को ये क्या हो गया? उन्होंने अपना चिरपरिचित अंदाज क्यों नहीं दिखाया?
ये बोले विजयवर्गीय
विजयवर्गीय की पत्रकार वार्ता केवल विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी (वीबी जी राम जी) योजना पर आधारित थी। प्रदेश प्रवक्ता आलोक दुबे ने पहले ही साफ कर दिया कि सिर्फ इसी पर चर्चा होगी।
फिर विजयवर्गीय ने कांग्रेस पर ये कहकर प्रहार करना शुरू कर दिया कि राम का नाम आते ही कांग्रेस परेशान हो जाती है। इंदिरा गांधी ने जवाहरलाल नेहरू, राजीव गांधी ने इंदिरा और मनमोहन सिंह ने दोनों की योजनाओं के नाम बदले और काम भी बदल दिए, जबकि हमने मनरेगा को और अधिक उपयोगी बना दिया है।
लगे हाथ उन्होंने ये भी कहा कि महात्मा गांधी का नाम कोई नहीं मिटा सकता। वे पूज्य हैं। उनके प्रति हर देशवासी के मन में सम्मान है और भाजपा भी उनका बड़ा सम्मान करती है। उन्होंने कहा गांधी परिवार के नाम पर 600 से ज्यादा योजनाएं चल रही हैं, पर भाजपा ने कभी विरोध नहीं किया।
कांग्रेस गांधी परिवार से आगे नहीं सोचती। राम के नाम से क्या समस्या है? मंत्री विजयवर्गीय ने कहा राजीव गांधी खेल पुरस्कार, जबकि उनका खेल से कभी कोई लेना-देना नहीं रहा। इंदिरा के समय पहले राष्ट्रीय रोजगार गारंटी आई, फिर नाम नेहरू रोजगार हो गया, फिर नरेगा और इसके बाद इसका नाम मनरेगा कर दिया।
यह समय के साथ होता है। नई योजना में समयकाल के अनुसार अहम बदलाव किया गया है। मनरेगा पर अभी तक 11.74 लाख करोड़ खर्च किए हैं। सबसे ज्यादा खर्च मोदी सरकार ने ही 8.53 करोड़ किया है।
फसल काटने के दौरान कई बार मजदूर नहीं मिलते हैं। ऐसे में कलेक्टर को अधिकार दिए हैं कि राज्य सरकार द्वारा किसी समय विशेष पर योजना को रोका जा सकता है, ताकि मजदूर मिलें।
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