विदुर नगर फर्जी भूखंड कांड: एडीएम के जांच आदेश के दो माह बाद भी रिपोर्ट लंबित; प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सरकारी जमीन पर फर्जी तरीके से भूखंड बेचकर करोड़ों की धोखाधड़ी के गंभीर आरोपों से जुड़े विदुर नगर श्री झूलेलाल संस्था मामले में प्रशासनिक कार्रवाई की रफ्तार पर अब सवाल उठने लगे हैं। शिकायत पर एडीएम द्वारा जांच के स्पष्ट आदेश दिए जाने के बावजूद दो माह बाद भी न तो उपायुक्त सहकारिता और न ही राऊ अनुभाग के एसडीएम ने जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया है।
संस्था द्वारा फर्जी तरीके से भूखंड विक्रय किए जाने को लेकर शिकायतकर्ता चंद्रकुमार भवानी ने जनसुनवाई में शिकायत की थी। इसमें आरोप लगाया गया कि संस्था द्वारा करोड़ों रुपए की शासकीय ग्रीन-लैंड भूमि को निजी बताकर बेची और सैकड़ों नागरिकों से धोखाधड़ी की गई।
अपर कलेक्टर पवार नवजीवन विजय ने 31 दिसंबर 2025 को उपायुक्त सहकारिता एवं अनुविभागीय अधिकारी (अनुभाग राऊ) को पत्र जारी कर 7 दिन में जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।
इस संबंध में एडीएम पवार नवजीवन विजय ने बताया क्षेत्रीय एसडीएम और उपायुक्त सहकारिता विभाग को जांच के लिए पत्र लिखे थे, लेकिन जिले में एसआईआर कार्य चलने के कारण एसडीएम स्टाफ व्यस्त है। वहीं सहकारिता विभाग से भी अब तक कोई जवाब नहीं मिला, जिसके चलते रिमाइंडर भेजा गया है।
पूर्व में प्रकाशित खुलासा... 1000 करोड़ से अधिक के घोटाले का आरोप...मामले में पूर्व में प्रकाशित खबरों में बड़ा खुलासा हुआ था कि करीब 1000 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की शासकीय कीमती ग्रीन-लैंड भूमि को फर्जी सहकारी संस्थाओं के माध्यम से बेचा गया। आरोप है कि विदुर नगर और झूलेलाल नगर के नाम पर हजारों फर्जी प्लॉट बेच दिए गए, लेकिन आज तक किसी खरीददार के पास वैध मालिकाना दस्तावेज नहीं हैं।
शिकायतकर्ता चंद्रकुमार भवानी (शासकीय शिक्षक) ने आरोप लगाया कि सहकारिता विभाग, कलेक्टर कार्यालय और अन्य विभागों की मिलीभगत से यह पूरा फर्जीवाड़ा वर्षों तक चलता रहा।
फर्जी रजिस्ट्रियां, अपात्र सदस्य और अवैध छूट का खेल... आरोपों के अनुसार फर्जी शपथ-पत्रों के आधार पर रजिस्ट्रियां कराई गईं, अपात्र सदस्यों का पंजीयन किया गया। एक ही प्लॉट कई लोगों को बेचा गया, रजिस्ट्री शुल्क में अवैध छूट लेकर शासन को भारी आर्थिक क्षति पहुंचाई गई।
विदुर नगर संस्था के नाम पर वर्ष 1995 की रजिस्ट्रियों के आधार पर 135.69 एकड़ भूमि में 5000 से अधिक फर्जी प्लॉट बेचे जाने का आरोप है। वहीं झूलेलाल नगर के नाम पर 28.33 एकड़ भूमि को कृषि भूमि बताकर विक्रय किया गया।
वरिष्ठ नागरिक से 1.50 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी का आरोप
मामले में वरिष्ठ नागरिक चंद्रकुमार भवानी (शासकीय शिक्षक) से 1 करोड़ 50 लाख रुपए से अधिक की ठगी के आरोप का भी खुलासा हुआ। पीड़ित का आरोप है कि 17 लाख रुपए नकद और शांतिनाथपुरी स्थित 2100 वर्गफीट का प्लॉट अमानत के नाम पर ले लिया गया, लेकिन बदले में कोई वैध भूखंड नहीं दिया गया। थाना रावजी बाजार में अपराध क्रमांक 42/05 और 43/05 दर्ज होने के बावजूद पीड़ित को अब तक न तो राशि वापस मिली और न ही प्लॉट।
प्रशासनिक संरक्षण या लापरवाही?
इस पूरे प्रकरण ने प्रशासनिक तंत्र की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। वर्षों से शिकायतें, एफआईआर और दस्तावेज होने के बावजूद ठोस कार्रवाई न होना यह सवाल पैदा करता है कि
जब जमीन शासकीय थी, तो रजिस्ट्रियां कैसे हुईं?
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?
क्या यह मामला भी अन्य घोटालों की तरह फाइलों में दबा दिया जाएगा?
जनता की निगाह अब कार्रवाई पर
lमामला केवल जमीन घोटाले का नहीं, बल्कि प्रशासनिक चुप्पी और संभावित संरक्षण में हुए संगठित सरकारी धन गबन का उदाहरण बनता जा रहा है। अब जनता और शासन दोनों की निगाहें इस पर टिकी हैं कि दोषियों पर कब और कैसी सख्त कार्रवाई होगी।
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