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वास्तु शास्त्र: ईंट-पत्थर के मकान को 'घर' बनाने की कला

KHULASA FIRST

संवाददाता

07 फ़रवरी 2026, 5:40 पूर्वाह्न
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वास्तु शास्त्र

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
आज के समय में हम सुख-सुविधाओं के साधन तो जुटा लेते हैं, लेकिन मानसिक शांति और आपसी तालमेल की कमी अक्सर खलती है।

वास्तु शास्त्र के अनुसार, हमारे घर का हर कोना एक विशेष ऊर्जा उत्सर्जित करता है। यदि यह ऊर्जा प्रकृति के तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) के साथ सामंजस्य में नहीं है, तो तनाव और आर्थिक बाधाएं आने लगती हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है वास्तु
वास्तु का मुख्य उद्देश्य 'प्राणिक ऊर्जा' के प्रवाह को सुगम बनाना है। जब घर वास्तु सम्मत होता है, तो वह निवासियों के निर्णय लेने की क्षमता, स्वास्थ्य और कार्यक्षमता को बढ़ाता है। यह केवल अंधविश्वास नहीं, बल्कि प्रकाश, हवा और चुम्बकीय क्षेत्रों का सही प्रबंधन है।

अगर आप अपने घर में खुशहाली और उन्नति चाहते हैं, तो इन बातों का रखें ध्यान
मुख्य द्वार की पवित्रता : घर का मुख्य दरवाजा ऊर्जा का प्रवेश द्वार होता है। इसे हमेशा साफ रखें और वहां पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करें। मुख्य द्वार पर 'स्वास्तिक' या 'ॐ' का चिन्ह लगाना शुभ माना जाता है। ध्यान रखें कि दरवाजा खुलते या बंद होते समय आवाज न करे।

ईशान कोण को रखें हल्का :घर का उत्तर-पूर्वी कोना 'देव स्थान' माना जाता है। इस दिशा को हमेशा खाली, साफ और नीचा रखें। यहाँ भारी अलमारियाँ या कबाड़ रखने से प्रगति रुक जाती है। यहाँ जल का स्रोत (जैसे छोटा फव्वारा या कलश) रखना अत्यंत लाभकारी होता है।

रसोई और अग्नि का स्थान : रसोई घर हमेशा आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) में होना चाहिए। यदि ऐसा संभव न हो, तो कम से कम चूल्हा इस दिशा में रखें। अग्नि और जल (सिंक) को कभी भी एक सीध में न रखें, क्योंकि यह परिवार में कलह का कारण बन सकता है।

शयनकक्ष और शांति : घर के मुखिया का कमरा दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए। सोते समय सिर हमेशा दक्षिण की ओर रखें। इससे गहरी नींद आती है और मानसिक तनाव कम होता है। बेडरूम में दर्पण (शीशा) इस तरह न लगा हो कि उसमें आपका सोते हुए शरीर दिखे।

नमक के पानी का पोंछा : नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए सप्ताह में कम से कम दो बार पानी में समुद्री नमक (Saindha Namak) मिलाकर पोंछा लगाएं। यह घर की नकारात्मक तरंगों को सोख लेता है और वातावरण में ताजगी लाता है।

विशेष टिप: वास्तु दोष दूर करने के लिए हमेशा तोड़-फोड़ जरूरी नहीं होती। सही रंगों के चुनाव, पौधों (जैसे मनीप्लांट या तुलसी) और रोशनी के सही तालमेल से भी बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं।

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