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वास्तु से बदल रही है घरों की ऊर्जा: हर क्षेत्र में वास्तु के सिद्धांतों को प्राथमिकता

KHULASA FIRST

संवाददाता

16 फ़रवरी 2026, 5:52 पूर्वाह्न
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वास्तु से बदल रही है घरों की ऊर्जा

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
तेजी से बदलती जीवनशैली और भागदौड़ भरे शहरी जीवन के बीच लोग अब केवल सुंदर घर ही नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर घर की तलाश में हैं। अब वास्तु शास्त्र के प्रति लोगों की रुचि में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। रियल एस्टेट परियोजनाओं से लेकर इंटीरियर डिजाइन तक, हर क्षेत्र में वास्तु के सिद्धांतों को प्राथमिकता दी जा रही है।

मानसिक संतुलन और आर्थिक प्रगति पर प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि घर की दिशा, प्रकाश व्यवस्था, वायु संचार और वस्तुओं की सही स्थिति व्यक्ति के मानसिक संतुलन और आर्थिक प्रगति पर प्रभाव डालती है। यही कारण है कि नए घर खरीदने या निर्माण से पहले लोग अब वास्तु सलाह लेना आवश्यक समझ रहे हैं।

दक्षिण-पूर्व दिशा में रसोई और उत्तर-पूर्व में पूजा स्थल
हाल ही में कई वास्तु सलाहकारों ने बताया कि दक्षिण-पूर्व दिशा में रसोई और उत्तर-पूर्व में पूजा स्थल रखने की प्रवृत्ति बढ़ी है। साथ ही, घर में प्राकृतिक पौधों का प्रयोग, अव्यवस्था को कम करना और मुख्य द्वार को स्वच्छ व आकर्षक रखना सकारात्मक ऊर्जा के प्रमुख उपाय माने जा रहे हैं।

कार्यस्थल में वास्तु संतुलन पर ध्यान
दिलचस्प बात यह है कि केवल पारंपरिक परिवार ही नहीं, बल्कि युवा वर्ग और कॉर्पोरेट पेशेवर भी अपने कार्यस्थल में वास्तु संतुलन पर ध्यान दे रहे हैं। कार्यालयों में बैठने की दिशा, प्रवेश द्वार की स्थिति और प्रकाश का समुचित प्रबंधन उत्पादकता बढ़ाने के साधन के रूप में देखा जा रहा है।

वास्तु अनुरूप डिज़ाइन को प्रमुखता
रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार, जिन परियोजनाओं में वास्तु अनुरूप डिज़ाइन को प्रमुखता दी जा रही है, उनकी मांग और बिक्री दर में वृद्धि देखी गई है। इससे स्पष्ट है कि वास्तु अब केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता सुधारने का एक व्यावहारिक माध्यम बनता जा रहा है।

वास्तु के नाम पर अंधविश्वास से बचें
विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि वास्तु के नाम पर अंधविश्वास से बचते हुए संतुलित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। स्वच्छता, प्राकृतिक प्रकाश, वायु का प्रवाह और सकारात्मक सोच - ये सभी तत्व वास्तु के मूल सिद्धांतों के अनुरूप हैं। अब घर केवल रहने का स्थान नहीं, बल्कि ऊर्जा और संतुलन का केंद्र बनाने की यह सोच समाज में एक सकारात्मक परिवर्तन का संकेत दे रही है।

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