मोहन राज में अखंड पूजा: 2034 में भोजशाला में सरस्वती मंदिर
KHULASA FIRST
संवाददाता

बिना खंडित हुए दिनभर पूजा का संकल्प हुआ पूरा, रात में मनी दीवाली
धारवासियों का बरसों का संकल्प हुआ साकार, पहली बार पूजन-हवन अनवरत चला
दुकान-बाजार बंद कर पूरा शहर शामिल हुआ सरस्वती पूजन में, लालबाग से निकली शोभायात्रा
विश्व हिंदू परिषद ने भोजशाला में नए मंदिर निर्माण की घोषणा की, 2034 में हो जाएंगे 1 हजार साल
भोजशाला परिसर से हटकर हुई नमाज, चुनिंदा लोगों ने की अल्लाह की इबादत
सोशल मीडिया पर दोपहर 1 से 3 बजे के बीच के पूजन-अर्चन के फोटो-वीडियो खूब हुए वायरल
खुलासा फर्स्ट अकेला अखबार था, जिसने डंके की चोट लिखा था- सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड पूजन, वही हुआ भी
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
न दिग्विजय सिंह के दौर में, न उमा भारती और न शिवराजसिंह चौहान की हुकूमत में जो हो पाया, वह मोहन राज में हो गया। धार की भोजशाला वसंत पंचमी पर अखंड पूजन-अर्चन-हवन की साक्षी बनी। डॉ. मोहन सरकार के दौर में पहली बार एक पल के लिए भी वाग्देवी मां सरस्वती की अर्चना में कोई विघ्न न आया।
10 बरस बाद सरकार पर फिर धर्मसंकट आया था, लेकिन इस बार संकट, विकट नहीं हो पाया। न शहर में तनाव पसरा, न तनातनी के कोई पल आए। दोपहर में इबादत कहां हुई, कब हुई, कैसे हुई… किसी को नहीं पता। सिवाय उनके, जिनके शीश अल्लाह की बंदगी में झुके थे।
राजा भोज की नगरी में जिला व पुलिस प्रशासन के बंदोबस्त इतने पुख्ता थे कि धारा नगरी में रत्तीभर भी विघ्न दस्तक न दे पाया। शहर में अमन-ओ-अमन कायम रहा। मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार व जिला प्रशासन ने राजधर्म का पालन किया और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के तहत सबकुछ शांतिपूर्ण संपन्न कराया। नतीजतन जैसे ही दिन ढला, धार में जमकर दीवाली मनी। खूब आतिशबाजी हुई और घी के दीपक प्रज्ज्वलित हुए।
वसंत पंचमी पर नमाज व पूजा साथ-साथ के शोर के बीच आपका प्रिय पक्का इंदौरी खुलासा फर्स्ट ही इकलौता ऐसा अखबार था, जिसमे डंके की चोट पर लिखा था कि भोजशाला में सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड पूजन होगा। ठीक वैसा ही हुआ।
वाग्देवी की पूजा व हवन को इबादत के लिए रोका नहीं गया। तय समय पर इबादत भी हुई और पूजन भी अनवरत चलता रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का सैलाब दोपहर के वक्त भी भोजशाला परिसर में ही उपस्थित था। इस दौरान पूरे ओज के साथ मंत्रोच्चार भी होता रहा।
इस दिन विशेष के लिए न सिर्फ धार शहर, बल्कि अगल-बगल के गांव-कस्बे भी बीते एक माह से ज्यादा समय से आंदोलित थे। नतीजतन अलसुबह से धार की सड़कों पर भगवा पताकाओं के संग जनसैलाब उमड़ा हुआ था। लालबाग से वाग्देवी के तैलचित्र के साथ निकली शोभायात्रा के पूर्व ही भोजशाला जाने वाले सभी रास्ते जनसामान्य से अटे पड़े थे। जब शोभायात्रा शुरू हूई, तो सब तरफ बस एक ही जयघोष गूंज रहा था- खाली कर दो रास्ते, भोजशाला के वास्ते।
लगा था इस बार भी कोई ऐसी अनहोनी न हो जाए, जो न सिर्फ धार, बल्कि प्रदेश की शांत फिजा को अशांत कर दे। वसंत पंचमी व जुम्मा दस बरस बाद फिर एक साथ आ गए थे। एक तरफ हिंदू समाज था तो दूजी ओर मुस्लिम समुदाय। दोनों को भोजशाला में ही अपने अपने इष्ट की आराधना करना थी।
श्री पंचमी थी, तो हिंदू समाज को मां सरस्वती का पूजन करना था। भोजशाला वाग्देवी का ही पुरातन मंदिर है। भले ही मामला कानून की पेचीदगियों में फंसा है, लेकिन ये सर्वविदित है कि भोजशाला एक मंदिर व संस्कृत पाठशाला की रचना है।
इसी रचना के एक हिस्से में कमाल मौला का अस्तित्व भी किसी कालखंड में आ गया। लिहाजा धार नगरी ही नहीं, प्रदेश की मोहन सरकार भी एक संवेदनशील मसले की ‘धार' पर सवार थी। सुप्रीम कोर्ट के दखल ने इस मामले की गंभीरता में इजाफा कर दिया।
पूजा व इबादत का एक ही वक्त होने से कई तरह की अनहोनी की आशंका फिजाओं में तैर रही थी, लेकिन धार के दोनों समुदायों ने इस बार ज्ञान की देवी सरस्वती की कृपा से बुद्धिमत्ता का उदाहरण दिया। सब कुछ निर्विघ्न व आनंदमय पूर्ण हुआ। मोहन सरकार को इस बात का श्रेय मिला कि उसने राजधर्म का पालन भी किया और अखंड पूजन भी हुआ।
भोजशाला के हजार वर्ष पर भव्य सरस्वती मंदिर, 2034 का वर्ष तय
भोजशाला मुक्ति आंदोलन के नाम से चल रहे समूचे मालवा अंचल के दशकों के संघर्ष को शुक्रवार को नया आयाम मिला। मोतीबाग में हुई धर्मसभा में विश्व हिंदू परिषद की तरफ से घोषणा हुई कि भोजशाला में जल्द ही भव्य-दिव्य नूतन सरस्वती मंदिर आकार लेगा। मंदिर निर्माण वर्ष 2034 में होगा। विहिप के मुताबिक 2034 में भोजशाला को अस्तित्व में आए 1 हजार साल हो जाएंगे। 1034 में राजा भोज के राज में ज्ञान के इस तीर्थ का निर्माण हुआ था। विहिप ने दावा किया कि ठीक 9 बरस बाद यहां भव्य मंदिर बन जाएगा। इस मंदिर में वाग्देवी मां सरस्वती का वह विग्रह विराजमान होगा, जो सात समंदर पार है। धर्मसभा में बार-बार भोजशाला में इबादत करने वालों से आह्वान किया गया कि मंदिर परिसर में इबादत का इतना ही प्रेम है, तो ऐसे लोग हिंदू धर्म धारण कर लें।
जिला प्रशासन ने माना आभार
धार जिला व पुलिस प्रशासन ने दोनों समुदायों का आभार माना। उधर, शहर के मुस्लिम समाज ने पूजा व नमाज के शांतिपूर्ण रूप से संपन्न होने पर राहत की सांस ली और कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक का आभार भी माना। जिला व पुलिस प्रशासन ने भी मुस्लिम समुदाय की इस पूरे मामले में तारीफ की, जिसके कारण ये सब संभव हुआ।
हालांकि मुस्लिम समाज का एक बड़ा तबका इस सब घटनाक्रम से नाराज नजर आया। वह कैमरे के सामने भी मुखर हुआ और इबादत होने की बात को नकारता रहा, लेकिन जिला प्रशासन द्वारा तय की गई जगह पर तय समय पर हुई नमाज के फोटो इस बात का सबूत रहे कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अक्षरशः पालन हुआ।
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