खबर
Top News

जहरीले पानी ने ली 26 महीने की मासूम सिया की जान: भागीरथपुरा दूषित जलकांड; मौत का आंकड़ा 35 पार

KHULASA FIRST

संवाददाता

11 फ़रवरी 2026, 11:50 पूर्वाह्न
341 views
शेयर करें:
जहरीले पानी ने ली 26 महीने की मासूम सिया की जान

भागीरथपुरा दूषित जलकांड; मौत का आंकड़ा 35 पार, 75 वर्षीय शालिग्राम बघेल ने तोड़ा दम, सरकारी फाइलों में बीमारी और मोहल्ले की गलियों में जहर बनता दूषित पानी

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के भागीरथपुरा इलाके में पसरा मातम अब आक्रोश में बदलता जा रहा है। क्षेत्र में संदिग्ध बीमारियों और दूषित पानी के कथित प्रकोप के बीच मंगलवार को एक और दुखद खबर सामने आई। 75 वर्षीय बुजुर्ग शालिग्राम बघेल की इलाज के दौरान मौत हो गई, जिसके बाद प्रशासन के दावों और स्वास्थ्य विभाग की मुस्तैदी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजन का आरोप है कि शालिग्राम की स्थिति उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद बिगड़ी थी, जबकि जिला प्रशासन अब भी इसे दूषित पानी से होने वाली मौतों की श्रेणी में मानने से कतरा रहा है।

शालिग्राम बघेल के अंतिम समय की कहानी व्यवस्थाओं की लाचारी बयां करती है। बेटी मोना ने रुंधे गले से बताया पिता की जान बचाने के लिए उन्होंने एक नहीं, बल्कि तीन-तीन अस्पतालों के चक्कर काटे। अरबिंदो अस्पताल में इलाज के बाद जब स्थिति में सुधार नहीं दिखा तो सोमवार रात उन्हें घर लाया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।

एक तरफ स्थानीय निवासी इस मौत को संक्रमण और दूषित पानी की सप्लाई से जोड़कर देख रहे हैं, दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग का तर्क है बुजुर्ग पहले ही गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे और उन्होंने चिकित्सकीय सलाह के बावजूद अस्पताल छोड़ने का निर्णय लिया था। भागीरथपुरा में बढ़ती मौतों की संख्या प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है ।

भा गीरथपुरा इलाके में सरकारी तंत्र की जानलेवा अनदेखी ने एक और मासूम बच्ची के प्राण ले लिए। नलों से होने वाली दूषित जल की सप्लाई अब क्षेत्र के घरों में मातम फैला रही है। मंगलवार सुबह सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में इलाज के दौरान 26 माह की मासूम सिया प्रजापति की मौत ने प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

भागीरथपुरा में गंदा पानी पीने से होने वाली मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है और सिया की मौत इस काली सूची में 35वीं दुखद कड़ी है। हैरानी की बात यह है कि एक के बाद एक 35 जिंदगियां खत्म होने के बावजूद अब तक नगर निगम के किसी भी दोषी अधिकारी के खिलाफ पुलिस मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है।

प्रशासन और पुलिस की यह चुप्पी उन परिवारों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसी है, जिन्होंने अपने अपनों को खोया है। शुक्ला वाली गली निवासी सूरज प्रजापति की बेटी की मौत के बाद पूरे इलाके में गम के साथ-साथ भारी आक्रोश है।

बच्ची के लिवर तक पहुंच गया था संक्रमण... नगर निगम द्वारा की जा रही जहरीले पानी की आपूर्ति ने मासूमों के शरीर को भीतर से खोखला करना शुरू कर दिया है। सिया की मां सोनम प्रजापति ने रुंधे गले से बताया कि गंदे पानी के सेवन से उनकी बेटी को लगातार उल्टियां और दस्त की शिकायत हुई थी।

संक्रमण इतना भीषण था कि वह बच्ची के लिवर तक पहुंच गया था, जिसके बाद उसे सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में वेंटीलेटर पर रखा गया था। कई दिनों से मौत से संघर्ष कर रही सिया ने आखिरकार मंगलवार सुबह दम तोड़ दिया। इस घर में अब मातम है, जहां सिया का 3 साल का बड़ा भाई शिवांश अपनी मां से लगातार पूछ रहा है कि उसकी बहन कब घर वापस आएगी।

प्रशासन की इस आपराधिक लापरवाही ने एक खुशहाल परिवार को ताउम्र का दर्द दे दिया है। क्षेत्र की जनता का आरोप है कि नगर निगम को कई बार जहरीले पानी की शिकायत की गई, लेकिन अफसरों की घोर संवेदनहीनता के कारण आज भागीरथपुरा का हर घर खतरे के साए में है।

तकनीकी स्पष्टीकरण का सहारा ले रहा अस्पताल प्रशासन... वहीं दूसरी ओर अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते हुए मुआवजा और सहायता राशि देने से बचने के लिए तकनीकी स्पष्टीकरण का सहारा ले रहे हैं। एमवाय अस्पताल के पीडियाट्रिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक लड्ढा का कहना है कि बेबी सिया को पांच फरवरी को भर्ती किया गया था, जिसके लिवर में पस और निमोनिया था।

ऑपरेशन के बाद भी संक्रमण बढ़ने और मिर्गी के दौरे आने के कारण उसकी मृत्यु हुई। अस्पताल का यह बयान सीधे तौर पर उस जमीनी हकीकत को नकारने की कोशिश है, जिसमें दूषित जल ही इस पूरी त्रासदी की जड़ है।

मोबाइल से फोटो खींचकर डॉक्टर को दिखाई थी एक्सरे रिपोर्ट... पीड़ित पिता को इलाज के दौरान भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बेटी सिया का आयुष्मान कार्ड न होने के कारण जांच के लिए खर्च हुआ और एक्सरे रिपोर्ट फोटो खींचकर डॉक्टर को दिखाना पड़ी।

अस्पताल अधीक्षक डॉ. डीके शर्मा ने भी बिल माफ करने की सहायता के आवेदन पर केवल आयुष्मान ड्यू अपडेट लिखकर इतिश्री कर ली। जहरीली सप्लाई बंद होने के बाद भी संक्रमण के शिकार हुए भागीरथपुरा में बुजुर्गों और मासूमों की मौतों का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा।

संबंधित समाचार

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!