इस ऐतिहासिक स्थल विवाद मामले पर नहीं हुई सुनवाई: किसकी हड़ताल के चलते ऐसा हुआ
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
धार में भोजशाला विवाद पर आज होने वाली सुनवाई वकीलों की हड़ताल के कारण टाल दी गई। अब अगली सुनवाई 18 फरवरी को तय की गई है। इस विवाद की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के 28 जनवरी के आदेश के बाद इंदौर हाईकोर्ट में हो रही है।
कोर्ट ने सभी पक्षकारों को आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) की रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। हालांकि यह रिपोर्ट बंद लिफाफे में पेश की गई थी और 16 फरवरी को इसे खोला जाना था।
हाईकोर्ट की डबल बेंच में जज विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी के समक्ष सुनवाई होनी थी, लेकिन वकीलों की हड़ताल के कारण यह स्थगित कर दी गई। हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने बताया कि अगली सुनवाई 18 फरवरी को होगी।
एएसआई सर्वे और रिपोर्ट
ASI ने हिंदू पक्ष के आवेदन पर 15 जुलाई 2024 को वैज्ञानिक सर्वे किया था। मुस्लिम पक्ष ने आरोप लगाया कि सर्वे गलत तरीके से हुआ और रात के समय परिसर में बदलाव किए गए। इसके साथ ही उन्होंने कोर्ट में कहा कि पुराने मामलों की सुनवाई पहले होनी चाहिए। हाईकोर्ट में याचिका संख्या 10497/2022 लगी थी। 11 मार्च 2024 को कोर्ट ने सर्वेक्षण का आदेश दिया। मौलाना कमालउद्दीन वेलफेयर सोसायटी ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
पक्षकार
हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता हैं: हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री, आशीष गोयल, आशीष जनक, मोहित गर्ग, जितेंद्र सिंह और सुनील सारस्वत।
पक्षकारों में शामिल हैं: केंद्र सरकार, ASI, मध्य प्रदेश शासन, जिला कलेक्टर, एसपी धार, मौलाना कमालउद्दीन वेलफेयर सोसायटी और श्री महाराजा भोज सेवा संस्थान समिति।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार, हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच रिपोर्ट को खुली अदालत में अनसील करे और दोनों पक्षों को इसकी प्रतियां उपलब्ध कराए। इसके बाद पक्षकार अपनी आपत्तियां और सुझाव प्रस्तुत कर सकते हैं।
विवाद की पृष्ठभूमि
धार में स्थित भोजशाला परिसर 11वीं सदी का ऐतिहासिक स्मारक है। हिंदू पक्ष इसे देवी सरस्वती का मंदिर मानता है। इसे परमार वंश के राजा भोज ने संस्कृत शिक्षा का केंद्र बनाने के लिए बनवाया था। परिसर में नक्काशीदार स्तंभ, शिलालेख और प्राचीन विद्वानों के उल्लेख मिलते हैं।
मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद मानता है और दावा करता है कि यहां सदियों से नमाज अदा होती रही है। ऐतिहासिक दस्तावेजों में मध्यकालीन संरचनात्मक बदलावों और इस्लामी स्थापत्य शैली के नमाज स्थल का उल्लेख मिलता है।
पिछले दशकों में वसंत पंचमी और जुमे की नमाज एक साथ पड़ने पर तनाव की स्थिति बन चुकी है। प्रशासन ने दोनों समुदायों के बीच तालमेल बनाने की कोशिश की है। मामला अदालतों में लगातार लंबित है।
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