अब भी वक्त है, संभल जाएं संगठन व सरकार लगाम लगाएं, निगरानी बढ़ाएं: विधायकों की शह से बेलगाम हुए भाजपा पार्षद, जनता की समस्याओं से दूर
KHULASA FIRST
संवाददाता

इंदौर में जनता के बीच वसूलीबाज कहलाने लगे भाजपाई पार्षद, ऐसे कभी न थे शहर में पार्षदों के हाल
बिल्डर ही नहीं, ठेले, रेहड़ी, पटरी पर रोज कमाने-खाने वालों तक को नहीं छोड़ रहे पार्षद, सबसे वसूली
पार्टी के प्रति कोई निष्ठा नहीं बची, विधायक के कहने पर ही आते-जाते हैं दल के कार्यक्रम में
पार्षदों पर न भोपाल से नजर, न इंदौर में संगठन का कोई डर, न कोई वरिष्ठ नेता की धमक, जमकर मनमर्जी
भागीरथपुरा कांड से सबक लें मुख्यमंत्री व प्रदेश अध्यक्ष, नहीं तो इंदौर में कहीं की नहीं रहेगी पार्टी
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
निगरानी के अभाव में भाजपा संगठन व सरकार को पता है पार्टी पार्षद अपने-अपने इलाके में क्या कर रहे हैं? इन पार्षदों की जनता के बीच इमेज क्या है? इंदौर में अब भाजपा के पार्षद क्या कहलाने लगे हैं, पता है? इक्का-दुक्का पार्षद ही होंगे, जो पूरे मनोयोग से पार्षदी का धर्म निभा रहे हों।
शेष तो बस वसूली में लगे हुए हैं। इसलिए इंदौर के भाजपाई पार्षदों को अहिल्या नगरी में ‘वसूलीबाज’ कहा जाने लगा है। ये भोपाल व दिल्ली को खबर है? कभी संगठन व सरकार ने इसकी जानकारी लेने की कोई गुपचुप कोशिशें की कि इन दिनों पार्टी पार्षद जनता की समस्याओं के निराकरण से हटकर किन क्रियाकलापों में लिप्त हैं? या संगठन व सरकार भी आंख देखे मक्खी निगलने को मजबूर हो चले हैं? या भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने टिकट वितरण करते ही इनकी जवाबदेही से स्वयं को मुक्त कर लिया कि पार्षद जानें और उनके विधायक जानें।
पार्षद क्या जनता के काम कर रहे हैं? सड़क, गटर, नाली, बिजली के खंभे, पानी, ड्रेनेज, डामरीकरण, मुरम-गिट्टी से गड्ढे भरना, कच्ची सड़क, खरंजा बनाना आदि। ये काम हैं क्या पार्षदों के हिस्से में। अब इंदौर कोई पुराना शहर तो नहीं रहा कि इन सब माननीयों को इन समस्याओं से जूझना पड़े।
20 बरस की प्रदेश में भाजपा की सत्ता व 25 बरस की नगर निगम की हुकूमत ने इंदौर को इन सब समस्याओं से तो लगभग मुक्त ही कर दिया है। गली-कूचों तक में सीमेंट की सड़कें हो गई हैं। स्मार्ट सिटी बनने के बाद तो ड्रेनेज, पानी यहां तक कि बिजली लाइन तक अंडरग्राउंड हो चली है।
नाले धुले-मंजे हो गए। तो फिर अलसुबह से देर रात तक पार्षद कर क्या रहे हैं? ये जानने की कोशिश तो करे भाजपा का प्रदेश नेतृत्व व मोहन सरकार। इन्हें पूरी तरह विधायकों के भरोसे ही छोड़ रखने का अंजाम अभी भागीरथपुरा में देख लिया न? सरकार ही नहीं, पूरी भाजपा पर कालिख पुत गई।
पार्टी के पार्षद हैं या विधायक के जरखरीद गुलाम?
भाजपा के पार्षद निगरानी के अभाव में पूरी तरह बेलगाम हो गए हैं। विधायकों की शह ने इन्हें और बेफिक्र कर दिया है। विधायक इनके टिकट दिलाने के वक्त से ही आका बने हुए हैं और इनके हर काम के हिस्सेदार भी। वार्ड का हर ‘काला-पीला' परस्पर जुगलबंदी से मैनेज हो रहा है और मुनाफे में हिस्सेदारी भी।
लिहाजा इनकी तमाम निष्ठाएं अपने-अपने विधायक के प्रति ही हैं। वे ना कर दें तो कार्यक्रम में झांकते भी नहीं। भले ही वह कार्यक्रम पार्टी संगठन का हो या फिर नगर निगम का या सांसद, मंत्री का। अपने विधायक ने मना कर दिया तो फिर इन्हें किसी का डर नहीं। ऐसी स्थिति भाजपा में कब से न केवल बन गई, बल्कि स्थापित भी हो गई।
किसे खबर नहीं? इस बात से क्या प्रदेश नेतृत्व अनभिज्ञ है कि इंदौर में पार्षद इतने अराजक हो गए हैं? क्या दिल्ली दरबार को ये खबर है कि इंदौर का पार्षद अब पार्टी का नहीं, विधायक की निजी मिल्कियत में तब्दील हो गया है। सीधे शब्दों में विधायक का जरखरीद गुलाम?
अभी भी वक्त है, ‘भागीरथपुरा' से सबक लें मुख्यमंत्री-प्रदेश अध्यक्ष
पार्षदों पर न भोपाल से नजर है, न इन्हें इंदौर संगठन का कोई डर। न अब इंदौर में ऐसे कोई वरिष्ठ नेता की धमक या चमक बची। वयोवृद्ध नेता अब मार्गदर्शन मंडल मुकर्रर कर दिए गए हैं। जो दमदार नेता हैं, उनके हाथ बांध दिए गए। लिहाजा पार्षदों के मामले में शहर में पार्टी का कोई धणीधोरी नहीं।
इसलिए पार्षदों की जमकर मनमर्जी व अवैध वसूली चल रही है। हालात इस कदर खराब हैं कि पार्षद बिल्डर ही नहीं, ठेले, रेहड़ी, पटरी पर रोज कमाने-खाने वालों को भी नहीं छोड़ रहे। इन गरीबों तक से वसूली हो रही है और निगम की ‘पीली गैंग’ इसमें मददगार बनी हुई है।
लिहाजा अनेक अतिक्रमण मुहिम के बाद भी सड़कों पर जबरदस्त कब्जे बरकरार हैं और ट्रैफिक बदहाल। पार्षदों पर संगठन व सरकार की अनदेखी का ही ये असर है कि भागीरथपुरा जैसा कांड हो जाता है। अभी भी वक्त है, सरकार व संगठन संभल जाएं। इन बेलगाम पार्षदों पर वक्त रहते लगाम लगाएं।
इनकी निगरानी बढ़ाएं कि ये अपने वार्ड में किस तरह के अवैध काम या वैध काम में भी अवैध वसूली कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव व प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को ये काम प्राथमिकता से अब करना ही होगा, क्योंकि भागीरथपुरा कांड से प्रदेश सरकार व भाजपा संगठन की साख पर गहरा आघात लगा है।
देशभर में मध्य प्रदेश की छवि पर कालिख लगी। लिहाजा अब न सिर्फ पार्षद, बल्कि उनके गॉडफादर बने विधायकों पर भी नकेल कसी जाए। अन्यथा ये इंदौर है, 9 की 9 दे सकता है तो ले भी सकता है। भरोसा न हो तो 1993 के बाद 1998 का विधानसभा चुनाव परिणाम देख लेना।
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