इस शहर में जमीन के जादूगर फिर मैदान में: इस पूर्व कलेक्टर ने बचाई थी इतने करोड़ की भूमि; हथकंडे अपनाकर वापस लेने का प्रयास
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर में करीब 250 करोड़ रुपए मूल्य की खजराना स्थित जमीन को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। यह वही जमीन है, जिसे तत्कालीन कलेक्टर मनीष सिंह ने भूमाफिया अभियान के दौरान सरकारी घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की थी। अब इसी जमीन को कानूनी दांव-पेंच के जरिए वापस लेने की कोशिश की जा रही है।
खजराना की पांच एकड़ जमीन पर नया विवाद
मामला खजराना के सर्वे नंबर 114 की 2.016 हेक्टेयर (करीब पांच एकड़) जमीन से जुड़ा है। यह भूमि सूर्या हाउसिंग सोसायटी के नाम पर दर्ज थी और चारों ओर से भूमाफियाओं के कब्जों से घिरी बताई जाती रही है।
सिफारिश प्रमुख सचिव को भेजी थी
25 जुलाई 2022 को तत्कालीन कलेक्टर मनीष सिंह ने नगर भूमि सीमा अधिनियम 1976 की धारा 20(1)(क) के उल्लंघन का हवाला देते हुए इस जमीन को शासन में निहित करने की सिफारिश प्रमुख सचिव को भेजी थी। राजस्व रिकॉर्ड के कॉलम-12 में भी उल्लेख किया गया था कि भूमि को शासन में वेस्ट करने की कार्रवाई प्रचलित है।
कैसे सामने आया मामला
यह जमीन वर्ष 1998 में सीलिंग एक्ट के तहत अतिशेष घोषित होने पर आवासहीन लोगों को आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सोसायटी को दी गई थी। शुरुआत में संस्था में 150 सदस्य थे, जो बाद में घटकर 25 रह गए।
जांच में यह खुलासा हुआ था
जांच में यह खुलासा हुआ था कि संस्था पर भूमाफिया से जुड़े लोगों का प्रभाव बढ़ गया था। आरोप है कि दीपक मद्दा के भाई नीलेश जैन संस्था के प्रमुख बने और उनके करीबी, रिश्तेदार व कर्मचारी सदस्य बनाए गए। टीएंडसीपी से आवासीय उपयोग के बजाय कॉर्पोरेट विकास का नक्शा पास कराया गया।
संस्था के सदस्यों की विस्तृत जांच कराई
कलेक्टर रहते हुए मनीष सिंह ने संस्था के सदस्यों की विस्तृत जांच कराई और 25 पन्नों की रिपोर्ट शासन को भेजकर जमीन की छूट शर्तों के उल्लंघन का उल्लेख किया। रिपोर्ट में जमीन की अनुमानित कीमत 250 करोड़ रुपए से अधिक बताई गई थी।
अब हाईकोर्ट में चुनौती
सोसायटी की ओर से हाल ही में अध्यक्ष बने राजेश सोलंकी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में तर्क दिया गया है कि केवल कलेक्टर के पत्र के आधार पर राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव किया गया, जबकि इस संबंध में शासन या सक्षम न्यायालय का कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं हुआ। जस्टिस प्रणय वर्मा की बेंच ने राज्य सरकार और इंदौर कलेक्टर से जवाब तलब करते हुए 25 जुलाई 2022 के पत्र के आधार पर जारी औपचारिक आदेश की प्रति पेश करने को कहा है।
आदेश नहीं तो मुश्किल बढ़ेगी
राजस्व मामलों के जानकारों का कहना है कि रिकॉर्ड में बदलाव केवल विधिवत शासकीय आदेश से ही संभव है। यदि हाईकोर्ट में औपचारिक आदेश प्रस्तुत नहीं किया गया तो शासन के लिए जमीन पर दावा बनाए रखना कठिन हो सकता है।
प्रशासन सतर्क
मामले की जानकारी मिलने के बाद वर्तमान कलेक्टर शिवम वर्मा ने अधिकारियों को सभी दस्तावेज जुटाने और मजबूत जवाब तैयार करने के निर्देश दिए हैं। शासन स्तर पर भी इस जमीन को बचाने को लेकर चर्चा जारी है, ताकि किसी भी तरह से यह भूमि दोबारा भूमाफियाओं के कब्जे में न जाए।
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