नगर निगम का राजस्व विभाग बना अपर आयुक्त की नूरा कुश्ती का केंद्र: संपत्ति के क्षेत्रफल को मुद्दा बनाया; एक एआरओ को निलंबित कराया
KHULASA FIRST
संवाददाता

अब इसी प्लानिंग को आगे बढ़ाकर 714 संपत्तियों में हेरफेर का दावा
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम की साख को उसके ही अफसर दाग लगाने लगे हैं। इसके चलते ही निगम का राजस्व विभाग अपर आयुक्त की नूरा कुश्ती का केंद्र बन गया है। इस अपर आयुक्त ने संपत्ति के क्षेत्रफल में अंतर का जिम्मेदार बताकर एक एआरओ की शहर से रवानगी के बाद भी निलंबित करा दिया।
अब उसी प्लानिंग को आगे बढ़ाते हुए शहर के 22 जोन की 714 संपत्तियों की सूची तैयार कर दावा कर दिया कि अधिकतर एआरओ ने संपत्तियों का क्षेत्रफल घटाकर निगम को नुकसान पहुंचाया है। अपर आयुक्त के इस खेल का खुलासा होते ही निगम में हड़कंप मच गया है।
जानकारों का कहना है कि मौजूदा निगमायुक्त और पूर्व निगमायुक्त की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाकर अपर आयुक्त अपने चहेते दागी अफसरों की तैनाती का मंसूबा पूरा करने के प्रयास में हैं।
नगर निगम में अफसरों की अफसरशाही हावी है। इसके चलते जो अफसर जिस कुर्सी पर बैठा है उसने अपनी कमाई के रास्ते बना लिए हैं। इसके चलते ही राजस्व विभाग के अपर आयुक्त ने अपना प्रभाव जमाने के लिए नूरा कुश्ती का खेल शुरू कर दिया है।
इस खेल में वह अपने आपको ईमानदार अफसर साबित करने में जुटे हुए हैं, जबकि राजस्व विभाग के सहायक राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों को कामचोर साबित करने में जुट गए हैं। इस प्लानिंग को सफल बनाने के लिए अपर आयुक्त ने सोची समझी प्लानिंग के तहत पूर्व निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव व वर्तमान कलेक्टर शिवम वर्मा के कार्यकाल में होने वाले कामकाज को टारगेट करना शुरू किया है।
इससे यह साबित हो जाए कि उनके समय ही निगम में डेढ़ सौ करोड़ का फर्जी बिल घोटाला हुआ और उनके ही कार्यकाल में एआरओ ने संपत्तियों के क्षेत्रफल में बदलाव कर घोटाला किया।
अपर आयुक्त अपने मंसूबे पूरे करने के लिए मौज्ूादा निगमायुक्त क्षितिज सिंघल को भी गुमराह कर अपने मंसूबे पूरे करने की योजना में शामिल करने की योजना पर कार्य कर रहे हैं। इसके चलते ही उन्होंने सबसे पहले वार्ड 74 में निगम सर्वे के दौरान संपत्तियों के क्षेत्रफल में अंतर पाए जाने पर सहायक राजस्व अधिकारी अतुल रावत को निलंबित करने का आदेश जारी कराया।
जबकि जोन 13 के वार्ड 74 में संपत्तियों के क्षेत्रफल में पाए गए अंतर के लिए एक एआरओ किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं हो सकता है। जोन पर अब तक कई एआरओ पदस्थ रहे यदि जिम्मेदार ठहराया जाना है तो सभी को ठहराया जाना चाहिए, लेकिन अफसरशाही के चलते एक पक्षीय कार्रवाई पर निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने भी मोहर लगा दी।
714 संपत्तियों की सूची बनाने का दावा
उसी मुद्दे को आगे बढ़ाने के लिए अब अपर आयुक्त राजस्व ने नया पैंतरा आजमाया और निगम के 22 जोन की करीब 714 संपत्तियों की सूची बनाने का दावा करते हुए सभी संपत्तियों के क्षेत्रफल में सहायक राजस्व अधिकारियों द्वारा बदलाव करने का दावा किया है।
इससे एआरओ को कामचोर साबित कर हटाकर उनकी जगह अपने चहेते दागी अफसरों की तैनाती कर सकें। अपर आयुक्त को निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने जब सूची दिखाई तो उन्होंने कहा कि सूची में दर्ज संपत्तियों के क्षेत्रफल में संशोधन की नोटशीट चलाकर उनमें सुधार कराया जाए, लेकिन अपर आयुक्त ने निगमायुक्त के इस आदेश को ठेंगा दिखाकर अपनी मनमानी शुरू कर दी।
घोटालेबाजों को बढ़ावा: सूत्र बताते हैं कि अपर आयुक्त जिन दागी कर्मचारियों को जोन पर तैनात करने की प्लानिंग कर रहे हैं। उनमें कई घोटालेबाज शामिल हैं। माना जा रहा है कि अपर आयुक्त की संपत्ति के क्षेत्रफल में हेरफेर करने के नाम पर एआरओ को कामचोर साबित करने की प्लानिंग निगमायुक्त क्षितिज सिंघल विफल कर सकते हैं।
मौजूदा सिंघल भी अब अपर आयुक्त की प्लानिग को समझ गए हैं और वह किसी पर भी कार्रवाई करने की जगह संपत्तियों में सुधार पर जोर दे सकते हैं।
सार्वजनिक किए नाम: अपर आयुक्त राजस्व ने प्लानिंग के तहत 714 संपत्तियों की सूची के आधार पर उनके क्षेत्रफल में सुधार की कवायद शुरू नहीं की, बल्कि सहायक राजस्व अधिकारियों के नाम सार्वजनिक करते हुए सूची का खुलासा कर दिया।
इससे एआरओ के नाम सार्वजनिक कर उनकी छवि खराब करने का कारनामा किया। कि अपर आयुक्त ने अपने चहेते करीब आठ एआरआई के नाम की सूची तैयार कर ली है।
सूची पर सवाल: निगम में चर्चा है कि नगर निगम का पोर्टल अब तक कई बार ठप हुआ है। ऐसे में कई बार दर्ज की गई जानकारियां हट गईं। ऐसे में संपत्तियों के क्षेत्रफल में बदलाव की सूची तैयार करना और उस सूची की जांच किए बिना ही एआरओ को जिम्मेदार ठहराया जाना अपर आयुक्त की प्लानिंग का हिस्सा बताया जा रहा है। इससे तैयार सूची पर सवालिया निशान लग गया है। चर्चा है कि यदि सूची सही है तो उस पर संबंधित अधिकारी का पक्ष भी सुना जाए।
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