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जमीन के हेरफेर में निलंबित होने वाला अफसर एआरओ को बता रहा कामचोर: निगम में अपर आयुक्त और एआरओ के बीच शुरू हुई नूरा कुश्ती में नया सनसनीखेज खुलासा

KHULASA FIRST

संवाददाता

02 फ़रवरी 2026, 10:03 पूर्वाह्न
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जमीन के हेरफेर में निलंबित होने वाला अफसर एआरओ को बता रहा कामचोर

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम राजस्व विभाग का अपर आयुक्त अपना प्रभाव जमाने के लिए निगम के सहायक राजस्व अधिकारियों को कामचोर साबित करने में जुटा हुआ है। इसके चलते उसने निगम के 22 जोन की 714 संपत्तियों की सूची तैयार कर ली है।

इस बीच इसी अफसर द्वारा पदस्थ रहते हुए सरकारी जमीन को निजी नाम पर नामांतरण किए जाने के मामले का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। इस मामले में अफसर को शासन ने निलंबित भी किया था। वहीं अफसर अब संपत्ति के क्षेत्रफल में बदलाव का ठीकरा एआरओ के सिर थोपकर निगम कर्मचारियों को हटाने का खेल रच रहा है।

नगर निगम में अफसरों की अफसरशाही हावी है। इसके चलते अफसर अपनी कुर्सी का मनमाने तरीके से उपयोग करते हैं। अपने अधिकारों का खुलकर दुरुपयोग करते हुए जमकर कमाई के रास्ते बनाने में भी संकोच नहीं करते हैं। ऐसा ही एक खुलासा जनहित में खुलासा फर्स्ट कर रहा है। इस मामले में निगम राजस्व विभाग के अपर आयुक्त की मनमानी और लापरवाही का खुलासा हो रहा है।

सूत्र बताते हैं कि जब मौजूदा अपर आयुक्त प्रशासन में एसडीएम का दायित्व संभाल रहे थे उस समय कनाड़िया क्षेत्र की जमीन का एक मामला इनके पास पहुंचा, लेकिन निगम राजस्व विभाग के वर्तमान अपर आयुक्त एवं तत्कालीन एसडीएम शृंगार श्रीवास्तव ने कनाड़िया क्षेत्र की बेशकीमती सरकारी जमीन का निजी नाम पर नामांतरण करा दिया।

इस मामले में शासन द्वारा कार्रवाई कर इसे निलंबित भी किया गया था। लेकिन बाद में जुगत भिड़ाकर अपना निलंबन समाप्त कराने के साथ ही निगम में पदस्थापना कराने में वह सफल हो गया।

यह है मामला
कनाड़िया क्षेत्र स्थित खसरा-343/1/1 (लगभग 0.405 हेक्टेयर) की शासकीय भूमि से जुड़ा विवाद तत्कालीन एसडीएम के पास पहुंचा। मामले में उन्होंने एसडीएम पद पर रहते हुए नियमों और वैधानिक प्रक्रियाओं की अनदेखी कर उक्त भूमि का नामांतरण एक निजी व्यक्ति के पक्ष में कर दिया।

मामले का खुलासा होने पर उसकी जांच की गई। जिसमें सामने आया कि भूमि ‘सरकारी’ होने के बावजूद उसे ‘निजी’ घोषित करने की प्रक्रिया अपनाई गई। इस संबंध में तत्कालीन इंदौर कलेक्टर द्वारा गंभीर अनियमितताएं पाई जाने पर शासन को निलंबन की अनुशंसा भेजी गई।

कलेक्टर की अनुशंसा और विभागीय जांच के आधार पर शासन ने एसडीएम को निलंबित किया था। जांच में यह भी सामने आया कि पद का दुरुपयोग करते हुए राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी की अनुमति दी गई, जिससे शासन को करोड़ों रुपये की वित्तीय हानि हुई।

सबकुछ अनुशंसा के बाद
निगम राजस्व विभाग के अपर आयुक्त श्रृंगार श्रीवास्तव ने राजस्व विभाग की मानिटरिंग करने और बेहतर कामकाज बनाने के लिए तो कोई कारगर नीति नहीं बनाई, लेकिन सभी सहायक राजस्व अधिकारियों के अधिकारों में कटौती कर सभी काम हमारी अनुशंसा से होंगे यह आदेश जारी कर दिया।

इसके बाद निगम राजस्व विभाग में नया खाता खोलने, नामांतरण करने, संपत्ति के क्षेत्रफल में सुधार सहित भवन निर्माण के लिए एनओसी जारी करने तक के काम मुख्यालय से होने लगे हैं। इससे अधिकार विहीन एआरओ महज कुर्सी संभालने तक ही रह गए।

इससे विभाग का समूचा कामकाज प्रभावित होने लगा है। सूत्र बताते हैं कि निगम राजस्व विभाग में इन दिनों कोई भी काम समय पर नहीं हो पा रहा है। इसकी मूल वजह अपर आयुक्त राजस्व बन गए हैं।

जबकि उनको काम को तेज गति से कराने के लिए कुर्सी मिली, लेकिन उन्होंने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए सभी कामकाज अपने द्वारा करने का फरमान जारी कर काम में रोड़ा अटका दिया।

दागी अफसरों की तैनाती का खेल
बताया जाता है कि मौजूदा में अपर आयुक्त राजस्व जोन पर पदस्थ सहायक राजस्व अधिकारियों को हटाने और अपनी पसंद के दागी एआरओ की तैनाती के लिए खेल रच रहे हैं। इसके चलते अपर आयुक्त ने सीधे हमला करते हुए एआरओ को संपत्तियों के क्षेत्रफल में बदलाव करने का जिम्मेदार बनाते हुए निगमायुक्त क्षितिज सिंघल को भी गुमराह करने की कोशिश शुरु कर दी है।

जिससे वह अपने मंसूबे पूरे करने में सफल हो सके। हालांकि निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने नोटशीट चलाकर सभी संपत्तियो के क्षेत्रफल में सुधार की बात कही है लेकिन अपर आयुक्त सभी एआरओ को हटाकर नए अपने चहेते दागी सहायक राजस्व अधिकारियों की तैनाती करने के भरसक प्रयास में जुटा हुआ है।

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