महाशिवरात्रि का महापर्व: गुटकेश्वर महादेव में उमड़ा सैलाब
KHULASA FIRST
संवाददाता

अंकित शाह 99264-99912 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
महाशिवरात्रि का पावन पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह के रूप में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। शहर सहित ग्रामीण अंचलों के शिवालयों में तड़के से ही भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। जल, पुष्प और बेलपत्र अर्पित कर श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना कर रहे हैं।
इंदौर के देवगुराड़िया क्षेत्र में स्थित लगभग एक हजार वर्ष से भी अधिक प्राचीन गुटकेश्वर महादेव मंदिर आज विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा यह मंदिर धार्मिक, ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यताओं से जुड़ा हुआ है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इसी स्थान पर गरुड़ जी ने भगवान शिव की कठोर आराधना की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए। तभी से यह स्थान “गरुड़ तीर्थ” के नाम से विख्यात हुआ।
रामायण से जुड़ा पौराणिक प्रसंग नागपाश से
मुक्ति की कथा
इस पवित्र स्थल का उल्लेख रामायण में भी मिलता है। कथा के अनुसार, जब मेघनाथ ने युद्ध के दौरान भगवान राम और लक्ष्मण को नागपाश में बांध दिया था, तब गरुड़ देव इसी स्थान से युद्धभूमि में पहुंचकर उन्हें नागपाश से मुक्त करते हैं। यह प्रसंग इस स्थल की आध्यात्मिक महत्ता को और अधिक प्रबल बनाता है।
अहिल्याबाई होलकर ने कराया जीर्णोद्धार
वर्षों बाद 18वीं शताब्दी में महान शिवभक्त अहिल्याबाई होलकर ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। उनके प्रयासों से यह प्राचीन धरोहर पुनः सुसज्जित होकर श्रद्धालुओं के लिए सुगम बनी।
गोमुख से निरंतर होता है जलाभिषेक
मंदिर परिसर में स्थित गोमुख से प्राकृतिक रूप से निकलने वाला जल निरंतर शिवलिंग का अभिषेक करता है। इसे चमत्कारी और अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसी आस्था के चलते दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
भक्ति, उत्सव और परंपरा का संगम
हर वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर परिसर में तीन दिवसीय भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। मेले में धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण के साथ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। महाशिवरात्रि के अवसर पर इंदौर के विभिन्न शिव मंदिरों में भी विशेष पूजा-अर्चना की गई।
भक्तों ने भगवान शिव और माता पार्वती को जल, दूध, पुष्प और बेलपत्र अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। पूरा शहर “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा। महाशिवरात्रि का महापर्व न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि श्रद्धा, विश्वास और सनातन परंपरा की जीवंत झलक भी प्रस्तुत करता है।
वैकल्पिक मार्ग
* पत्थर मुंडला से सनावदिया होते हुए कंपेल और वहां से सीधे नेमावर रोड से जुड़ सकते हैं।
* रालामंडल से बिहाड़िया होते हुए कंपेल पहुंचा जा सकता है।
* रालामंडल से तिल्लौर और पिपल्दा मार्ग से भी कंपेल होते हुए आवागमन किया जा सकेगा।
महाशिवरात्रि पर यातायात डायवर्जन: महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर इंदौर स्थित देवगुराडिया शिव मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए 14 से 16 फरवरी तक तीन दिवसीय मेले के दौरान विशेष यातायात व्यवस्था लागू की जाएगी।
दर्शनार्थियों की अधिक संख्या के कारण बायपास ब्रिज से देवगुराडिया मंदिर (नेमावर रोड) तक के ट्रैफिक को डायवर्ट किया जाएगा। नेमावर रोड की ओर जाने वाले वाहन चालकों को पत्थर मुंडला से कंपेल होते हुए जाने की सलाह दी गई है।
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