हो गई शराब माफिया अशोक अरोरा के पतन की शुरुआत: पार्टनर की मंडी अध्यक्ष पद के चुनाव में करारी हार, अरोरा पीडि़तों ने मनाया जश्न
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, नीमच।
यहां के कुख्यात शराब माफिया और आतंक का पर्याय बने हुए अशोक अरोरा के पतन की शुरुआत हो गई है। उसका पार्टनर शैलेष (गोपाल) जीजी कृषि उपज मंडी का चुनाव बुरी तरह हार गया है। इसी के साथ अरोरा का मंडी पर कब्जा करने का षड़यंत्र विफल हो गया है।
माना जा रहा है कि उसके खिलाफ शहरभर के व्यापारी एकजुट हो गए हैं और अब उसके शराब के काले कारोबार के खिलाफ लामबंद हो गए हैं। तय है कि अशोक अरोरा का काला साम्राज्य अब ज्यादा दिनों का मेहमान नहीं है।
कृषि उपज मंडी का चुनाव अरोरा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न था, क्योंकि इसके जरिए उसने एक तीर से कई शिकार किए थे। एक तो उसने अपने बिजनेस पार्टनर शैलेष (गोपाल) जीजी को अध्यक्ष पद के चुनाव में खड़ा किया था और दूसरी कोशिश ये थी कि इसके जरिए वो कृषि उपज मंडी पर कब्जा करना चाहता था, मानों वो भी कोई प्लॉट हो।
उल्लेखनीय है कि अरोरा ने कई प्लॉटों पर अपने गुर्गों के बल पर कब्जा कर रखा है। इन प्लॉटों पर वो अपनी अवैध शराब की अवैध गुमटी रखकर न केवल युवाओं को नशेड़ी बना रहा है, बल्कि गुंडागिर्दी, कब्जाखोरी आदि को बढ़ावा दे रहा है। मंडी के व्यापारियों ने पहले से ही तय कर लिया था कि वो मंडी पर किसी भी स्थिति में अशोक अरोरा का कब्जा नहीं होने देंगे, क्योंकि वो यहां घुस गया तो निश्चित रूप से वो गंगानगर टैक्स (यहां अशोक अरोरा रहता है और उसकी अवैध वसूली) लगा देगा और व्यापारी परेशान हो जाएंगे।
यही नहीं, अशोक अरोरा के गुर्गों का मंडी में आना-जाना पड़ जाएगा और वे यहां अवैध और अवांछनीय गतिविधियां चलाएंगे जिसके कारण उनका व्यापार करना मुश्किल हो जाएगा। व्यापारियों ने संकल्प कर लिया था कि वे किसी भी स्थिति अशोक अरोरा को न तो अगले और न पिछले दरवाजे से मंडी में घुसने देंगे।
उसके आदमी को नहीं जीतने देंगे, वही हुआ। अरोरा का गुर्गा और उसका बिजनेस पार्टनर शैलेष (गोपाल) जीजी 112 वोटों से पराजित हो गया। वो 20 सालों से अध्यक्ष राकेश भारद्वाज से हार गया। इस रोमांचक मुकाबले में राकेश भारद्वाज ने शानदार जीत दर्ज की। अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी सदस्यों के लिए कुल 18 राउंड की मतगणना हुई।
भारद्वाज को 502 मत मिले, जबकि अरोरा का साथी शैलेष गर्ग (जीजी) 390 वोटों पर ही अटक गया। 2 मत निरस्त घोषित किए गए। शैलेष जीजी की हार के बाद मंडी परिसर में उत्साह की लहर दौड़ गई और व्यापारियों ने जश्न मनाया। उनके चेहरे पर इस बात का संतोष था कि अरोरा को मंडी में घुसने का मौका नहीं मिला।
कई व्यापारियों का कहना है कि ये नीमच में अरोरा के पतन की शुरुआत है। अब उसकी दादागिरी खत्म होने का वक्त शुरू हो चुका है। भारद्वाज पूर्व में भी लंबे समय तक मंडी व्यापारी संघ के अध्यक्ष रह चुके हैं और अपने कार्यकाल में व्यापारियों के हितों के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए।
अरोरा की हार में विधायक की जीत
अरोरा समर्थक की करारी हार का एक अर्थ ये भी है कि नीमच में विधायक दिलीपसिंह परिहार की बेहद महत्वपूर्ण जीत है। परिहार अरोरा के खिलाफ अर्से से लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने विधानसभा सत्र में अरोरा के खिलाफ प्रश्न भी पूछा था, लेकिन उसका जवाब नहीं दिया गया।
सरकार की ओर से कहा गया कि इसका जवाब देना जरूरी नहीं है। परिहार की जीत ने एक बात ये भी साफ कर दी है कि अब नीमच में अकेले अरोरा की ही चलने वाली नहीं है। अब वो अकेला शक्तिकेंद्र नहीं बचा, बल्कि उसका रास्ता काटने के लिए विधायक के नेतृत्व में व्यापारियों की बहुत बड़ी लॉबी भी है।
अब अरोरा का आतंक ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाएगा। ये बात नवनिर्वाचित अध्यक्ष राकेश भारद्वाज के बयान से भी साफ होती है। उन्होंने कहा कि ये व्यापारियों की जीत है। वे अब पहले से ज्यादा अधिक सक्रिय रहेंगे और पारदर्शिता के साथ विकास करेंगे। इसका सीधा मतलब है कि वे अरोरा को कोई कारस्तानी अब मंडी में नहीं करने देंगे।
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