इंदौर मेट्रो का मौजूदा रूट व्यावहारिक नहीं
KHULASA FIRST
संवाददाता

डॉ. जेम्स पाल सामाजिक कार्यकर्ता खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर मेट्रो सेवा को लेकर हाल ही में जो अव्यवस्था सामने आई है, उसने फिर सवाल खड़ा किया है क्या हम शहरी परिवहन की समस्या को केवल आंशिक दृष्टिकोण से देख रहे हैं? मेट्रो केवल ट्रैक पर ट्रेन चलाने का नाम नहीं, बल्कि ट्रैफिक दबाव को कम करने, समय बचाने और नागरिकों को सुविधा देने का माध्यम है।
आज की वास्तविकता यह है पीथमपुर से प्रतिदिन बड़ी संख्या में बसें और निजी वाहन इंदौर में प्रवेश करते हैं। ये खासकर राऊ सर्कल, भंवरकुआं, पलासिया और विजय नगर जैसे इलाकों में भारी ट्रैफिक जाम का कारण बनते हैं। मेट्रो का मौजूदा रूट इस जमीनी सच्चाई को पूरी तरह संबोधित नहीं करता।
मेरा सुझाव बिल्कुल स्पष्ट और व्यावहारिक है मेट्रो कॉरिडोर को राऊ सर्कल से खजराना सर्कल तक जोड़ा जाए और आगे वहीं से उस हिस्से से कनेक्ट किया जाए, जहां ट्रैक पहले से तैयार है। इसी तरह देवास नाका से खजराना सर्कल तक सीधा मेट्रो कनेक्शन विकसित किया जाए।
इस प्रस्ताव का ठोस लाभ होगा पीथमपुर–इंदौर बस ट्रैफिक में भारी कमी। मेट्रो कनेक्टिविटी मिलने पर बड़ी संख्या में यात्री बसों की बजाय मेट्रो को प्राथमिकता देंगे। शहर के मध्य हिस्से पर दबाव कम होगा। राऊ, भंवरकुआं और एबी रोड पर ट्रैफिक फ्लो बेहतर होगा।
समय और ईंधन की बचत
रोज़ लाखों मानव-घंटों और ईंधन की बचत संभव है, जो पर्यावरण के लिए भी लाभकारी है। मेट्रो की उपयोगिता और राजस्व दोनों बढ़ेंगे। इंडस्ट्रियल बेल्ट और धार्मिक/व्यावसायिक क्षेत्रों को जोड़ने से यात्रियों की संख्या स्वाभाविक रूप से बढ़ेगी।
शहरी नियोजन की दिशा में बढ़ाएं कदम
यह विस्तार केवल परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि भविष्य के इंदौर की जरूरतों के अनुरूप निर्णय होगा। मेरा मानना है कि यदि मेट्रो को केवल “शो-पीस प्रोजेक्ट” की तरह नहीं, बल्कि ट्रैफिक समाधान उपकरण की तरह डिजाइन किया जाए, तो इंदौर देश के सर्वश्रेष्ठ पब्लिक ट्रांसपोर्ट मॉडल में शामिल हो सकता है। आज आवश्यकता है नीति-निर्माता, प्रशासन और जनप्रतिनिधि जमीनी सच्चाइयों को समझें और मेट्रो
रूट प्लानिंग में व्यावहारिकता को प्राथमिकता दें। राउ सर्कल से खजराना और देवास नाका से खजराना तक मेट्रो कनेक्शन इसी दिशा में एक तार्किक और दूरदर्शी कदम होगा।
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