विवादित थाना प्रभारी को ऐसे ही नहीं मिली राहत: शीर्ष अदालत ने दी कई नसीहतें; कहा-इसलिये दे रहे मौका
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
चंदन नगर थाने के विवादित थाना प्रभारी (TI) इंद्रमणि पटेल को सुप्रीम कोर्ट ने कई नसीहतों के साथ राहत प्रदान की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उन्हें क्लीन चिट नहीं दी जा रही, बल्कि यह साबित करने का एक मौका दिया जा रहा है कि वे संविधान के अनुसार काम करेंगे। पॉकेट गवाह और फर्जी केस के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में उन्हें थाने से हटाने के आदेश दिए थे, जिसके बाद वे लाइन हाजिर (लाइन अटैच) कर दिए गए थे।
क्या है पूरा मामला?
टीआई चंदन नगर के खिलाफ अनवर हुसैन सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। आरोप था कि उसके खिलाफ चार केस थे, लेकिन थाने ने आठ केस बताए जिनमें दुष्कर्म जैसे गंभीर मामले भी जोड़े गए। गलत जानकारी के कारण हाईकोर्ट ने जमानत नहीं दी।
यह आरोप लगाया था
इसी मामले में असद वारसी इंटरवीनर बने और उन्होंने आरोप लगाया कि चंदन नगर थाने से लगातार पॉकेट गवाह यानी पहले से तय फर्जी गवाह बनाए जा रहे हैं। उनके अपने केस में भी ऐसे ही गवाह पेश किए गए। वारसी ने कोर्ट के सामने कई ऐसे केस पेश किए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 13 जनवरी को हुसैन की जमानत मंजूर करने के साथ ही TI को थाने से हटाने और पॉकेट गवाह मामले में सभी पक्षों से जवाब तलब किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
TI के वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कोर्ट से आग्रह किया कि लाइन अटैच TI को किसी गैर-संवेदनशील जगह पर पदस्थ करने की अनुमति दी जाए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम उन्हें क्लीन चिट नहीं दे रहे, लेकिन एक मौका देना चाहते हैं। किसी का भी दिल कभी भी बदल सकता है। इसे साबित करने का अवसर मिलना चाहिए। हम उम्मीद करते हैं कि वह बिना पक्षपात के संविधान के अनुसार ड्यूटी करेंगे। आपको कानून के मुताबिक आम जनता के लिए काम करना है। किसी अथॉरिटी या व्यक्ति विशेष के पक्ष में नहीं।
TI पटेल ने दिया व्यक्तिगत आश्वासन
TI इंद्रमणि पटेल सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए और आश्वासन दिया कि मैं वचन देता हूं कि किसी को भी शिकायत का कोई मौका नहीं दूंगा। कोर्ट ने उनके इस आश्वासन को दर्ज करते हुए राहत प्रदान की।
पॉकेट गवाह पर बनेगी राष्ट्रीय नीति
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा कदम उठाते हुए पॉकेट गवाह की समस्या से निपटने के लिए केंद्रीय स्तर पर नीति बनाने हेतु कमेटी गठित कर दी है। इस कमेटी की रूपरेखा इस प्रकार है- हर राज्य में मुख्य सचिव (CS) और DGP इसकी निगरानी करेंगे। हर राज्य से एक SP स्तर का अधिकारी नोडल अधिकारी होगा। कमेटी की बैठक भोपाल पुलिस अकादमी में होगी। कमेटी का संपूर्ण खर्च केंद्रीय गृह मंत्रालय वहन करेगा।
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