पीथमपुर तक इकोनॉमिक कॉरिडोर बनने से बदलेगी क्षेत्र की तस्वीर: 8 लेन के मार्ग पर खर्च होंगे 2360 करोड़ रुपए
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
एमपीआईडीसी ने इंदौर से पीथमपुर तक 21 किमी लंबे इकोनॉमिक कॉरिडोर की योजना बनाई है, जो इस क्षेत्र की तस्वीर बदल देगी। इस मार्ग पर न केवल दोनों ओर औद्योगिक सेक्टर बनेंगे, बल्कि हाउसिंग प्रोजेक्ट भी आएंगे। 8 लेन के इस मार्ग पर 2360 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
इस कॉरिडोर के अस्तित्व में आने के बाद पीथमपुर इंदौर में ही शामिल हो जाएगा, जिसकी घोषणा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पूर्व में कर चुके हैं। न केवल इंदौर, बल्कि आसपास के क्षेत्रों व पीथमपुर का भी औद्योगिक परिदृश्य बदल जाएगा। यह कॉरिडोर गोम्मटगिरि के पास से शुरू होकर पीथमपुर के एबी रोड तक जाएगा, जिसमें एयरपोर्ट, शहर और पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र आपस में कनेक्ट हो जाएंगे।
किसानों को 60 प्रतिशत विकसित भूमि दी जाएगी वापस- खास बात ये भी है कि पूरे कॉरिडर में जिन गांवों के जिन किसानों की जमीनें आ रही हैं, वे सहर्ष इसके लिए तैयार हो गए हैं। उन्हें 60 प्रतिशत विकसित भूमि वापस दी जाएगी। कॉरिडोर के दोनों ओर 3 से 5 किमी तक औद्योगिक जोन बनेगा।
कुल 1290.74 हेक्टेयर (लगभग 3200 एकड़) भूमि का विकास होगा। किसान यदि चाहें तो अपनी जमीन पर खुद उद्योग भी लगा सकेगा या उद्योगपतियों को बेच सकेगा। यह लैंड पूलिंग एक्ट के तहत लागू नई नीति के तहत होगा, जहां सामान्यत: 50 प्रतिशत भूमि लौटा दी जाती है। किसान नकद चाहेंगे तो वो भी मिलेगा।
हाउसिंग और कमर्शियल डेवलपमेंट का भी प्लान
केवल उद्योग ही नहीं, इस कॉरिडोर में हाउसिंग स्कीम भी लागू होगी। उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारियों और कारोबारियों के लिए कॉलोनाइजर आवास उपलब्ध कराएंगे। किसान और बिल्डर मिलकर कॉलोनियां विकसित कर सकेंगे, जिसमें दुकानें, मॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और ऑफिस एरिया भी शामिल होंगे।
इससे क्षेत्र में रिहायशी और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ेंगी, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएंगी। लैंड पूलिंग में अच्छी प्रगति हो रही है, कई सौ हेक्टेयर भूमि पर किसानों की सहमति मिल चुकी है और रजिस्ट्री भी शुरू हो गई है।
एमपीआईडीसी के अधिकारी इसे पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर विकसित कर रहे हैं, जिससे परियोजना तेजी से आगे बढ़ेगी।
इन गांवों से गुजरेगा कॉरिडोर:- कोडियाबर्डी, नैनोद, रिंजलाय, बिसनावदा, नावदा पंथ, श्रीराम तलावली, सिंदोड़ा, सिंदोड़ी, शिवखेड़ा, नरलाय, मोकलाय, डेहरी, सोनवाय, भैंसलाय, बागोदा, टीही और धन्नड़ के किसानों को सीधा लाभ होगा। इन गांवों के ग्रामीणों की आय में बढ़ोतरी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
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