75 का क्वार्टर 110 में बेच रहा अमौली ग्रुप: शराब ठेकेदार के रसूख के आगे प्रशासन नतमस्तक
KHULASA FIRST
संवाददाता

समाजसेवा को कलंकित कर ग्राहकों को लूट रहे अशोक और अरुल अरोरा, स्टिंग ऑपरेशन में ओवर रेटिंग की काली हकीकत का हुआ खुलासा
खुलासा फर्स्ट, नीमच।
जिला प्रशासन और आबकारी विभाग की नाक के नीचे शराब ठेकेदार अशोक अरोरा का अमौली ग्रुप आम जनता की जेब पर खुलेआम डाका डाल रहा है।
खुद को और अपने बेटे अरुल अरोरा को स्वयंभू समाजसेवी बताने वाले अशोक अरोरा की असलियत अब जनता के सामने आ चुकी है। समाजसेवा को कलंकित करने वाले अशोक अरोरा और अरुल अरोरा के ‘खुलासा फर्स्ट’ के स्टिंग ऑपरेशन में नीमच की आधा दर्जन से अधिक दुकानों पर एम आर पी से भारी वसूली का बड़े खेल का खुलासा हुआ है।
ताज्जुब है कि स्टिंग ऑपरेशन के रूप में पुख्ता सबूत के बावजूद जिम्मेदार धृतराष्ट्र की भूमिका में नजर आ रहे हैं, जिससे जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
एक तरफ अशोक अरोरा और उसका बेटा अरुल अरोरा ‘स्वयंभू समाजसेवी’ का चोला ओढ़कर अपनी छवि चमकाने में कोई कसर नहीं छोड़ते, वहीं दूसरी ओर शराब दुकानों के माध्यम से अवैध वसूली और ओवर रेटिंग का धंधा चलाकर ग्राहकों को दोनों हाथों से लूटा जा रहा है।
स्टिंग ऑपरेशन में यह साफ तौर पर कैद हुआ है कि रेलवे स्टेशन रोड, ग्वाल्टोली, बस स्टैंड चौराहा, फवारा चौक और महू रोड स्थित सुरई वाइन शॉप पर नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है।
जहाँ देशी मदिरा (प्लेन) के 180 एमएल क्वार्टर की एमएसपी 65 रुपये और अधिकतम खुदरा कीमत (एम आर पी) मात्र 75 रुपये निर्धारित है, वहीं इन दुकानों पर लुटेरा सिंडिकेट ग्राहकों से अवैध रूप से 110 रुपये वसूल रहा है।
इसी तरह, मसाला मदिरा जिसका सरकारी दाम 106 रुपये है, उसे 130 रुपये में धड़ल्ले से बेचा जा रहा है। अंग्रेजी शराब के शौकीनों के साथ भी सरेआम धोखाधड़ी की जा रही है,मैकडॉवेल्स व्हिस्की (750 एम एल) की बोतल पर तय कीमत 800 रुपये होने के बावजूद अरोरा की दुकानों पर इसे 900 रुपये में बेचा जा रहा है।
इस तरह प्रत्येक बोतल पर 100 रुपये अधिक अवैध रूप से ओवर रेटिंग में महंगी शराब बेच कर ग्राहकों को लूटा जा रहा है और शासन के राजस्व नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं।
अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान
बावजूद इसके, नीमच प्रशासन की मंशा सरकार के माफिया राज विरोधी अभियान के विपरीत दिखाई दे रही है। खुलेआम ओवर रेटिंग और अवैध वसूली के वीडियो सबूत होने के बाद भी आबकारी विभाग का मूकदर्शक बने रहना प्रशासन की मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
नियमों के उल्लंघन पर जहां दुकानों का लाइसेंस तत्काल निलंबित कर सख्त दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए, वहां अधिकारियों की चुप्पी इस शराब सिंडिकेट को मौन संरक्षण देने जैसा है।
अब नीमच की जनता यह सवाल पूछ रही है कि क्या समाजसेवा के पवित्र नाम को कलंकितकर लूट मचाने वाले इन रसूखदारों पर शासन का डंडा चलेगा या फिर कागजी दावों के बीच माफिया राज इसी तरह फलता-फूलता रहेगा।
यह पूरी कार्यप्रणाली जिला प्रशासन और आबकारी विभाग की साख पर एक बड़ा सवालिया निशान है।
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