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इतनी उम्र का शिक्षक और इतने नाबालिगों का यौन शोषण: भारत समेत इतने देशों में वारदात; इनकी हत्या कबूलने का भी आरोप

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संवाददाता

11 फ़रवरी 2026, 11:19 पूर्वाह्न
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इतनी उम्र का शिक्षक और इतने नाबालिगों का यौन शोषण

खुलासा फर्स्ट, पेरिस।
फ्रांस में 79 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक जैक लेवुग्ल पर 1967 से 2022 के बीच 89 नाबालिगों के साथ यौन शोषण और दुष्कर्म करने के आरोप लगे हैं। ग्रेनोबल के अभियोजक एटिएन मंटो ने मंगलवार को मामले का खुलासा करते हुए संभावित पीड़ितों से आगे आकर गवाही देने की अपील की है।

कथित रूप से नौ देशों में अपराध
समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, आरोपी ने कथित रूप से भारत, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, मोरक्को, नाइजर, अल्जीरिया, फिलीपींस, कोलंबिया और फ्रांस सहित नौ देशों में अपराध किए। पीड़ितों की उम्र 13 से 17 वर्ष के बीच बताई गई है।

शिक्षक और प्रशिक्षक था
आरोपी फ्रेंच भाषा का शिक्षक और स्पेलियोलॉजी (गुफा अध्ययन) प्रशिक्षक था। वह विभिन्न देशों की यात्राएं करता था और युवाओं से संपर्क में आता था। 2024 में आरोप तय होने के बाद से वह हिरासत में है।

यूएसबी ड्राइव से खुला राज
मामला तब सामने आया जब आरोपी के एक रिश्तेदार को उस पर संदेह हुआ। तलाशी के दौरान एक यूएसबी ड्राइव मिली, जिसमें नाबालिगों के साथ यौन संबंधों से जुड़ी तस्वीरें और दस्तावेज थे।

ड्राइव में 15 अलग-अलग हिस्सों में लिखित विवरण मौजूद थे, जिनमें आरोपी ने खुद अपने कृत्यों का उल्लेख किया था। जांच एजेंसियों ने इन दस्तावेजों के आधार पर 89 संभावित पीड़ितों की पहचान की।

फ्रांसीसी अधिकारियों ने आरोपी की 1965 से 2000 के दशक तक की तस्वीरें सार्वजनिक की हैं, ताकि अन्य संभावित पीड़ित उसे पहचान सकें और सामने आ सकें।

मां और मौसी की हत्या का भी आरोप
जांच के दौरान आरोपी ने 1970 के दशक में कैंसर से पीड़ित अपनी मां और 1990 के दशक में 92 वर्षीय मौसी की तकिए से दम घोंटकर हत्या करने की बात स्वीकार की है। अभियोजक के अनुसार, उसने अपनी डायरी में दो हत्याओं का जिक्र भी किया है। इन दोनों मामलों में अलग से हत्या की जांच जारी है।

फ्रांस में हालिया बड़ा यौन अपराध मामला
मई 2025 में फ्रांस की अदालत ने एक अन्य रिटायर्ड डॉक्टर जोएल ले स्कुआर्नेक को 299 मरीजों, जिनमें अधिकांश बच्चे थे, के यौन शोषण के मामले में 20 साल की सजा सुनाई थी। यह मामला भी डायरी और दस्तावेजों के आधार पर उजागर हुआ था।

विशेषज्ञों और बाल अधिकार संगठनों का कहना है कि इन मामलों ने संस्थागत निगरानी और शिकायत निवारण प्रणाली की कमजोरियों को उजागर किया है।

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