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मंत्री विजय शाह पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: कर्नल सोफिया कुरैशी पर टिप्पणी के मामले में दो हफ्ते में फैसला देने के निर्देश; माफी नामंजूर

KHULASA FIRST

संवाददाता

20 जनवरी 2026, 11:30 पूर्वाह्न
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मंत्री विजय शाह पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े मामले में कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए स्पष्ट किया है कि अब देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सोमवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिए कि वह दो सप्ताह के भीतर यह तय करे कि मंत्री विजय शाह के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की मंजूरी (सैंक्शन) दी जाए या नहीं।

अदालत ने कहा कि अब तक सैंक्शन न दिया जाना गंभीर प्रश्न खड़े करता है और इस देरी का जवाब राज्य सरकार को देना होगा। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने SIT की सीलबंद रिपोर्ट खोली और उसका अवलोकन किया।

रिपोर्ट पढ़ने के बाद कोर्ट ने टिप्पणी की कि निचली अदालत में लंबित मामले में आवश्यक अनुमति अब तक नहीं दी गई, जबकि प्रक्रिया काफी पहले पूरी हो जानी चाहिए थी।

अदालत ने दो टूक कहा कि “राज्य सरकार दो हफ्तों में सैंक्शन देने पर विचार करे और अब तक हुई देरी का कारण स्पष्ट करे।

वहीं, मंत्री विजय शाह की ओर से पेश किए गए माफीनामे को सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती से खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि अब माफी का कोई औचित्य नहीं रह गया है, क्योंकि बहुत देर हो चुकी है।

कोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि पहले दाखिल की गई ऑनलाइन माफी पर भी अदालत अपनी टिप्पणी दे चुकी है और उसे स्वीकार्य नहीं माना गया था।

अब बहुत देर हो चुकी है
शाह के वकील द्वारा माफी का हवाला दिए जाने पर बेंच ने स्पष्ट कहा—अब बहुत देर हो चुकी है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य जुड़े मामले में एसआईटी से विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट भी तलब की है और जांच के शेष पहलुओं पर विस्तृत जानकारी देने के निर्देश दिए हैं।

यह पूरा मामला उस विवादित टिप्पणी से जुड़ा है, जो मंत्री विजय शाह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान मीडिया ब्रीफिंग करने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की थी। टिप्पणी के बाद देशभर में विवाद हुआ, जिस पर हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच के लिए SIT का गठन किया था।

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