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सेंट्रल जेल में चल रही ऐसी गतिविधियां: नशा, अवैध वसूली और वेश्यावृत्ति का खुलासा; वीडियो आया सामने, न्यायिक जांच के आदेश

KHULASA FIRST

संवाददाता

14 अप्रैल 2026, 3:41 pm
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सेंट्रल जेल में चल रही ऐसी गतिविधियां

खुलासा फर्स्ट, ग्वालियर।
ग्वालियर केंद्रीय जेल में कथित अवैध गतिविधियों का एक चौंकाने वाला वीडियो सामने आने के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है। वीडियो के सामने आते ही मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इसे गंभीरता से लेते हुए न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं और विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

वीडियो में उजागर हुए गंभीर आरोप
बताया जा रहा है कि यह वीडियो एक जेल प्रहरी और एक बंदी द्वारा साझा किया गया है। वीडियो में जेल के भीतर भ्रष्टाचार, अवैध वसूली, कैदियों के साथ प्रताड़ना, नशे की सप्लाई, पैसे लेकर बैरक बदलने और यहां तक कि वेश्यावृत्ति जैसी गतिविधियों के आरोप लगाए गए हैं।

तय दरों से ज्यादा वसूली का आरोप
वीडियो में यह भी दावा किया गया है कि जेल में खाने-पीने की चीजों के लिए तय दरों से कई गुना ज्यादा पैसे वसूले जाते हैं। उदाहरण के तौर पर 5 रुपए का बिस्किट 10 रुपए में, 50 रुपए की नमकीन 150 रुपए में और अन्य सामान भी महंगे दामों पर दिया जाता है।

पैसे देकर मिल रही नशे की सामग्री
आरोपों के मुताबिक, जेल के भीतर नशे का सामान भी आसानी से उपलब्ध कराया जा रहा है। गांजा की पुड़िया करीब 1000 रुपए में, 100 रुपए में चार बीड़ी और 600 रुपए में बीड़ी का बंडल मिल रहा। इतना ही नहीं, ज्यादा पैसे देने पर वेश्यावृत्ति जैसी सुविधाएं मिलने के भी आरोप लगाए गए हैं, जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

नए कैदियों से वसूली और प्रताड़ना
वीडियो में यह भी आरोप है कि जेल में आने वाले नए कैदियों से पैसे वसूलने के लिए उन्हें प्रताड़ित किया जाता है। जब तक परिवार से पैसे नहीं आते, उन्हें काम करवाया जाता है, मारपीट की जाती है और अपमानित किया जाता है। कुछ मामलों में कैदियों द्वारा आत्महत्या किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं, जिससे जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

बैरक बदलने के लिए लाखों की डिमांड
कैदियों के मुताबिक, एक बैरक से दूसरी बैरक में शिफ्ट होने के लिए 50 हजार से लेकर 1 लाख रुपए तक की मांग की जाती है। एक कैदी ने दावा किया कि उसने 50 हजार रुपए देकर अपनी बैरक बदलवाई थी।

प्रशासन की कार्रवाई और जांच
वीडियो सामने आने के बाद जेल प्रशासन ने संबंधित प्रहरी को निलंबित कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि इस बयानबाजी से जेल की छवि खराब हुई है। वहीं, जिला एवं सत्र न्यायालय के रजिस्ट्रार भूपेंद्र कुशवाह ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को संज्ञान में लेकर न्यायिक जांच के आदेश दिए गए हैं।

सच्चाई जांच के बाद आएगी सामने
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो में किए गए दावों में कितनी सच्चाई है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायिक जांच शुरू कर दी गई है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जो जेल के अंदर की वास्तविक स्थिति को सामने लाएगी।

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