स्लीपर बसों की मौत वाली डिजाइन पर सख्ती: स्लीपर कोच बसें; अवैध संचालन, जानलेवा सफर और प्रशासनिक मिलीभगत का खेल
KHULASA FIRST
संवाददाता

गडकरी बोले— सीबीआई जांच से नहीं बचेंगे दोषी
तीन साल की पड़ताल के बाद केंद्र सख्त, लेकिन बसों की वैधानिकता पर सवाल कायम
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
खुलासा फर्स्ट के लगातार तीन वर्षों के प्रयासों और खुलासों के बाद आखिरकार परिवहन विभाग और केंद्र सरकार ने स्लीपर कोच बसों में हो रही भीषण दुर्घटनाओं और मौतों पर संज्ञान लिया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाने के लिए धन्यवाद दिया जाना चाहिए, लेकिन इसके बावजूद सबसे बड़ा और बुनियादी सवाल आज भी अनुत्तरित है—आखिर स्लीपर कोच बसों का संचालन वैधानिक है या पूरी तरह अवैधानिक?
स्लीपर कोच बसें देशभर में मोटर यान अधिनियम का खुलेआम उल्लंघन कर सड़कों पर दौड़ रही हैं, जिनकी वजह से अब तक सैकड़ों यात्रियों की जान जा चुकी है।
यह न केवल यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ है, बल्कि सरकार को अरबों रुपये के राजस्व का चूना भी लगाया जा रहा है।
चलती-फिरती मौत बन चुकी हैं स्लीपर कोच बसें
आग लगने, टक्कर, अवैध कैबिन पार्टिशन और घटिया बॉडी निर्माण के कारण स्लीपर बसें चलती-फिरती मौत साबित हो रही हैं। बीते वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों में इन बसों में आग लगने की घटनाओं में हजारों यात्री जिंदा जल चुके हैं। इसके बावजूद लंबे समय तक प्रशासनिक चुप्पी बनी रही।
पर्यटन यान की आड़ में अवैध संचालन: स्लीपर कोच बसों का संचालन अक्सर पर्यटन यान के नाम पर किया जा रहा है। जबकि मोटर व्हीकल एक्ट में स्लीपर कोच बसों का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, फिर भी हजारों बसों का पंजीकरण और बीमा किया जा रहा है। यह पूरे सिस्टम में गंभीर अनियमितताओं और मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
इंदौर के भमोरी क्षेत्र में अवैध स्लीपर बस निर्माण: इंदौर के भमोरी क्षेत्र में सैकड़ों बस बाडी बिल्डर द्वारा स्लीपर कोच बसें अवैध रूप से बनाई जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार यहां बिना मान्यता और सुरक्षा मानकों के बस की बॉडी तैयार की जा रही है, जो सीधे तौर पर यात्रियों की जान के साथ खिलवाड़ है।
सीबीआई जांच के संकेत केंद्र सरकार सख्त
देश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और स्लीपर बसों के निर्माण में हो रही अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार अब सख्त कदम उठाने जा रही है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि कुछ मामलों में सीबीआई जांच के लिए लिखा जाएगा। प्राइवेट बस बॉडी बिल्डरों द्वारा सुरक्षा मानकों की अनदेखी, फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने में लापरवाही और घोटालों के संदेह को देखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है।
अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
गडकरी ने बताया कि पिछले वर्ष केवल तीन महीनों में राजस्थान सहित अन्य राज्यों में स्लीपर बसों में आग लगने की 5–6 घटनाएं हुईं, जिनमें 145 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई। उन्होंने साफ कहा किसी भी तरह की माफी या अनदेखी नहीं होगी। दोषी अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। इस संबंध में राजस्थान सरकार से जवाब तलब किया गया है और भविष्य में सामने आने वाले हर मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
प्राइवेट वेंडरों पर प्रतिबंध, अब नहीं बना सकेंगे स्लीपर बस
केंद्रीय मंत्री ने बड़ा फैसला लेते हुए घोषणा की कि अब प्राइवेट बस बॉडी बिल्डर स्लीपर कोच बसें नहीं बना सकेंगे। अब स्लीपर बसों का निर्माण केवल चेसिस निर्माता कंपनियां ही करेंगी। नए नियमों में कई अतिरिक्त सुरक्षा फीचर भी अनिवार्य किए गए हैं।
वीटूवी तकनीक से टक्कर रोकने की तैयारी
सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सरकार वीटूवी (व्हीकल-टू-व्हीकल) तकनीक लागू करने जा रही है। यह सिस्टम गाड़ियों को आपस में वायरलेस तरीके से जोड़कर स्पीड, ब्रेक और लोकेशन जैसी जानकारी साझा करेगा, जिससे संभावित टक्करों को रोका जा सकेगा। यह तकनीक बसों और ट्रकों में भी अनिवार्य होगी।
2030 तक सड़क हादसे 50% कम करने का लक्ष्य
केंद्र सरकार ने 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में 50 प्रतिशत कमी लाने का लक्ष्य तय किया है। इसमें देश के 100 जिलों में जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना लागू की जा रही है।
रिश्वतखोरी पर सवाल, तकनीक से होगा नियंत्रण
नियम तोड़ने वालों को रिश्वत लेकर छोड़ने के सवाल पर गडकरी और परिवहन सचिव वी. उमाशंकर ने माना कि यह एक गंभीर समस्या है। उन्होंने कहा कि अब मैनुअल एनफोर्समेंट की जगह तकनीक आधारित चालान प्रणाली को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि मानवीय हस्तक्षेप कम हो सके।
कैशलेस इलाज और ‘राहवीर’योजना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही सड़क दुर्घटनाओं में घायलों के लिए कैशलेस इलाज योजना को देशभर में लागू करेंगे। घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को राहवीर कहा जाएगा और उसे 25 हजार रुपये का इनाम मिलेगा। सात दिन के इलाज के लिए सरकार की ओर से 1.5 लाख रुपये दिए जाएंगे।
एमपी में विशेष अभियान
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के संज्ञान के बाद मध्यप्रदेश परिवहन आयुक्त कार्यालय ने प्रदेशभर में स्लीपर कोच बसों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। यह कार्रवाई AIS-052 और AIS-115 बस बॉडी कोड के उल्लंघन को लेकर की जा रही है।
स्लीपर बसों पर तत्काल रोक, कड़े निर्देश: सीआईआरटी की सिफारिशों के अनुसार ड्राइवर कैबिन के अवैध पार्टिशन हटाए जाएंगे। स्लीपर बर्थ के स्लाइडर हटाए जाएंगे। 10 किलो क्षमता के अग्निशमन यंत्र की अनिवार्य जांच। चेसिस से अधिक बढ़ाई गई बस बॉडी परिचालन से बाहर होगी।
फॉर्म 22/22A के बिना पंजीयन नहीं होगा। इमरजेंसी एग्जिट, रूफ हैच और लेआउट अनिवार्य होगा। परिवहन आयुक्त कार्यालय ने सभी जिलों के परिवहन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
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