कुत्ते के काटने पर राज्य सरकारें देंगी पीड़ित को मुआवजा: सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: मौत की स्थिति में राज्य सरकारें होंगी जिम्मेदार
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के काटने के बढ़ते मामलों को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि कुत्ते के काटने से कोई व्यक्ति घायल होता है, विशेषकर बच्चे या बुजुर्ग या फिर मौत की स्थिति बनती है, तो इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होगी और पीड़ितों को मुआवजा देना अनिवार्य होगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में लापरवाही बरतने पर सख्त चेतावनी भी दी है।
वहीं शहर में एक ओर जहां आवारा कुत्तों की समस्या से परेशान लोग लगातार शिकायतें कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हाल ही में एक कुत्ते की पीट-पीट कर हत्या के मामले का खुलासा हुआ है। यह घटना नगर निगम की कार्य प्रणाली और आवारा पशुओं के प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
शहर में विरोधाभासी हालात: कहीं कुत्ते की पीट-पीट कर हत्या, तो कहीं आवारा श्वानों से त्रस्त लोग
जनसुनवाई में उठाए गए सवाल: आवारा कुत्तों से परेशान नागरिक जनसुनवाई में शिकायतें लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। करुणा सागर अपार्टमेंट, कनाड़िया रोड निवासी मुनींद्र कुमार श्रीवास्तव (एडवोकेट) ने कलेक्टर कार्यालय में दिए गए आवेदन में बताया कि वे 13 वर्षों से उक्त अपार्टमेंट में निवास कर रहे हैं।
अपार्टमेंट में कई गंभीर समस्याएं हैं, जिनमें प्रमुख रूप से आवारा कुत्तों की समस्या शामिल है। महिलाओं और छोटे बच्चों को काटने का प्रयास किए जाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे हमेशा भय का माहौल बना रहता है। इसके अलावा कुत्तों के वाहनों के अचानक सामने आने से दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है।
अब तक नहीं हुई कार्रवाई
निवेदनकर्ता ने बताया कि 30 दिसंबर 2025 को एडिशनल कमिश्नर, नगर निगम इंदौर को जनसुनवाई के दौरान सभी रहवासियों के हस्ताक्षर युक्त आवेदन व्यक्तिगत रूप से सौंपा गया था। इसके बावजूद आज तक नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
करुणा सागर अपार्टमेंट के समस्त रहवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि आवारा कुत्तों से उत्पन्न समस्या को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र निराकरण किया जाए, ताकि किसी बड़ी दुर्घटना को रोका जा सके। नगर निगम मुख्यालय में दिए गए आवेदन में भी यह उल्लेख किया गया है कि कई वर्षों से आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ती जा रही है।
कई बार शिकायत के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया, जबकि महिलाओं और बच्चों को काटने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती जनसंख्या को रोकने के लिए एजेंसियों को ठेका देकर नसबंदी करने का अभियान भी चलाया जा रहा है, बावजूद इसके शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या अभियान पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
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