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घर-घर पानी पहुंचाने के लिए जुटा अमला: भागीरथपुरा में संकट के बीच राहत की बयार

KHULASA FIRST

संवाददाता

15 जनवरी 2026, 10:44 पूर्वाह्न
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घर-घर पानी पहुंचाने के लिए जुटा अमला

चंचल भारतीय 98936-44317 खुलासा फर्स्ट…इंदौर।
भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित जल की समस्या के बाद पाइप लाइन से जल प्रदाय बंद होने पर नगर निगम और जिला प्रशासन युद्धस्तर पर राहत कार्यों में जुटा है। क्षेत्र में पानी की किल्लत न हो इसके लिए सुबह से शाम तक टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

टैंकर इंचार्ज कपिल कौशल के अनुसार भागीरथपुरा क्षेत्र को 32 बीट में बांटकर सुचारू वितरण व्यवस्था लागू की गई है। 5000 लीटर क्षमता वाले 60 से अधिक टैंकर प्रतिदिन चक्कर लगा रहे हैं। नई बस्ती की चारों गलियों, यादव कॉलोनी, रेडवाल कॉलोनी, कोट वाली गली, रफेली शिव मंदिर, एमआर-4, सरकारी स्कूल और पूजा टेंट हाउस वाली गलियों में मांग अधिक होने के कारण यहां प्रतिदिन करीब 140 टैंकर भेजे जा रहे हैं।

वहीं बौरासी पान वाली गली, गड्ढा वाली गली और जामुन वाली गली जैसे क्षेत्रों में भी 30 टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाया जा रहा है। कौशल ने बताया कि हमारी प्राथमिकता शुद्ध पेयजल की उपलब्धता है।

बोरिंग बंद होने से बढ़ी चुनौती, रहवासियों ने रखी बात
वार्ड क्रमांक 11 में नई सीवरेज और नर्मदा लाइन डालने का कार्य जारी होने से वर्तमान में नलों से जल प्रदाय स्थगित है। इसी बीच प्रशासन ने दशकों पुराने बोरिंग के पानी को असुरक्षित मानकर उनके विद्युत कनेक्शन काट दिए हैं।

क्षेत्र के समाजसेवी राजाराम बौरासी ने इस पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र में 69 बोरिंग हैं, जिनका उपयोग लोग वर्षों से कर रहे हैं। अचानक इन्हें बंद करने से जनता की परेशानी बढ़ गई है। वहीं रहवासी कवित बिंजवा का कहना है कि वे बोरिंग के पानी का उपयोग केवल घरेलू कार्यों के लिए करते हैं, जबकि पीने के लिए नर्मदा जल ही उपयोग में लेते हैं।

वर्तमान में नगर निगम की टीम शिकायतों का त्वरित निराकरण कर रही है ताकि भागीरथपुरा के हर नागरिक तक पर्याप्त और शुद्ध जल पहुंच सके।

रिफिलिंग और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान
वितरण व्यवस्था को तेज करने के लिए कुलकर्णी का भट्टा, मल्हाराश्रम और स्कीम 140 जैसे क्षेत्रों से 20 और 10 हजार लीटर के बड़े टैंकरों से नर्मदा जल लाया जा रहा है, जिनसे छोटे टैंकरों को रिफिल कर गलियों में भेजा जाता है।

पानी की शुद्धता से कोई समझौता न हो, इसके लिए जल शाखा के फिटर अर्जुन मकवाना मुस्तैद हैं। उनके अनुसार हर टैंकर को भरने के बाद आधुनिक तकनीक से क्लोरीन की जांच की जाती है। मानक गुणवत्ता सुनिश्चित होने के बाद ही टैंकर को वितरण के लिए रवाना किया जाता है।

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