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चौंकाने वाला मामला: 8वीं की छात्रा बनी मां; बेटी को दिया जन्म, हॉस्टल प्रशासन को प्रेग्नेंसी की भनक तक नहीं

KHULASA FIRST

संवाददाता

31 जनवरी 2026, 1:05 अपराह्न
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चौंकाने वाला मामला

खुलासा फर्स्ट, बालाघाट।
जिले से सामने आई एक खबर ने सभी को चौंका दिया है। इतना ही नहीं इस घटना ने प्रशासन और शिक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। यहां एक सरकारी छात्रावास में रहकर आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली 13 साल की नाबालिग छात्रा मां बन गई। छात्रा ने एक बच्ची को जन्म दिया है।

महिला एवं बाल विकास विभाग में मचा हड़कंप
घटना सामने आते ही शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग में हड़कंप मच गया। यह मामला छात्रावासों में बच्चों की सुरक्षा, निगरानी और कर्मचारियों की जिम्मेदारी पर बड़े सवाल खड़े करता है।

परसामऊ छात्रावास का मामला
यह पूरा मामला बालाघाट जिले के परसामऊ छात्रावास से जुड़ा है। हैरानी की बात यह है कि छात्रावास में रह रही एक नाबालिग बच्ची गर्भवती हो गई, लेकिन हॉस्टल वार्डन और तैनात एएनएम को इसकी जानकारी तक नहीं हुई।

जब छात्रा को अचानक प्रसव पीड़ा हुई और उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, तब जाकर इस गंभीर मामले का खुलासा हुआ। यह घटना 28-29 जनवरी 2026 के आसपास सामने आई।

छुट्टियों और बीमारी की आड़ में छिपता रहा सच
जिला परियोजना समन्वयक (DPC) जीपी बर्मन ने माना कि इस मामले में विभागीय लापरवाही हुई है। जांच में सामने आया कि छात्रा अक्सर बीमार रहने की बात कहकर हॉस्टल से घर जाती थी।

रिकॉर्ड के मुताबिक, वह 13 मार्च को घर गई थी और जुलाई में वापस लौटी। इसके बाद भी वह कुछ दिन हॉस्टल में रहती और फिर घर चली जाती थी। इस दौरान उसकी शारीरिक स्थिति पर किसी ने ध्यान नहीं दिया, जिससे मामला लंबे समय तक छिपा रहा।

गांव के नाबालिग युवक पर आरोप
महिला थाना प्रभारी किरण वरकड़े के अनुसार, छात्रा ने अपने परिजनों के सामने बताया कि उसके अपने ही गांव के एक नाबालिग युवक से संबंध थे। पुलिस अब इस पूरे मामले की कानूनी जांच कर रही है। फिलहाल, मां और नवजात बच्ची दोनों सुरक्षित हैं और जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में उनका इलाज जारी है।

हॉस्टल सुपरिटेंडेंट सस्पेंड
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की है। हॉस्टल सुपरिटेंडेंट चैनबती सैयाम को सस्पेंड कर दिया गया है। डीपीसी जीपी बर्मन ने साफ कहा कि हॉस्टल वार्डन और एएनएम ने अपने कर्तव्यों का सही तरीके से निर्वहन नहीं किया, जिसके चलते यह गंभीर घटना सामने आई।

उठे कई सवाल
इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रावास में रहने वाली नाबालिग की नियमित स्वास्थ्य जांच क्यों नहीं हुई? वार्डन और एएनएम की निगरानी व्यवस्था इतनी कमजोर क्यों थी? बच्चों की सुरक्षा को लेकर विभाग कितनी गंभीरता बरत रहा है?

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