निर्दोष निकले संजय जेसवानी: सुप्रीम फैसला, एनआरआई अहलावत का पासपोर्ट होगा जब्त; केमको च्यू के कर्ताधर्ता के खिलाफ दर्ज केस निकला झूठा
KHULASA FIRST
संवाददाता

गौरव रोजाना जाएगा थाने
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
आखिरकार सच्चाई की जीत हो ही गई और कन्फेक्शनरी कारोबारी व केमको च्यू फूड प्रालि के कर्ताधर्ता संजय जेसवानी निर्दोष साबित हुए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से साबित हो गया कि जेसवानी के खिलाफ कंपनी के सीए और एक अन्य को बंधक बनाकर धमकाने का केस झूठा था।
वहीं इस केस के साजिशकर्ता रशियन एनआरआई गौरव अहलावत को कोर्ट से मुंह की खानी पड़ी। उसे जमानत तो मिली, लेकिन सशर्त। न केवल गौरव का पासपोर्ट जब्त होगा, बल्कि उसे रोजाना थाने में हाजिरी भी देना होगी।
उल्लेखनीय है 12 सितंबर 2024 को केमको च्यू फूड प्रालि कन्फेक्शनरी के संचालक संजय जेसवानी और उनके गार्ड जय माथे पर सीए निशित नाहर ने केस दर्ज कराया था।
आरोप था कि उन्होंने 11 सितंबर की रात निशित को अपने घर में बंधक बनाकर रखा, धमकाया और मारपीट की थी। इस केस को दर्ज कराने के पीछे रशियन एनआरआई गौरव अहलावत के साजिशकर्ता होने की बात सामने आई थी।
हालांकि इसके बाद संजय जेसवानी और उनकी कंपनी के करतार सिंह निवासी गुलमोहर कॉम्प्लेक्स स्कीम-136 की ओर से लसूड़िया थाने में रशियन नागरिक गौरव अहलावत निवासी वसंत विहार कॉलोनी और उसकी मां कृष्णवंती पर 316(5), 318(4), 61(2) बीएनएस के तहत केस दर्ज हुआ था।
जीआरवी कंपनी के संस्थापक और शेयर होल्डर गौरव अहलावत व उसकी मां कृष्णवंती ने कंपनी के कर्मचारियों के साथ मिलकर षड्यंत्रपूर्वक आवेदक करतार सिंह की कंपनी के एचडीएफसी बैंक खाता क्रमांक 50200038022171 से 3 अगस्त 2024 को 2 करोड़ रुपए कृष्णवंती अहलावत के एचडीएफसी बैंक खाता क्रमांक 03271000024476 में धोखाधड़ीपूर्वक ट्रांसफर किए थे।
इस मामले में निचली अदालत और इंदौर हाई कोर्ट से गौरव को कोई राहत नहीं मिलने पर गौरव ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली थी। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उसे सशर्त जमानत दी, जिसके तहत गौरव को तुरंत निचली अदालत के समक्ष उपस्थित होकर अपना पासपोर्ट जमा करना होगा।
जांच में सहयोग रखना होगा। निचली अदालत गौरव के जमानत बांड और ऐसे जमानतदारों को स्वीकार करेगी, जिन्हें सक्षम माना जाता है, जो जांच या मुकदमे के दौरान आवश्यकतानुसार गौरव की उपस्थिति सुनिश्चित करते हैं। साथ ही निचली अदालत तथ्यों और परिस्थितियों के अनुसार उचित और उपयुक्त समझी जाने वाली शर्तें लगा सकती है।
यदि जांच अधिकारी या कोर्ट को लगता है कि अपीलकर्ता के आचरण के कारण जांच/परीक्षण में देरी हो रही है, तो जांच अधिकारी और कोर्ट कानून के अनुसार उचित कदम उठा सकते हैं, जिसमें गौरव अहलावत की जमानत रद्द करना भी शामिल है।
हाई कोर्ट भी क्वेस कर चुकी थी जेसवानी पर दर्ज केस
इधर, केमको च्यू के संजय जेसवानी ने भी लसूड़िया थाने में 12 सितंबर 2024 को अपने पर दर्ज मामले में हाई कोर्ट में अपील की थी। हाई कोर्ट ने केस को क्वेस किया था। इसके खिलाफ गौरव अहलावत सुप्रीम कोर्ट गया था।
मामले में संजय जेसवानी ने खुद को निर्दोष और केस को झूठा बताते हुए सारे साक्ष्य अपने वकील के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए थे। साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने जेसवानी को निर्दोष पाया।
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