खबर
Top News

स्लीपर बसों के लिए नियम नए या खेल पुराना: कानून, गजट और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल; कानूनी प्रावधान के बिना लागू करने का आरोप, 25 साल में अरबों के राजस्व नुकसान की भरपाई कब

Khulasa First

KHULASA FIRST

संवाददाता

02 फ़रवरी 2026, 6:28 pm
शेयर करें:
स्लीपर बसों के लिए नियम नए या खेल पुराना

अंकित शाह 99264-99912 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
केंद्रीय परिवहन मंत्री ने स्लीपर बसों के निर्माण को लेकर नए नियमों की घोषणा की है लेकिन इनकी कानूनी बुनियाद को लेकर अब तक कोई स्पष्ट जानकारी का खुलासा नहीं हुआ है। परिवहन विभाग में आज भी बसों का पंजीयन केवल दो श्रेणियों- साधारण और डीलक्स में ही किया जाता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है स्लीपर कोच की श्रेणी आखिर कब लागू हुई, मोटरयान अधिनियम में संशोधन कब हुआ और उसका गजट नोटिफिकेशन कब जारी किया गया?

इन बुनियादी सवालों पर न केंद्र सरकार न परिवहन विभाग ने कोई दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। स्लीपर बसों के पुराने निर्माण नियम क्या थे और कब लागू हुए, इस पर भी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी जा रही है।

आरोप है यह पूरी प्रक्रिया जनता और मीडिया को असली मुद्दों से भटकाने के लिए अपनाई जा रही है। जिस तरह पहले केंद्र में कोई कानून न होने के बावजूद विभागीय अधिकारियों ने स्लीपर कोच के पंजीयन पर रोक लगाई थी, उसके बाद आज तक कोई नया स्पष्ट कानून नहीं लाया गया। अब आरोप है केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी स्वयं भ्रष्टाचारियों के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।

ऑडिट आपत्ति के बावजूद कार्रवाई नहीं
तत्कालीन महालेखाकार की ऑडिट रिपोर्ट में इसे अवैध बताते हुए कहा गया इससे राज्य सरकार को टैक्स के रूप में अरबों रुपए का नुकसान हुआ। इसी रिपोर्ट पर परिवहन विभाग ने 31 अक्टूबर 2009 को संकल्प पत्र क्रमांक 166 को निरस्त कर दिया।

इस आदेश में स्पष्ट किया गया था राज्य परिवहन प्राधिकरण को स्लीपर बर्थ लगाने का अधिकार नहीं है और जब तक मोटरयान नियमों में प्रावधान नहीं होगा, तब तक ऐसा पंजीयन वैधानिक नहीं माना जाएगा। इसके बावजूद जनहित का हवाला देकर जिम्मेदारों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

25 वर्षों में 180 अरब रुपए का नुकसान
खुलासा फर्स्ट ने 26 अप्रैल 2024 को खुलासा किया था बस मालिकों और परिवहन अधिकारियों की मिलीभगत से पिछले लगभग 25 वर्षों से सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। पहले 52 सीटों वाली बसों का डीलक्स में पंजीयन कर 10% सीट घटाकर स्लीपर बर्थ लगाई जाती थी, लेकिन अब पूरी बस ही स्लीपर बनाई जा रही है।

2×1 लेआउट वाली बसों में वास्तविक क्षमता लगभग 35 यात्रियों की होती है, जबकि पंजीयन 52 सीटों का कराया जाता है। इससे प्रति बस करीब 15 सीटों के टैक्स की चोरी हो रही है। अनुमान के मुताबिक एक बस से 25 वर्षों में लगभग 18 लाख रुपए का नुकसान और केवल मप्र में ही लगभग 1000 स्लीपर बसों से 180 अरब रुपए का राजस्व नुकसान हुआ।

डीलक्स के नाम पर सामान्य बसें, किराया वसूली अलग
खुलासा फर्स्ट ने 4 मई 2024 की रिपोर्ट में बताया था सामान्य बसों को डीलक्स बताकर चलाया जा रहा है। यात्रियों से डीलक्स का किराया वसूला जाता है, लेकिन सुविधाएं सामान्य बस जैसी ही दी जाती हैं।

कई बसों में नीचे सीटें और ऊपर बर्थ हैं। ऐसे वाहनों का रजिस्ट्रेशन, परमिट और फिटनेस किस श्रेणी में किया गया, यह बड़ा सवाल है। इससे शासन को अरबों रुपये का नुकसान जारी है।

बीमा और फाइनेंस कंपनियों की भूमिका पर सवाल
खुलासा फर्स्ट द्वारा 22 जनवरी 2026 को किए खुलासे में सामने आया बीमा और फाइनेंस कंपनियों की शह पर अवैध स्लीपर बसों का पंजीयन होता रहा। अधिक प्रीमियम और ब्याज के लालच में नियमों की अनदेखी की गई।

दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले यात्रियों के परिजन मुआवजे से वंचित रह जाते हैं, जबकि फाइनेंस कंपनी ब्याज और बीमा कंपनी प्रीमियम कमा लेती है। नियमों के अनुसार किसी भी वाहन में संरचनात्मक बदलाव अवैध है फिर भी स्लीपर बसों में अंदर की लंबाई और डिजाइन बदली जाती रही।

किराए का प्रस्ताव भी अवैध
परिवहन विभाग समय-समय पर स्लीपर बसों के किराए में 10% से 75% तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव लाया। 2012 में एमपी राजपत्र में यह प्रस्ताव पारित हुआ, लेकिन मोटर व्हीकल एक्ट 1988 और नियम 1989 में प्रावधान न होने के कारण स्वीकृति नहीं मिल सकी।

2001 के संकल्प से फैला स्लीपर कोच का जाल... खुलासा फर्स्ट ने 25 अप्रैल 2024 को प्रकाशित खबर में बताया था पर्यटन के लिए केवल ओमनी बसों (स्लीपर कोच) में ही बर्थ का प्रावधान था। इसी आधार पर प्रदेश सरकार ने 24 अप्रैल 2001 को संकल्प पत्र क्रमांक 166 पारित कर डीलक्स बसों में व्हील बेस के अनुसार 10% सीट कम कर बर्थ लगाने की अनुमति दे दी।

इसके बाद देशभर में स्लीपर कोच बसों की बाढ़ आ गई। हालांकि केंद्रीय मोटरयान नियम 1989 के रूल 128 में केवल पर्यटक यानों की बैठक क्षमता का प्रावधान है, स्लीपर कोच को लेकर न केंद्रीय नियमों न मप्र मोटरयान नियम 1994 में कोई स्पष्ट व्यवस्था है।

पहले कानून बनाए सरकार: अग्रवाल... परिवहन विधिक सलाहकार सूरजप्रकाश अग्रवाल का कहना है सबसे पहले शयनयान की परिभाषा और उसकी विशिष्टताएं संसद द्वारा कानून बनाकर तय करनी होंगी।

उसके बाद ही निर्माण, उपयोग, कर, किराया, परमिट और सुरक्षा के नियम बनाए जा सकते हैं। बिना कानूनी प्रावधान के बनाए गए नियम विधिसम्मत नहीं हैं। देशभर में पहले से पंजीकृत सभी शयनयान बसों का पंजीयन और फिटनेस निरस्त कर, सुधार के बाद ही अन्य श्रेणियों में पुनः पंजीयन किया जाना चाहिए।

निष्कर्ष साफ है जब कानून और गजट ही स्पष्ट नहीं, तो स्लीपर कोच बसों पर नए नियम किस आधार पर लागू किए जा रहे हैं? और अगर यह सब अवैध था, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी?

संबंधित समाचार

आईडीए के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन
Top News

आईडीए के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन:कहा- हमसे 14 लाख लिए; भाजपा को मुफ्त में दिया

4 minutes ago
छात्रा से कहा था... मेरी नहीं हुई तो तुझे किसी की भी नहीं होने दूंगा
Top News

छात्रा से कहा था... मेरी नहीं हुई तो तुझे किसी की भी नहीं होने दूंगा:हत्या के मामले में आरोपी का खुलासा

9 minutes ago
भीषण सड़क हादसा
Top News

भीषण सड़क हादसा:40 से ज्यादा यात्रियों से भरी बस खंती में पलटी; मची चीख-पुकार

13 minutes ago
उपचुनाव के रुझानों में बंगाल में BJP को बढ़त
Top News

उपचुनाव के रुझानों में बंगाल में BJP को बढ़त:तमिलनाडु में TVK आगे; पुडुचेरी में NDA समर्थित उम्मीदवार जीते

14 minutes ago
कोर्ट पहुंची शाहरुख की अर्जी
Top News

कोर्ट पहुंची शाहरुख की अर्जी:आपत्ति की भनक लगी तो वापस ली

19 minutes ago
गैंगस्टर के साथ डिजाइनर भी हिस्ट्रीशीटर सतीश भाऊ
Top News

गैंगस्टर के साथ डिजाइनर भी हिस्ट्रीशीटर सतीश भाऊ:गुर्गा रोहित बनासिया बना जरिया; रवि चिकलिस ने भी डाली डिजाइन

25 minutes ago
सीजेआई की सख्त टिप्पणी
Top News

सीजेआई की सख्त टिप्पणी:‘मक्खी मारने के लिए हथौड़ा न चलाएं’; दिल्ली में प्रदर्शन से पहले मेट्रो-रेल पर पाबंदियां

26 minutes ago
MP में पतंजलि गाय के घी का सैंपल फेल
Top News

MP में पतंजलि गाय के घी का सैंपल फेल:बिक्री पर रोक; खाद्य विभाग ने स्टॉक वापस लेने के दिए आदेश

31 minutes ago
100 साल पुराने सरकारी रास्ते पर किया कब्जा जेएमबी फार्म हाउस की बाउंड्री तक पहुंच गया!
Top News

100 साल पुराने सरकारी रास्ते पर किया कब्जा जेएमबी फार्म हाउस की बाउंड्री तक पहुंच गया!:टीएनसी नक्शे में 12 मीटर सड़क दर्ज फिर भी रास्ता बंद करने की शिकायत

35 minutes ago
इतने डीएसपी अधिकारियों की नई पोस्टिंग
Top News

इतने डीएसपी अधिकारियों की नई पोस्टिंग:गृह विभाग ने जारी किए तबादला आदेश

37 minutes ago
भारतीय मूल की न्यायविद को मिलेगा नोबेल शांति पुरस्कार
Top News

भारतीय मूल की न्यायविद को मिलेगा नोबेल शांति पुरस्कार:रंगभेद विरोधी कार्यकर्ताओं की कानूनी पैरवी में अहम योगदान

about 1 hour ago
20 साल फर्जीवाड़े की नींव पर पढ़ाया
Top News

20 साल फर्जीवाड़े की नींव पर पढ़ाया:संविदा शिक्षक भर्ती घोटाला

about 1 hour ago
युवक की चाकू मारकर हत्या
Top News

युवक की चाकू मारकर हत्या:आधा घंटा तड़पता रहा; आक्रोशित लोगों ने फोरलेन पर शव रखकर किया चक्काजाम

about 1 hour ago
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
Top News

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला:मध्यप्रदेश में 14% ही रहेगा ओबीसी आरक्षण; 27 फीसदी रिजर्वेशन की मांग खारिज

about 1 hour ago
पावर का अफसरी लिंक
Top News

पावर का अफसरी लिंक:मैनेजर सरकार पर भारी

about 1 hour ago
पतंजलि घी और नमकीन के नमूने भोपाल लैब भेजे
Top News

पतंजलि घी और नमकीन के नमूने भोपाल लैब भेजे:गंदगी में पक रहे थे केक; बेकरी का लाइसेंस कर दिया निलंबित

about 1 hour ago
नवरात्रि में मनचलों की खैर नहीं
Top News

नवरात्रि में मनचलों की खैर नहीं:अहिल्या सेना हुई तैयार; स्कूलों और कॉलेजों में अब तक 22 से अधिक आत्मरक्षा शिविर लगाए जा चुके

about 1 hour ago
MP में 7500 करोड़ का निवेश
Top News

MP में 7500 करोड़ का निवेश:यहां लगेगी टेक्सटाइल इकाई; इतने युवाओं को मिलेगा रोजगार

about 1 hour ago
भारत-वेस्टइंडीज मैच
Indore

भारत-वेस्टइंडीज मैच:दोपहर 2 बजे से होगा ट्रैफिक डायवर्ट

about 2 hours ago
देखिए वीडियो, डिप्टी सीएम ने ओएसडी को हटाया
Top News

देखिए वीडियो, डिप्टी सीएम ने ओएसडी को हटाया:जांच के दिए आदेश; इतने करोड़ लेने का था आरोप, मचा बवाल

about 2 hours ago

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!