RTO अधिकारी ने रचा इतिहास: 6962 मीटर ऊंचे शिखर पर फहराया तिरंगा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के आरटीओ अधिकारी प्रदीप कुमार शर्मा ने पर्वतारोहण के क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने एशिया के बाहर की सबसे ऊंची चोटी माउंट अकोंकागुआ (6,962 मीटर) पर सफलतापूर्वक चढ़ाई कर भारतीय तिरंगा फहराया।
ऐसा करने वाले देश के पहले RTO अधिकारी बने
इसके साथ ही वे इस अंतरराष्ट्रीय शिखर को फतह करने वाले देश के पहले RTO अधिकारी बन गए हैं। इस उपलब्धि को इंडियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और हाई रेंज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। अभियान की प्रशिक्षक और वरिष्ठ पर्वतारोही ज्योति रात्रे ने इसकी पुष्टि की है।
18 दिनों तक चला अभियान
माउंट अकोंकागुआ का यह अभियान कुल 18 दिनों तक चला। टीम 13 जनवरी को भोपाल से रवाना हुई थी। दक्षिण अमेरिका स्थित इस पर्वत पर पहुंचते ही पर्वतारोहियों को बदलते मौसम और अत्यधिक ऊंचाई से जूझना पड़ा। अभियान के दौरान तापमान कई बार शून्य से 30 डिग्री नीचे तक पहुंच गया।
मौसम बना सबसे बड़ी चुनौती
कैंप-2 पर भारी बर्फबारी और तेज आंधी ने टीम की रफ्तार थाम दी। कैंप-3 के बाद हालात और कठिन हो गए, जहां बर्फीली हवाओं और ऑक्सीजन की कमी ने पर्वतारोहियों की शारीरिक और मानसिक सहनशक्ति की कड़ी परीक्षा ली।
एक सदस्य की तबीयत बिगड़ने पर उसे वापस लौटना पड़ा, जबकि एक अन्य पर्वतारोही शिखर से करीब 200 मीटर पहले ऊर्जा की कमी के कारण लौट गया।
डेथ टेंट जोन में बिताईं 3 रातें
अभियान के दौरान टीम कैंप-4 के नजदीक डेथ टेंट जोन में फंसी, जहां अगले तीन दिन मौसम बेहद खराब रहने की चेतावनी मिली। करीब -20 डिग्री तापमान, तेज आंधी और बर्फ के कारण टेंट के अंदर तक बर्फ भर जाती थी।
हालात इतने कठिन थे कि हर तीन घंटे में टेंट की सफाई करनी पड़ती थी। इस तरह टीम ने वहां 3 दिन और 4 रातें गुजारीं।
अनुभवी मार्गदर्शन रहा सफलता की कुंजी
इस अभियान में एवरेस्ट विजेता और वरिष्ठ पर्वतारोही ज्योति रात्रे ने मार्गदर्शक और प्रशिक्षक की भूमिका निभाई। प्रदीप कुमार शर्मा पिछले डेढ़ वर्ष से उनके मार्गदर्शन में उच्च हिमालयी प्रशिक्षण ले रहे थे। कठिन परिस्थितियों में लिए गए सुरक्षित और जिम्मेदार फैसले इसी प्रशिक्षण का परिणाम रहे।
पहले भी फतह कर चुके हैं ऊंची चोटियां
प्रदीप कुमार शर्मा इससे पहले भारत में 5,000 और 6,000 मीटर श्रेणी की कई चोटियों पर सफल आरोहण कर चुके हैं। माउंट अकोंकागुआ अभियान को उनके लिए भविष्य में प्रस्तावित और भी ऊंचे अंतरराष्ट्रीय पर्वत अभियानों की मजबूत तैयारी माना जा रहा है।
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