प्रतिष्ठित कॉलेज के चुनाव में राजघरानों की टक्कर: मुकाबला हुआ दिलचस्प; जानिये किस दिन होगा मतदान, कब आएंगे नतीजे
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
प्रतिष्ठित डेली कॉलेज के चुनाव इस बार खासे दिलचस्प हो गए हैं। लंबे समय बाद ओल्ड डोनर (फाउंडर मेंबर) कैटेगरी में राजघरानों के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा, जबकि न्यू डोनर कैटेगरी में भी कड़ा चुनावी संघर्ष तय है।
दो दिन चली नामांकन प्रक्रिया में कुल 11 उम्मीदवारों ने फॉर्म भरे थे। नाम वापसी के बाद अब ओल्ड डोनर कैटेगरी में 4 और न्यू डोनर कैटेगरी में 6 उम्मीदवार मैदान में बचे हैं। दोनों ही श्रेणियों में चुनाव होना तय हो गया है।
राजा-रजवाड़ों के बीच सीधी टक्कर
ओल्ड डोनर कैटेगरी, जिसे फाउंडर मेंबर भी कहा जाता है, में इस बार चार प्रमुख उम्मीदवार आमने-सामने हैं। इनमें प्रियव्रत सिंह (खिलचीपुर), विक्रम सिंह पंवार (देवास, वर्तमान बोर्ड प्रेसीडेंट), ठाकुर नरेंद्र सिंह बिड़वाल और ठाकुर अनिरुद्ध सिंह दोत्ररिया शामिल हैं।
इस कैटेगरी में करीब 70 सदस्य हैं और इनमें से दो प्रतिनिधि चुने जाएंगे। खास बात यह है कि किसी भी उम्मीदवार ने नाम वापस नहीं लिया, जिससे मुकाबला पूरी तरह खुला और रोचक हो गया है।
न्यू डोनर में 6 उम्मीदवार, एक सीट
न्यू डोनर कैटेगरी में शुरुआत में 7 नामांकन हुए थे, लेकिन एक नाम वापस होने के बाद अब 6 उम्मीदवार मैदान में हैं। यहां से केवल एक सदस्य का चयन होना है, जिससे मुकाबला और ज्यादा कांटे का हो गया है।
इस श्रेणी में हरपाल सिंह उर्फ मोनू भाटिया (वर्तमान बोर्ड मेंबर) तीसरी बार मैदान में हैं। उनके अलावा जयेश पटेल, नीरज देसाई, मानवीर सिंह बैस, संदीप पारिख और राजेश अग्रवाल भी चुनाव लड़ रहे हैं।
बदले नियमों से बदला चुनावी समीकरण
इस बार चुनाव नए संविधान के तहत हो रहे हैं, जिसमें ओल्ड डेलियंस एसोसिएशन (ODA) की ‘टू सी’ कैटेगरी को खत्म कर दिया गया है। अब ODA से केवल प्रेसीडेंट, सचिव और एक प्रतिष्ठित छात्र को ही बोर्ड में शामिल किया जाएगा। इससे चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।
21 मई को मतदान, उसी दिन नतीजे
नामांकन वापसी की प्रक्रिया 1 मई को पूरी हो चुकी है, जबकि 2 मई को स्क्रूटनी और 3 मई को अंतिम सूची जारी की जाएगी। इसके बाद 4 से 19 मई तक डाक मतपत्र जारी होंगे। 21 मई को वोटिंग के साथ ही परिणाम घोषित किए जाएंगे।
डेली कॉलेज के इस चुनाव में जहां एक ओर राजघरानों के बीच सीधी टक्कर देखने को मिलेगी, वहीं दूसरी ओर नए डोनर वर्ग में भी कड़ा मुकाबला तय है। ऐसे में इस बार का चुनाव संस्थान के भीतर सत्ता संतुलन तय करने वाला माना जा रहा है।
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