अंतर्मन की शुद्धि और पितृ कृपा पाने का दुर्लभ आध्यात्मिक योग: मौन की शक्ति और अमृत स्नान का महापर्व मौनी अमावस्या
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संवाददाता

हेमंत उपाध्याय 99930-99008 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
माघ का महीना भारतीय संस्कृति में पुण्य का माह कहा और माना जाता है। इस माह में आने वाली अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। अध्यात्म के शिखर का यह दिन केवल एक तिथि नहीं है। हिंदू दर्शन में महर्षि मनु को इस तिथि का अधिष्ठाता माना गया है।
विद्वानों के अनुसार ‘मनु’ से ही ‘मन’ बना है, और मौनी अमावस्या ‘मन’ को जीतने का महापर्व है। हिंदू पंचांग के इस 11वें महीने को कार्तिक माह के समान ही पुण्य मास माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महीने में सूर्य, चंद्रमा और भगवान विष्णु की आराधना का विशेष फल मिलता है।
ज्योतिषीय मान्यता है कि इस दिन पवित्र संगम का जल अमृत के समान हो जाता है । धरती पर देवताओं का वास होता है। जब मकर राशि में चंद्रमा और सूर्य का मिलन होता है, तब मौन व्रत धारण कर साधक अपनी बिखरी ऊर्जा को संचित करता है।
इस बार मौनी अमावस्या का पर्व 18 जनवरी को है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों मकर राशि में होते हैं, जिससे ‘शुक्रादित्य राजयोग’ जैसी स्थितियां बनती हैं, जो मानसिक शक्ति बढ़ाती हैं। इस दिन का सर्वार्थसिद्धि योग भी सभी राशि के जातकों के लिए शुभ है।
वर्तमान की भागदौड़ भरी जिंदगी में जहाँ शब्द और शोर हमें घेरे रहते हैं, वहां मौनी अमावस्या हमें ‘मौन’ की शक्ति से परिचित कराती है। पंडितों के अनुसार खगोलीय रूप से मकर राशि में ग्रहों का विशेष संयोग और पौराणिक रूप से गंगा स्नान की महिमा, इस दिन को मानसिक पुनर्जन्म के दिन में भी तब्दील करती है।
विद्वानों के अनुसार, इस दिन का संयम न केवल हमारे तनाव को कम करता है, बल्कि हमारे भाग्य के द्वारों को भी खोलता है। इस दिन लिया गया संकल्प जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता का संचार करता है।
द्वारका शारदा पीठ जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती का कहना है कि मनुष्य सहज स्वभाव में अक्सर झूठ या व्यर्थ की बातें बोल देता है। मौन रहने से इन विकारों से बचा जा सकता है।
मौन केवल चुप रहना नहीं है, बल्कि अपनी ऊर्जा बचाकर उसे ईश्वर की ओर मोड़ना है। इससे जहां वाणी में मधुरता आएगी वहीं व्यक्तित्व में गंभीरता का भाव भी उत्पन्न होगा।
सद्गुरु यानी जगदीश ‘जग्गी’ वासुदेव (ईशा फाउंडेशन) के अनुसार मौनी अमावस्या वह समय है जब चंद्रमा की ऊर्जा सबसे कम होती है। ज्योतिषीय और प्राकृतिक रूप से यह स्थिति इंसान के मन को विचलित कर सकती है।
जब बाहर अंधकार अथवा शांति होती है, तो यह आत्म-अवलोकन के लिए सबसे अच्छा समय होता है। मौन रहने से हम दुनिया के शोर के बजाय अपनी आत्मा की आवाज को सुन पाते हैं।
मौन का अभ्यास करना और मौन हो जाना दोनों अलग बातें हैं। अमावस्या की ऊर्जा आपको केवल चुप रहने में नहीं, बल्कि विचारशून्य होने में मदद करती है, जिससे गहरे ध्यान की स्थिति प्राप्त होती है।
एकाधिक विद्वानों के कथनों का सार यह है कि मौन एक हथियार है जिससे हम अपनी बिखरी हुई मानसिक शक्तियों को एक स्थान पर केंद्रित करते हैं। जहां यह नैतिक और धार्मिक शुद्धि का मार्ग है, वहीं ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ तालमेल बिठाने का एक अवसर भी है।
इस बार अमावस्या तिथि का प्रारंभ 18 जनवरी को सुबह 12:03 बजे से होगा, जबकि यह 19 जनवरी देर रात 1:21 बजे तक रहेगी।
घर पर ही गंगाजल डालकर करें स्नान...ज्योतिषियों के अनुसार सभी लोगों का तो गंगा स्नान करना संभव नहीं हो पाता। इसलिये इस पर्व के दिन घर पर ही पानी में गंगाजल डालकर स्नान करें। चूंकि यह पितरों की भी तिथि होती है इसलिये इस दिन काले तिल से तर्पण करने और दक्षिण दिशा में दीपक जलाने से पितृ दोष शांत होता है। पुण्य प्राप्त करने के लिए इस दिन तिल, गु़ड़, गर्म कपड़े, अनाज और स्वर्ण दान का भी काफी महत्व पुराणों में बताया गया है।
मौनी अमावस्या से जुड़ी एक कथा... कांचनपुरी के ब्राह्मण की पुत्री गुणवती की कुंडली में विवाह के तुरंत बाद वैधव्य यानी विवाह के बाद पति की मृत्यु का योग था। ज्योतिषी के सुझाव पर वह सिंहल द्वीप में रहने वाली सोमा धोबिन के पास गई।
सोमा एक तपस्विनी थी। गुणवती ने वहां रहकर उसकी सेवा की। सोमा ने प्रसन्न होकर गुणवती के विवाह पर अपने जीवन भर का संचित पुण्य उसे दान कर दिया। इस पुण्य के प्रभाव से जब गुणवती के पति के प्राण जाने लगे, तो वे वापस लौट आए।
जिस दिन यह चमत्कार हुआ, उस दिन माघ अमावस्या थी। तब से स्त्रियां अपने अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-शांति के लिए इस दिन व्रत और पीपल की पूजा करती हैं।
किस राशि के जातक क्या दान करें... मेष, वृश्चिक राशि के जातक इस दिन लाल मसूर की दाल का दान करें तो कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी, वहीं मानसिक शांति और सुख के लिए वृषभ व तुला राशि के जातक चावल और सफेद वस्त्र का दान करें।
आर्थिक लाभ के लिए मिथुन व कन्या राशि वाले गाय को हरा चारा खिलाएं व मूंग दान करें। स्वास्थ्य में सुधार के लिए कर्क राशि वालों को पानी में दूध और काले तिल मिलाकर स्नान करना चाहिये। सिंह राशि के जातक इस दिन तांबे का पात्र और गेहूं का दान करें तो मान-सम्मान में बढ़ोतरी के योग हैं।
भाग्योदय और उन्नति के लिए धनु और मीन राशि के जातक चने की दाल और पीले वस्त्र दान करें। शनि दोष से मुक्ति के लिए मकर और कुंभ राशि के जातकों को काला कंबल और सरसों के तेल का दान करना चाहिये।
माघ मास में आएंगे अब ये प्रमुख व्रत और त्योहार... माघ गुप्त नवरात्रि प्रारंभ: 19 जनवरी
वसंत पंचमी (सरस्वती पूजा): 23 जनवरी, जया एकादशी: 29 जनवरी. माघ पूर्णिमा (माघी पूर्णिमा): 1 फरवरी।
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