रालामंडल ब्रिज फिर बंद कर खुदाई चालू: डेढ़ लाख वाहन चालकों की जान खतरे में डाल दी थी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
रालामंडल जंक्शन पर एनएचएआई द्वारा बनाए गए आधे अधूरे ब्रिज को पांच दिन बाद ही बंद कर दिया गया और फिर खुदाई शुरू कर दी गई। अथाॉरिटी ने इस ब्रिज से गुजरने वाले डेढ़ लाख वाहन चालकों की जान को खतरे में डाल दिया था। अब अधिकारियों की नींद खुली कि काम बाकी है।
जिस लेन पर ट्रैफिक बंद है, वहां ट्रांजिट स्लैब डालने के लिए नई बनी डामर सड़क को फिर से खोदना शुरू कर दिया गया है। 40 करोड़ से तैयार ब्रिज पर एक सप्ताह भी ट्रैफिक चल नहीं सका और अब दोबारा एक लेन पर जेसीबी से खुदाई चल रही है।
अर्जुन बड़ौद, राऊ के बाद ये तीसरा ब्रिज है, जिस पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की प्लानिंग स्तर पर बड़ी खामी उजागर हुई है। तेजाजी नगर से आने वाले वाहनों के लिए बने ब्रिज के हिस्से में शनिवार से उन स्थानों पर खुदाई शुरू की गई, जहां मौजूदा सडक़ और फ्लायओवर का एप्रोच रोड जुड़ रहा है।
यह काम पूरा होने में 20 से 25 दिन लगेंगे। यानी इस लेन पर महीनेभर तक ट्रैफिक शुरू होना मुश्किल है। इसी बीच निर्माण एजेंसी द्वारा ब्रिज के मुख्य हिस्से पर लोड टेस्टिंग की जाएगी। साथ ही एक्सपेंशन जॉइंट का काम भी अधूरा है, जिसे पूरा किया जाएगा।
जिस लेन पर ट्रैफिक चल रहा वहां भी तोड़फोड़
फ्लायओवर की जिस भुजा पर ट्रैफिक शुरू कर दिया है, वहां भी सड़क किनारे बनी कांक्रीट की स्लैब को उखाड़ा जा रहा है। इस स्लैब का लेवल सड़क के लेवल से ऊंचा था, जिसके चलते उसे हटाया जा रहा है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार: लोनिवि के पूर्व इंजीनियर दीपेश गुप्ता का कहना है कि ट्रांजिशन स्लैब डालने का काम सड़क बनाने के साथ-साथ ही होना चाहिए था। डामर की परत डल जाने के बाद उसे फिर से तोडऩा सही नहीं है। आधे-अधूरे ब्रिज पर ट्रैफिक शुरू करने की जल्दबाजी क्यों की गई?
एनएचएआई प्रवीण यादव का कहना है कि जिस तरफ काम अधूरा है, वहां का ट्रैफिक रोक रखा है। ट्रांजिट स्लैब सामान्यत: सडक़ बन जाने के बाद डाली जाती है, इसलिए खुदाई की गई है। साथ ही एक्सपेंशन जॉइंट का काम भी किया जाना है। 20-25 दिन में इसका काम पूरा हो जाएगा।
लोगों की जान जोखिम में डालने की कोई बात नहीं है। चलती सडक़ पर ठेकेदार कहां खुदाई कर रहा है, मैं पता करवाता हूं। प्रोजेक्ट मैनेजर रामेंद्रसिंह सिसौदिया ने कहा कि हम पर ट्रैफिक शुरू करने का भारी दबाव था। जिस तरफ का ट्रैफिक अभी चल रहा है, वहां ट्रांजिट स्लैब की आवश्यकता नहीं थी।
यह है ट्रांजिट स्लैब
ट्रांजिट स्लैब कांक्रीट स्लैब होती है जो फ्लायओवर या ब्रिज के अंतिम बिंदु और सामान्य सडक़ के बीच लगाई जाती है। सडक़ मजबूत फाउंडेशन पर टिकी होती है, जबकि उसके पास की एप्रोच रोड मिट्टी के भराव पर बनी होती है।
समय के साथ एप्रोच रोड की मिट्टी दब जाती है। अगर बीच में ट्रांजिट स्लैब न हो तो जॉइंट पर वाहनों को झटका लगता है। ट्रांजिट स्लैब फ्लायओवर के मुख्य पक्के हिस्से (डेक) और जमीन पर बनी सडक़ (एप्रोच रोड) के बीच की खाई को जोड़ती है।
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