अनापत्ति प्रमाण-पत्र के नाम पर संपत्ति कर में रोका जा रहा है नामांतरण: अवैध कॉलोनी वैध करने की सजा संपत्ति स्वामियों को
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम में इन दिनों जो नजारा देखने को मिल रहा है वह आम नागरिकों के लिए परेशानी और प्रशासनिक भ्रम का कारण बनता जा रहा है।
अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) के नाम पर संपत्ति कर में नामांतरण रोका जा रहा है, जिससे न सिर्फ नागरिकों के वैधानिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि शासन के स्पष्ट आदेशों की भी अवहेलना हो रही है। मप्र सरकार द्वारा कॉलोनियों को वैध करने के लिए तय मापदंडों के बावजूद नगर निगम के राजस्व विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रदेश सरकार द्वारा कॉलोनियों को वैध करने के लिए कुछ मापदंड तय किए गए हैं, इन्हीं के तहत यह निर्धारित किया गया कि कॉलोनी का ले-आउट प्लान तैयार किया जाएगा तथा कॉलोनी में नक्शा पास करने के लिए विकास शुल्क निर्धारित होगा, जिसे जमा करने के बाद ही नक्शा पास किया जाना है। इसके लिए कॉलोनी सेल में विकास शुल्क जमा करने के बाद अनापत्ति प्रमाण-पत्र लेना अनिवार्य किया गया है।
शासन के आदेशों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं
स्पष्ट आदेश है कि भवन अनुज्ञा अर्थात नक्शा पास कराने के लिए ही अनापत्ति प्रमाण-पत्र आवश्यक है, परंतु इंदौर नगर निगम के राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा इसी लेटर की आड़ में संपत्ति कर में नामांतरण नहीं किया जा रहा है। जबकि शासन के आदेशों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। इस कारण संपत्ति स्वामियों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कांग्रेस प्रवक्ता का सवाल
मप्र कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता एडवोकेट प्रमोद कुमार द्विवेदी ने इस पूरे मामले पर सवाल उठाते हुए कहा कि अवैध कॉलोनी को वैध करने की सजा सीधे-सीधे संपत्ति स्वामियों को दी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉलोनाइजरों पर मेहरबानी की जा रही है। अभी तक नगर निगम ने इन अट्ठारह कॉलोनियों के कॉलोनाइजरों पर क्या कार्रवाई की? क्या पुलिस रिपोर्ट दर्ज कराई गई, गिरफ्तारी हुई या विकास शुल्क का भार कॉलोनाइजरों पर डाला गया?
नामांतरण रुकने से कानूनी प्रक्रिया ठप
द्विवेदी ने कहा कि नगर निगम द्वारा नामांतरण रोके जाने से हक त्याग, बंटवारा, गिफ्ट डीड जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज अटक गए हैं। आम नागरिक अपने ही मकान और भूखंड से जुड़े कानूनी अधिकारों का उपयोग नहीं कर पा रहा है। इससे नागरिकों को अनावश्यक आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
अनावश्यक रूप से आर्थिक भार डाला जा रहा
एडवोकेट द्विवेदी ने आरोप लगाया कि अवैध कॉलोनाइजरों को उपकृत किया जा रहा है और आम आदमी को परेशान किया जा रहा है। अनावश्यक रूप से आर्थिक भार डाला जा रहा है। उन्होंने सीधे-सीधे आरोप लगाया कि भाजपा सरकार एवं भाजपा शासित नगर निगम आम आदमी का आर्थिक शोषण करते हुए आपराधिक कृत्य कर रही है।
नगर निगम का आदेश और कॉलोनी सूची
नगर पालिक निगम, इंदौर (कॉलोनी सेल विभाग) द्वारा जारी आदेश क्रमांक 2543/कॉलोनी सेल/2023 दिनांक 12 अप्रैल 2023 में स्पष्ट किया गया है कि मध्य प्रदेश नगर पालिका (कॉलोनी विकास) नियम 2021 के तहत 31/12/2016 के पूर्व अस्तित्व में आई अनाधिकृत कॉलोनियों में नागरिक अधोसंरचना प्रदान करने की कार्रवाई प्रारंभ की गई है।
नियम 23 के तहत सर्वे और सार्वजनिक सूचना के बाद कई कॉलोनियों के ले-आउट (अभिन्यास) को अंतिम रूप दिया गया है। इस आदेश में जोन क्रमांक 10, 15, 18, 17, 5, 16, 4, 13 और 19 के अंतर्गत लक्ष्मी बाग कॉलोनी बी, गोसिया नगर, विश्वकर्मा नगर, शिवशक्ति नगर, अम्मार नगर, भगत सिंह नगर/गोविंद नगर, गणेश धाम, रिद्धी-सिद्धी (न्यू गणेश धाम), नूरी कॉलोनी, भागीरथपुरा, खाती मोहल्ला, राम नगर, राधिका नगर, पार्श्वनाथ नगर, विराट नगर, विशाल नगर, शांति नगर और ग्रेटर ब्रजेश्वरी कॉलोनी सहित अट्ठारह अनाधिकृत कॉलोनियों का विस्तृत विवरण दिया गया है।
आम नागरिकों में असंतोष बढ़ रहा
आदेश में यह भी उल्लेख है कि लाल रंग से चिह्नित भूखंडों/भवनों पर विकास शुल्क जमा होने के उपरांत ही कॉलोनी सेल विभाग द्वारा अनापत्ति जारी की जाएगी और उसके बाद भवन अनुज्ञा दी जाएगी। स्पष्ट है कि अनापत्ति प्रमाण-पत्र की अनिवार्यता भवन अनुज्ञा के लिए है, न कि संपत्ति कर नामांतरण के लिए। इसके बावजूद नामांतरण रोके जाने से आम नागरिकों में असंतोष बढ़ रहा है।
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