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संस्कारों की सीख पर सियासी रार: मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दी सफाई; मेरे बयान को संदर्भ से काटकर पेश किया गया

KHULASA FIRST

संवाददाता

01 फ़रवरी 2026, 7:47 पूर्वाह्न
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संस्कारों की सीख पर सियासी रार

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के एक संबोधन ने प्रदेश के सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। सत्ता और समाज में शुचिता को लेकर दिए उनके बयान को जब मीडिया के एक वर्ग और राजनीतिक हलकों में अपनों पर ही निशाना करार दिया जाने लगा तो कल मंत्री को स्वयं सामने आकर स्थिति स्पष्ट करना पड़ी।

विजयवर्गीय ने दो-टूक शब्दों में कहा कि उनके वक्तव्य का उद्देश्य किसी पर व्यक्तिगत आक्षेप लगाना या किसी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना नहीं था, बल्कि उनका एकमात्र ध्येय भावी पीढ़ी को नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूक करना और सामाजिक मर्यादाओं का बोध कराना था।

विवाद का सूत्रपात बीती 28 जनवरी को एक निजी शिक्षण संस्थान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान हुआ, जहां छात्रों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए विजयवर्गीय ने सार्वजनिक जीवन के अपने लंबे अनुभवों को साझा किया था।

उन्होंने बेहद बेबाकी से कहा था कि जब वे लोक निर्माण विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभागों का दायित्व संभाल रहे थे, तब उन्होंने अनुभव किया कि किस तरह मंत्री के अति निकट रहने वाले लोगों को प्रलोभनों के जाल में फंसाने के कुत्सित प्रयास किए जाते हैं।

इसी क्रम में उन्होंने पारिवारिक मर्यादाओं और अभिभावकों की भूमिका पर गंभीर टिप्पणी करते हुए आगाह किया था कि यदि घर के बड़े ही मित्रों के साथ बैठकर अनैतिक आचरण अपनाएंगे तो इसका बच्चों के कोमल मानस पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उनके इस बयान को राजनीतिक चश्मे से देखते हुए अतंर्कलह और अपनों पर प्रहार के रूप में प्रचारित किया जाने लगा।

चरित्र निर्माण के संदेश को समझा जाए- मामले के तूल पकड़ते ही विजयवर्गीय ने एक आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी कर तमाम अटकलों पर विराम लगाने का प्रयास किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके उदाहरणों को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया जा रहा है।

मंत्री के अनुसार बच्चे अपना सर्वाधिक समय घर पर व्यतीत करते हैं, इसलिए घर और बाहर दोनों स्थानों पर शुचिता का वातावरण अनिवार्य है। उन्होंने तर्क दिया कि पीडब्ल्यूडी और पार्टी संस्कृति के उदाहरण केवल एक सामान्य नैतिक सीख के रूप में दिए गए थे ताकि युवा पीढ़ी को प्रलोभनों और कुरीतियों से बचाया जा सके।

उन्होंने मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों से आग्रह किया कि उनके बयान की मूल भावना और चरित्र निर्माण के संदेश को समझा जाए, न कि इसे किसी राजनीतिक विवाद का हिस्सा बनाया जाए।

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