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जनशक्ति सहकारी संस्था में करोड़ों का प्लॉट घोटाला: हाई कोर्ट के आदेश, सरकारी नियमों और सहकारिता कानून; सबको कुचलकर लिखी लूट की पटकथा

KHULASA FIRST

संवाददाता

22 जनवरी 2026, 9:25 पूर्वाह्न
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जनशक्ति सहकारी संस्था में करोड़ों का प्लॉट घोटाला

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
जनशक्ति गृह निर्माण सहकारी संस्था के प्लॉटों में करोड़ों के खेल का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। शिकायतों से खुली इस कहानी की स्क्रिप्ट 2015 से लिखी जा रही थी, जिसमें हाई कोर्ट के आदेश, सरकारी नियम और सहकारिता कानून को एक-एक कर रौंदा गया।

आरोप है साजिश के तहत सदस्यों को भ्रमित कर प्लॉट हड़पे गए और अवैध तरीके से करोड़ों का खेल खेला गया। खास बात यह कि पूरे मामले में एक हाई कोर्ट एडवोकेट ने शिकायतकर्ताओं की भरपूर मदद की है।

एयरपोर्ट विस्तार के तहत बीएसएफ, पुलिस और एयरपोर्ट अथॉरिटी को जमीनों का बंटवारा हुआ था। इसी क्रम में 2001 में ग्राम सिरपुर स्थित एरोड्रम थाने के सामने 60 फीट रोड से लगी 4.51 एकड़ जमीन शासन द्वारा जनशक्ति गृह निर्माण सहकारी संस्था को आवंटित की गई। संस्था ने टॉउन एंड कंट्री प्लानिंग से नक्शा स्वीकृत कराकर 1500, 1000 और 600 वर्गफीट के कुल 104 प्लॉट निर्धारित किए।

पुलिस के दावे से रुका विकास, हाई कोर्ट तक पहुंचा मामला
नगर निगम में विकास अनुमति का आवेदन दिया गया, लेकिन उस समय पुलिस ने जमीन को अपनी बताते हुए विकास रुकवा दिया। इसके बाद संस्था ने हाई कोर्ट के आदेश पर सीमांकन प्रक्रिया कराई और सात साल बाद न्यायालय के आदेश पर जमीन संस्था को वापस मिली। इस अवधि में लगभग 50 प्रतिशत सदस्य प्लॉट लेने से पीछे हट गए, क्योंकि जमीन की गाइड लाइन वैल्यू बढ़ चुकी थी।

104 से 133 प्लॉट: यहीं बदला पूरा खेल
शासन के भूमि आवंटन आदेश की छह माह की सीमा को देखते हुए संस्था ने आमसभा बुलाई। प्रस्ताव रखा गया 1500 वर्गफीट के प्लॉट समाप्त कर 1000 और 600 वर्गफीट के रखे जाएं। इससे 104 प्लॉट बढ़कर 133 हो गए।

2001 में स्वीकृत नक्शे में टॉउन एंड कंट्री प्लानिंग ने शर्त रखी थी शासन से विधिवत रजिस्ट्री और कब्जा मिलने के बाद ही नक्शा मान्य होगा और किसी भी परिवर्तन की स्थिति में सीमांकित नक्शा प्रस्तुत करना अनिवार्य।

शर्मा के कार्यकाल में अलॉटमेंट व रजिस्ट्रियां
2007-08 में तत्कालीन अध्यक्ष अनिलकुमार शर्मा ने नए सदस्यों को जोड़ 133 प्लॉटों का अलॉटमेंट किया और विकास कराया। 2010 में 97 विकसित प्लॉटों की रजिस्ट्रियां भी कर दी गईं। एयरपोर्ट अथॉरिटी ने आठ कॉलोनियों को एयरपोर्ट विस्तार में शामिल किया, जिनमें यह कॉलोनी भी थी।

इसके बाद नगर निगम और एयरपोर्ट अथॉरिटी ने प्रशासन से कॉलोनी पर रोक लगवा दी। एयरपोर्ट से जुड़ा जमीन विवाद 2014 में निपटा, लेकिन सीमांकित नक्शा टॉउन एंड कंट्री प्लानिंग से स्वीकृत नहीं हुआ था। इस पर संस्था ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसका आदेश 2013 में आया।

भवन अनुमति अटकी, तीन साल चला अनापत्ति का खेल
जिन प्लॉटों की रजिस्ट्री नहीं हुई थी, उन्हें नगर निगम में धरोहर रूप में रखा गया। भवन निर्माण अनुमति के लिए सीमांकित नक्शा जरूरी था। हाई कोर्ट के आदेश पर टॉउन एंड कंट्री प्लानिंग ने एयरपोर्ट अथॉरिटी से भवन ऊंचाई संबंधी अनापत्ति मांगी, जिसमें तीन साल लग गए।

2017 में टीएंडसीपी ने नक्शे की अवधि बढ़ाते हुए शेष शर्तें यथावत रखीं। 2010 में हुई 97 रजिस्ट्रियों को लेकर शिकायत सामने आई कि संचालक मंडल के सदस्यों ने 25 प्लॉट अपने ही परिजनों को बांट दिए।

जांच में शिकायत सही पाई गई। शासन की भूमि के मामलों में अनिवार्य शपथ पत्र नहीं लिया गया था। इसके चलते सहकारिता विभाग ने संचालक मंडल को 2014 के अंत तक प्रतिबंधित कर दिया।

पंकज पांडे के कार्यकाल में आरोपों की नई फेहरिस्त
जनवरी 2015 में पंकज पांडे अध्यक्ष बने। उन्होंने एयरपोर्ट अथॉरिटी से अनापत्ति ली और हाई कोर्ट के आदेश के तहत डिमार्केशन प्लान की स्वीकृति की प्रक्रिया शुरू हुई। सुनवाई में उन्होंने 133 प्लॉटों का पक्ष रखा, लेकिन 2017 में अवधि नवीनीकरण के बाद भी डिमार्केशन प्लान की स्वीकृति नहीं ली गई।

आरोप है भूखंड हड़पने के आपराधिक षड्यंत्र के तहत सदस्यों को भ्रमित किया गया। नगर निगम में पहले धरोहर रखे प्लॉटों की फाइल के स्थान पर नए प्लॉट गिरवी रखकर झूठे शपथ पत्रों के आधार पर विकास अनुमति ली गई। इसके बाद सदस्यों को डराकर और ब्लैकमेल कर उनके प्लॉट हड़पे गए। पूर्व में रजिस्ट्री हो चुके प्लॉटों में भी न्यायालय की अनुमति के बिना संशोधन कराए गए।

धारा 69 की जांच और झूठे शपथ पत्र की पुष्टि
मामले में धारा 69 के तहत जांच चल रही है। इसमें सामने आया पंकज पांडे ने हाई कोर्ट में भी झूठा शपथ पत्र प्रस्तुत किया, जिसे सहकारिता विभाग ने दोषसिद्ध माना। मौजूदा प्लॉट की कीमत लाखों में है और पूरे मामले में करोड़ों के खेल का आरोप है।

को-ऑपरेटिव फ्रॉड के तहत पुलिस मुख्यालय ने विशेष सेल गठित किया। पीड़ित सदस्यों की शिकायत पर संभागायुक्त ने जांच की अनुमति दी। इसके बावजूद ज्वॉइंट डायरेक्टर टॉउन एंड कंट्री प्लानिंग शुभाशीष बैनर्जी ने हाई कोर्ट के आदेश के पालन में डिमार्केशन प्लान जारी नहीं किया।

हाई कोर्ट का रास्ता और समाधान की उम्मीद
शिकायत पर संभागायुक्त ने लोकसेवक से जांच के निर्देश दिए। नगर निगम ने स्पष्ट किया टीएंडसीपी से उत्तर मिलते ही आगे की अनुमतियां स्वत: निरस्त मानी जाएंगी। हाई कोर्ट ने आदेश दिया है पूर्व अध्यक्ष अनिल कुमार शर्मा के कार्यकाल में अलॉट प्लॉट पुराने सदस्यों को वरियताक्रम में दिए जाएं तो विवाद का समाधान संभव है।

आदेश के तहत सहकारिता विभाग ने तीन सदस्यीय समिति गठित कर कार्रवाई शुरू कर दी है। वर्तमान अध्यक्ष रामकृष्ण कुशवाह को रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

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