मरीज की जान से खिलवाड़: अस्पताल प्रबंधन की मनमानी; सीएमएचओ की लापरवाही और निगम के भ्रष्टाचार का खुलासा
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
केंद्र और राज्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पतालों के रखरखाव, मरीजों के इलाज और सुरक्षा मानकों को लेकर समय-समय पर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं। इसके बावजूद शहर में इन नियमों का खुलेआम उल्लंघन लगातार जारी है। हालात ऐसे बन चुके हैं कि अब कई डॉक्टर मरीजों की जान बचाने से ज्यादा कमाई को प्राथमिकता देने लगे हैं और निजी अस्पताल सेवा केंद्र कम, मुनाफाखोरी के अड्डे ज्यादा बनते जा रहे हैं।
आज निजी अस्पतालों को फाइव-स्टार होटल की तर्ज पर पेश किया जा रहा है, जहां इलाज के नाम पर कई श्रेणियों की सुविधाएं गढ़कर तय मानकों से कहीं अधिक शुल्क मरीजों के परिजन से वसूला जा रहा है।
अस्पतालों को आलीशान, सर्व-सुविधायुक्त होटल की तरह सजाया गया है, जहां मरीज के साथ-साथ उसके परिजन को भी फाइव स्टार जैसी सुविधाओं का लालच देकर आर्थिक शोषण किया जा रहा है। सवाल यह है कि क्या यह सब स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों और अस्पताल निर्माण गाइड लाइन के अनुरूप है? और यदि कोई हादसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन और सीएमएचओ की होगी या नहीं?
मरीज भर्ती, फिर भी तोड़फोड़, केयर सीएचएल अस्पताल पर गंभीर सवाल
ऐसा ही एक गंभीर मामला केयर सीएचएल अस्पताल से सामने आया है, जहां संचालन के दौरान रिनोवेशन का काम जारी है, जबकि अस्पताल में कई मरीज भर्ती हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर भी हो सकती है।
इसके बावजूद पुरानी बिल्डिंग में तोड़फोड़ और भारी निर्माण कार्य किया जा रहा है। इससे सीधे तौर पर केयर सीएचएल अस्पताल प्रबंधन और सीएमएचओ की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
क्या अस्पताल संचालन के दौरान रिनोवेशन की अनुमति है?
क्या नगर निगम से इसकी विधिवत अनुमति ली गई है?
क्या स्वास्थ्य विभाग ने इसकी मंजूरी दी है?
यदि निर्माण के दौरान कोई जनहानि होती है तो जिम्मेदार कौन होगा?
और क्या इस अवैधानिक निर्माण पर स्वास्थ्य विभाग या नगर निगम ने कोई प्रभावी कार्रवाई या नोटिस जारी किया है?
क्या प्रशासन लाशों के ढेर का इंतजार कर रहा है?
इंदौर का प्रशासन क्या केवल हादसों और मौतों के बाद ही जागता है? भागीरथपुरा में दूषित पीने से हुई मौतों और वहां बिछी 32 अर्थियों की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि नगर निगम की संवेदनहीनता ने शहर को एक और बड़े खतरे के मुहाने पर खड़ा कर दिया है।
बिना अनुमति ड्रिलिंग, नियमों का मखौल
शहर के रसूखदार केयर सीएचएल अस्पताल में बिना किसी वैध अनुमति के भारी-भरकम ड्रिलिंग मशीनों का इस्तेमाल धड़ल्ले से जारी है। यह न सिर्फ नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है, बल्कि आसपास के रिहायशी इलाकों और अस्पताल में भर्ती मरीजों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
रसूख के आगे सिस्टम नतमस्तक
यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि रसूख के आगे घुटने टेक चुके सिस्टम की नग्न तस्वीर है, जहां आम नागरिक के लिए कानून का डंडा और खास लोगों के लिए मौन सहमति का कालीन बिछा दिया जाता है। अस्पताल परिसर में मशीनों का शोर और कंपन अधिकारियों की ईमानदारी पर सवाल खड़े कर रहा है, लेकिन नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों ने आंखों पर धृतराष्ट्र जैसी पट्टी बांध ली है।
नोटिस के बाद भी काम जारी, कार्रवाई शून्य
हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की पूरी मशीनरी इस अवैध गतिविधि की मूकदर्शक बनी हुई है। करीब एक माह पहले मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) ने अस्पताल को नोटिस जारी कर 15 दिन में काम रोकने का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन केयर सीएचएल प्रबंधन ने इस आदेश को ठेंगा दिखाते हुए निर्माण कार्य जारी रखा। सरकारी आदेशों को रद्दी समझने वाले इस अस्पताल प्रबंधन को आखिर किसका संरक्षण प्राप्त है? नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल तक अवैध निर्माण के साक्ष्य और वीडियो बार-बार पहुंचाए गए, इसके बावजूद कार्रवाई का अभाव किसी गहरी साठगांठ की ओर इशारा करता है।
भागीरथपुरा से सबक नहीं लिया?
क्या नगर निगम और प्रशासन यह भूल चुके हैं कि भागीरथपुरा में इसी तरह की अनदेखी ने दर्जनों घरों के चिराग बुझा दिए? शहर की सुरक्षा के खोखले दावों के बीच केयर सीएचएल जैसे संस्थानों को दी गई खुली छूट आम नागरिकों की जान से सीधा खिलवाड़ है।
प्रशासनिक जड़ता शहर के माथे पर कलंक: जब रसूखदार संस्थानों के दबाव में नियम पंगु हो जाएं और प्रशासन लकवाग्रस्त, तब जनता को समझ लेना चाहिए कि वह असुरक्षित है। प्रशासन की यह चुप्पी और अस्पताल के प्रति दिखाया जा रहा विशेष समर्पण इंदौर शहर के माथे पर एक गहरा कलंक है।
क्या अगली जनहानि के बाद जागेगा सिस्टम?: सवाल साफ है क्या अधिकारियों की नींद तब ही खुलेगी जब भागीरथपुरा जैसी कोई और बड़ी त्रासदी सामने आएगी? अब वक्त आ गया है कि इस अवैध ड्रिलिंग और निर्माण को तत्काल रोका जाए और दोषी अधिकारियों व अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही तय की जाए, वरना इतिहास में इस चुप्पी को प्रायोजित अपराध के रूप में दर्ज किया जाएगा।
जवाब देने से बचते रहे अधिकारी: सीएमएचओ माधव हसानी से इस विषय पर सवाल करने के लिए संपर्क किया गया तो उन्होंने बाद में फोन करने की बात कहकर कॉल काट दिया। वहीं केयर सीएचएल अस्पताल के मनीष गुप्ता से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन उठाना भी जरूरी नहीं समझा।
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