एक पिटीशन से नियमों पर घमासान क्रिमिनल रिकॉर्ड प्रत्याशी पर सवाल: हाई कोर्ट बार चुनाव से पहले सियासी तूफान
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के 28 जनवरी को होने वाले चुनाव से पहले माहौल पूरी तरह गर्मा गया है। चुनावी नियमों को लेकर जहां महिला अधिवक्ताओं की भागीदारी पर सवाल उठाते हुए हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर दी गई है, वहीं अब आपराधिक रिकॉर्ड वाले प्रत्याशी को लेकर भी बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पूरा मामला अब चुनाव की पारदर्शिता, निष्पक्षता और बार की गरिमा से जुड़ गया है।
हाई कोर्ट अधिवक्ता रेखा बोरीवाल ने चुनावी नियमों को कठोर और महिलाओं के लिए बाधक बताते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने बताया कि वे हाई कोर्ट बार एसोसिएशन इंदौर की नियमित और आजीवन सदस्य हैं तथा आगामी चुनाव में कार्यकारिणी सदस्य पद के लिए भाग ले रही हैं।
रेखा बोरीवाल के अनुसार 9 जनवरी को जारी चुनावी सूचना में ऐसे नियम रखे गए हैं, जिनके कारण महिला अधिवक्ताओं की भागीदारी लगभग सीमित हो जाती है।
अधिवक्ता रेखा बोरीवाल ने याचिका में मांग की है कि कार्यकारिणी सदस्य के लिए अनुभव की शर्त 3 वर्ष से घटाकर 1 वर्ष, अध्यक्ष/उपाध्यक्ष के लिए 7 वर्ष के बजाय 5 वर्ष, सचिव/उपसचिव के लिए 5 वर्ष के बजाय 3 वर्ष की जाए।
उनका कहना है कि इन बदलावों से महिलाएं बिना किसी बाधा के चुनाव लड़ सकेंगी और बार की गतिविधियों में समान भागीदारी सुनिश्चित होगी। इसी आधार पर उन्होंने मांग की है कि याचिका पर सुनवाई तक चुनाव प्रक्रिया रोकी जाए। इस संबंध में बार एसोसिएशन को भी औपचारिक आवेदन दिया गया है।
उपाध्यक्ष पद पर आपराधिक पृष्ठभूमि का आरोप, निष्कासन की मांग
चुनावी माहौल उस वक्त और गर्मा गया, जब हाई कोर्ट अधिवक्ता एवं उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी धर्मेश साहू ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा उपाध्यक्ष पद की एक प्रत्याशी के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज होने का दावा किया जा रहा है, जिसकी जानकारी कथित तौर पर सार्वजनिक नहीं की गई।
धर्मेश साहू का कहना है कि यदि ऐसे आरोपों वाले प्रत्याशी को चुनाव में शामिल किया जाता है, तो इससे इंदौर हाई कोर्ट और बार एसोसिएशन की प्रतिष्ठा प्रभावित होगी। उन्होंने चुनाव आयोग और बार एसोसिएशन से मांग की है कि आपराधिक रिकॉर्ड वाले प्रत्याशियों को चुनाव से बाहर कर निष्पक्ष चुनाव कराया जाए।
अधिवक्ताओं का कहना है कि यह चुनाव सिर्फ पदों का नहीं, बल्कि हाई कोर्ट बार की साख का सवाल है। अब सबकी नजरें हाई कोर्ट की सुनवाई और बार एसोसिएशन के फैसले पर टिकी हैं कि क्या चुनाव रुकेगा या नियमों में बदलाव के साथ आगे बढ़ेगा?
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