पीड़ितों के बीच पहुंचे पटवारी व सिंघार समेत तमाम नेता, बोले: भाजपा सरकार साफ पानी तक नहीं दे सकती
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भागीरथपुरा में हुईं दूषित जल से मौतों के बाद कल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत तमाम नेता पीड़ितों से मिलने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार इतनी अधिक संवेदनहीन है कि वो लोगों को शुद्ध पानी भी नहीं दे सकती। जो मौतें हुई हैं उनके लिए भाजपा सरकार सीधे तौर पर जिम्मेदार है। पटवारी ने कहा कि मृतकों के परिजन को 2-2 लाख रुपए अपर्याप्त हैं। उन्हें एक-एक करोड़ रुपए दिए जाना चाहिए।
कांग्रेस नेता सुबह करीब 11.30 बजे सुभाष नगर चौराहा स्थित चौकसे धर्मशाला पर एकत्र हुए और वहां से जुलूस के रूप में भागीरथपुरा पहुंचे। उनके साथ राष्ट्रीय सचिव एवं प्रदेश प्रभारी उषा नायडू, पूर्व मंत्री सज्जनसिंह वर्मा, वरिष्ठ नेत्री शोभा ओझा, विधायक सचिन यादव, विधायक पंकज उपाध्याय, महिला कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष रीना बौरासी सेतिया, शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे, जिला कांग्रेस अध्यक्ष विपिन वानखेड़े, वरिष्ठ नेता राजेश चौकसे, गिरधर नागर, राजा चौकसे, ठाकुर जितेंद्र सिंह, अरविंद बागड़ी, सच सलूजा, प्रदेश प्रवक्ता अमित चौरसिया, पार्षद राजू भदौरिया, अमित पटेल, रफीक खान, संजय बाकलीवाल, लोकेश हार्डिया समेत तमाम नेता भी थे। सभी नेता पीड़ित परिवारों से मिले और उन्हें परिजन की मौत पर ढाढस बंधाया।
निर्दोष नागरिकों का असली कातिल कौन?
इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के हाथों में तख्तियां थीं जिन पर महापौर पुष्यमित्र भार्गव इस्तीफा दो, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय इस्तीफा दो, भागीरथपुरा के निर्दोष नागरिकों का असली कातिल कौन? ‘नरक निगम मुर्दाबाद’ जैसे नारे लिखे थे। ये दौरा करीब 3.30 घंटे तक चला।
इस दौरान पूरे भागीरथपुरा में कांग्रेस के झंडे और नेता नजर आए। नेताओं ने चेतावनी दी कि जब तक दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिलेगा और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों के इस्तीफे नहीं होंगे, तब तक कांग्रेस सड़क से सदन तक संघर्ष जारी रखेगी।
तीन दिन पूर्व पहुंचे पूर्व मंत्री सज्जनसिंह वर्मा और कांग्रेस की जांच समिति के पांच सदस्यों के सामने भाजपा कार्यकर्ताओं ने चूड़ियां-चप्पलें फेंकी थीं। कल भाजपा कार्यकर्ताओं को सख्त हिदायत दी गई थी कि वे किसी भी प्रकार का कोई विरोध न करें और कांग्रेस नेता जो करें, जहां जाएं जाने दें। इसलिए कल कोई भाजपा कार्यकर्ता कहीं नजर नहीं आया।
पटवारी बोले- मृतकों के परिजन को एक करोड़ रुपए दें
पत्रकारों से बातचीत में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मांग की कि मृतकों के परिजन को 2-2 लाख रुपए का मुआवजा अपर्याप्त है। उन्हें एक-एक करोड़ रुपए दिए जाना चाहिए। पटवारी ने कहा कि यह महज हादसा नहीं, बल्कि हत्याएं हैं। पटवारी ने आरोप लगाया कि अब तक की गई कार्रवाई सिर्फ लीपापोती है।
बोलने वाले पर कार्रवाई नहीं अफसर को नाप दिया
नेता प्रतिपक्ष उमंंग सिंघार ने प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि ट्रिपल इंजन सरकार पूर्ण जनादेश के बावजूद नागरिकों को सुरक्षित पेयजल तक उपलब्ध नहीं करा पाई, यह शर्म की बात है। जनता से जुड़े सवाल पर मंत्री आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते हैं।
उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और उनकी बातों को शेयर करने वाले अधिकारी पर कार्रवाई कर दी गई। भागीरथपुरा में हुई मौतों पर उन्होंने कहा कि नर्मदा लाइन में दूषित पानी मिलने के कारण लोग बीमार हुए। यह लापरवाही भाजपा सरकार को कठघरे में खड़ा करने के लिए काफी है।
इतनी मौतें महामारी या प्रकोप नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक लापरवाही है। सिंघार ने कहा कि भागीरथपुरा में ढाई हजार से ज्यादा लोग बीमार हुए हैं। लापरवाही की सजा लोगों को भुगतना पड़ी। इंदौरवासियों ने भाजपा को हर स्तर पर समर्थन दिया।
लोकसभा चुनाव से लेकर नगर निगम चुनाव तक जनता से भाजपा को सत्ता का पूरा भरोसा मिला, लेकिन बदले में भाजपा ने इंदौर को सिर्फ उपेक्षा, अव्यवस्था, धोखा और संवेदनहीन शासन दिया। जनता से जुड़े सवाल पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते हैं। उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन देवास एसडीएम ने मंत्री की बात दोहराई तो उन्हें निलंबित कर दिया।
बस्ती में फैली बीमारी ने जमीनी हकीकत बयां कर दी
उन्होंने कहा कि इंदौर स्वच्छता में सरताज रहा है, लेकिन बस्ती में फैली बीमारी ने जमीनी हकीकत बता दी है। कई बस्तियों में गंदे पानी की समस्या है। हर स्तर पर शिकायतें होती हैं, लेकिन भाजपा के जनप्रतिनिधि, अफसर उन शिकायतों को हलके में लेते हैं।
यदि समय रहते ध्यान दिया होता तो इस तरह का हादसा नहीं होता। इंदौर की प्रतिष्ठा भी इस घटना के कारण धूमिल हुई है। इसके जिम्मेदार शहर के जनप्रतिनिधि हैं। ढाई साल तक पाइप लाइन का टेंडर दबाए रखा गया। इसमें देरी करने वाले सजा के हकदार हैं।
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