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सीएचएल अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही से मरीजों की जान खतरे में: करीब साठ साल पुरानी बिल्डिंग में मरीजो के बीच हो रहा निर्माण कार्य; हादसे की संभावना

KHULASA FIRST

संवाददाता

27 जनवरी 2026, 7:54 पूर्वाह्न
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सीएचएल अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही से मरीजों की जान खतरे में

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
एलआईजी चौराहा स्थित सीएचएल अस्पताल में प्रबंधन की लापरवाही से इलाज करा रहे मरीजों की जान को खतरा बढ़ गया है। इसकी शिकायत करने के बाद भी प्रशासन, निगम व स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अनदेखी कर रहे हैं।

जबकि हर दिन भारी मशीनों से दीवारों में होल कर लोहे का स्ट्रक्चर लगाया जा रहा है। मशीनों की तेज आवाज की शिकायत मरीजों व उनके परिजन ने चिकित्सकों से की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इससे अस्पताल में हादसे की संभावना बढ़ गई है।

अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का खामियाजा इलाज कराने वाले मरीज भुगत रहे हैं। मशीनों का तेज शोर और हिलती दीवारों से मरीज व उनके परिजन परेशान हो रहे हैं, लेकिन प्रशासन, निगम व स्वास्थ्य विभाग के अफसर पूरे मामले में मूक दर्शक बने हुए हैं। खुलासा फर्स्ट ने जनहित में इस मामले का खुलासा किया था।

उस समय निगम अफसर सक्रिय हुए और निर्माण कार्य रुकवा दिया था, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने नए सिरे से निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। बताया जाता है कि अस्पताल प्रबंधन को आयुष्मान मरीजों से राशि लेने के मामले में तीन-तीन नोटिस मिले है।

इसके बाद भी अस्पताल प्रबंधन अपनी मनमानी करते हुए यहां पर बिना नगर निगम की अनुमति लिए अस्पताल परिसर में भरी मशीनें लगाकर काम करा रहा है। हैरानी की बात यह है कि एक तरफ अस्पताल में मरीज भर्ती हैं, दूसरी तरफ अस्पताल प्रबंधन निर्माण कार्य करा रहा है। खासकर बायपास और हार्ट के मरीज, कार्डियक यूनिट में भर्ती मरीजों की हालत चिंताजनक बनी हुई है।

पार्षद ने की थी शिकायत
ज्ञात रहे कि एलआईजी स्थित सीएचएल अस्पताल प्रबंधन द्वारा नगर निगम से अनुमति लिए बिना ही अस्पताल में कराए जा रहे निर्माण कार्य को लेकर वार्ड 45 की पार्षद सोनिला मिमरोट ने एक महीने पहले ही निगमायुक्त से शिकायत की थी। उन्होंने कहा था कि यहां बिना मंजूरी के अवैध निर्माण हो रहा है और पार्किंग एरिया को कवर कर टीनशेड बना लिया गया है।

इसके अलावा पार्किंग के नाम पर छोड़ी गई खाली जमीन पर भी आठ से दस फीट तक कब्जा कर निर्माण किया जा रहा है। इसके बाद निगम ने काम रोका, लेकिन कारगर कार्रवाई नहीं हुई। इससे निर्माणकर्ता अस्पताल प्रबंधन के हौसले बढ़ गए और उसने दोबारा काम शुरू करा दिया।

मरीजों की अनदेखी
सीएचएल अस्पताल के पास पहले से नगर निगम की अनुमति नहीं है। इसके अलावा अस्पताल खासतौर पर हार्ट पेशेंट्स के इलाज के लिए है, लेकिन अस्पताल प्रबंधन द्वारा अस्पताल में भर्ती मरीजों की अनदेखी की जा रही है।

इस तरह खुलेआम यहां के इलाज के प्रोटोकॉल को नजरअंदाज किया जा रहा है। हैवी मशीनों, कटर और ड्रिल से काम हो रहा है, जिससे आईसीयू में भर्ती मरीजों को परेशानियां बढ़ गई हैं।

मरीजों को संक्रमण का खतरा- इस मामले में सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी का कहना है कि निर्माण कार्य को लेकर पहले शिकायत आई थी और नोटिस भी दिया था। उन्होंने 15 दिन में काम पूरा करने की बात कही थी, लेकिन समय सीमा पूरी हो गई।

अब जिम्मेदारों के पास इसका कोई जवाब नहीं है कि जब मरीज भर्ती हैं तो अस्पताल में निर्माण कैसे हो सकता है, ये प्रोटोकॉल के खिलाफ है। इससे मरीजों को संक्रमण का खतरा हो सकता है।

परिसर में हुआ हंगामा
बताया जाता है कि गत दिवस आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों ने अस्पताल में चल रही भारी मशीनों की आवाज पर आपत्ति जताई थी। इनके शोर से कई मरीजों की घबराहट बढ़ गई और हालत भी बिगड़ गई। इसके चलते मरीजों के परिजनों ने विरोध किया और सोशल मीडिया पर इसके बारे में पोस्ट किए।

इसके बाद महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने फोन करके काम रुकवाया। वहीं निगमायुक्त क्षितिज सिंघल पूरे मामले की जांच करने की बात कह रहे हैं।

प्रबंधन पर आरोप
गौरतलब है कि सीएचएल अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज हुई हैं। इनमें आयुष्मान मरीजों से पैसे लेने के मामले भी शामिल हैं। बताया जाता है कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा आयुष्मान धारक मरीजों से मनमानी राशि वसूल की गई है, इसके चलते अस्पताल प्रबंधन को एक महीने में तीन बार नोटिस भेजे गए हैं।

दो नोटिस सीधे भोपाल से आए हैं। इसके साथ ही रेडक्रॉस से भी पैसे लेने के लिए एस्टीमेट बनाकर कलेक्टर को भेजा गया है, लेकिन अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ अब तक किसी भी मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई।

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