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भारी पड़े पंडितजी: विवादित फिल्म ‘घूसखोर पंडत' को लेकर अदालत सख्त; नाम में बदलाव के दिए आदेश

KHULASA FIRST

संवाददाता

11 फ़रवरी 2026, 8:19 पूर्वाह्न
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भारी पड़े पंडितजी

निशाने पर जाकर लगा... आखिर पंडित ही निशाने पर क्यों

‘घूसखोर पंडत' को लेकर देशभर के ब्राह्मणों में था जबरदस्त गुस्सा

ब्राह्मण समुदाय के देशव्यापी आक्रोश के स्वर में इंदौर का ‘खुलासा फर्स्ट' भी हुआ था शामिल

ब्राह्मणों का विरोध फिल्म निर्माता, अभिनेता, निर्देशक, नेटफ्लिक्स को कानून की चौखट तक खींच लाया

इंदौर में भी सर्व ब्राह्मण युवा परिषद ने दायर किया था निजी परिवाद, कोर्ट से मिला न्याय, समाज की हुई जीत

फिल्म के टायटल में होगा बदलाव, नेटफ्लिक्स ने अदालत को आश्वस्त किया, हटेगा ‘पंडत' शब्द

फिल्म से जुड़े सभी प्रमोशनल मटेरियल सोशल मीडिया से हटाए गए, ऑनलाइन स्ट्रीमिंग भी रोकी गई

नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
आखिर पंडित ही निशाने पर क्यों? खुलासा फर्स्ट का ये सवाल सही निशाने पर जाकर लगा। मसला एक फिल्म के टायटल के जरिये ब्राह्मण समुदाय के अपमान व आहत से जुड़ा था। इस मामले में फिल्म निर्माता व ओटीटी प्लेटफॉर्म को न्यायपालिका ने दो-टूक आदेश दिया कि वह ऐसे किसी टायटल को बर्दाश्त नहीं करेंगे, जो किसी समुदाय की भावनाओं को आहत करें।

जनभावनाओं के साथ अदालत के दिशानिर्देश पर फिल्म निर्माता, निर्देशक, अभिनेता व फिल्म खरीददार ओटीटी प्लेटफॉर्म नतमस्तक हुए। अब रुपहले परदे पर ‘घूसखोर पंडत' नदारद हो जाएगा। ब्राह्मण समाज के सम्मान की ये लड़ाई विप्रवरों ने दम-खम से लड़ी।

खुलासा फर्स्ट को बस इत्ता सुकून है कि इस बड़ी लड़ाई में हमारा ‘गिलहरी' समान छोटा-सा योगदान रहा। आखिर हम ‘पक्के इंदौरी' जो ठहरे। दूर खड़े होकर, हक की लड़ाई हमसे देखी नहीं जाती। चाहे वह किसी भी धर्म, जाति, समुदाय, समाज, शहर की हो।

आ खिर देशभर के ज्ञानी-ध्यानी और गुणीजन पंडित ‘घूसखोर पंडत' पर भारी पड़े और अब सुनहरे परदे पर ये घूसखोर पंडत महोदय दूर-दूर तक नजर नहीं आएंगे। रुपहले परदे पर घूसखोरी तो नजर आएगी, लेकिन ये बुराई पंडित बिरादरी के नाम से जोड़ी नहीं जाएगी। यही नहीं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता व मनोरंजन के नाम से ब्राह्मण, ठाकुर समुदाय को चाहे जब निशाने पर रखने की प्रवृत्ति पर भी एक तरह से अंकुश लगेगा। मनोरंजन के नाम पर किसी धर्म, व्यक्ति व समुदाय की भावनाओं को आहत करने का चलन अब काननून की नजरों से दूर नहीं है।

मामला नेटफ्लिक्स पर जारी होने वाली फिल्म ‘घूसखोर पंडत' से जुड़ा था। फिल्म के नाम को लेकर देशभर में ब्राह्मण समुदाय के बीच जबरदस्त गुस्सा पसरा हुआ था। फिल्म के निर्माता-निर्देशक व नायक के ब्राह्मण बिरादरी से होने ने ब्राह्मणों के इस गुस्से में और इजाफा कर दिया था कि ये ऐसे कैसे ब्राह्मण, जो अपने ही समाज को नीचा दिखाने पर आमादा हैं? फिल्म के टायटल का गुस्सा सड़क से कानून की चौखट तक गूंजा।

उत्तर प्रदेश की आदित्यनाथ योगी सरकार ने तो इस मामले में बढ़ते सामाजिक विरोध के मद्देनजर एफआईआर तक करने के निर्देश दे दिए थे। केंद्र की मोदी सरकार और उसके सूचना प्रसारण मंत्रालय पर भी सवाल उठ गए थे। सेंसर बोर्ड को तो सब जगह धिक्कारा जा रहा था।

न सिर्फ उत्तर प्रदेश, बल्कि मध्य प्रदेश के इंदौर-भोपाल जैसे बड़े शहर भी इस मसले पर उद्वेलित व आंदोलित हो उठे थे। मामला कोर्ट में याचिका के जरिये दाखिल भी हो चुका था। इंदौर में भी सर्व ब्राह्मण युवा परिषद के संस्थापक विकास अवस्थी निजी परिवाद के जरिये कोर्ट की चौखट में दाखिल हो गए थे।

आपका प्रिय पक्का इंदौरी अखबार खुलासा फर्स्ट भी इस लड़ाई का हिस्सा तब बना, जब मेन स्ट्रीम मीडिया में ये मुद्दा सिंगल कॉलम में सिमटा था। जो भी गुस्सा था, उसका जरिया सोशल मीडिया बना हुआ था। ऐसे में खुलासा फर्स्ट ने ब्राह्मण समाज के गुस्से को मुखरता दी। ‘पंडितों' द्वारा देशव्यापी विरोध, एकजुटता व सामूहिक प्रयासों के चलते इस पूरे प्रकरण का सुखद पटाक्षेप हुआ।

इस लड़ाई को अदालत का साथ मिला। मंगलवार को इस मामले में कोर्ट ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया। आगामी फिल्म ‘घूसखोर पंडत' की रिलीज और स्ट्रीमिंग पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर इस मामले का पटाक्षेप कर दिया है।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि फिल्म का शीर्षक और प्रस्तावित सामग्री बदनाम करने वाली और सांप्रदायिक रूप से आपत्तिजनक है। इस पर नेटफ्लिक्स ने अपना रुख साफ किया कि फिल्म का नाम बदला जाएगा। सुनवाई के दौरान नेटफ्लिक्स ने अदालत को आश्वस्त किया कि वे फिल्म का टायटल बदलने जा रहे हैं और फिल्म से जुड़े सभी प्रमोशनल मटीरियल सोशल मीडिया से हटा दिए गए हैं।

नेटफ्लिक्स की इस सहमति के बाद अदालत ने याचिका का निपटारा कर दिया। याचिकाकर्ता का कहना था कि फिल्म का नाम ‘घूसखोर पंडत' हिंदू पुजारियों और एक खास समुदाय की छवि खराब करता है और सामाजिक-सांप्रदायिक रूप से भड़काऊ हो सकता है।

याचिका में फिल्म की रिलीज और ऑनलाइन स्ट्रीमिंग पर तत्काल रोक की मांग की गई थी। कोर्ट ने नेटफ्लिक्स द्वारा टायटल बदलने और प्रमोशनल सामग्री हटाने के फैसले को नोट करते हुए कहा अब याचिका पर आगे आदेश देने का कोई औचित्य नहीं रह गया और इस आधार पर मामला निपटा हुआ माना जाता है।

जनभावनाओं ने ब्राह्मण अभिनेता व डायरेक्टर को बैकफुट पर किया... फिल्म को लेकर विवाद बढ़ने के बाद एक्टर मनोज बाजपेयी ने भी सफाई दी थी। बाजपेयी ने अपने पोस्ट में सबसे पहले लोगों की भावनाओं को सम्मान देने की बात कहते हुए लिखा- ‘लोगों ने जो भावनाएं और चिंताएं साझा की हैं, मैं उनका सम्मान करता हूं और उन्हें गंभीरता से लेता हूं।

जब आप किसी ऐसी चीज का हिस्सा होते हैं, जिससे कुछ लोगों को ठेस पहुंचती है, तो वह आपको रुककर सोचने और सुनने के लिए मजबूर करती है। एक अभिनेता के तौर पर मैं किसी फिल्म से अपने किरदार और कहानी के माध्यम से जुड़ता हूं।

मेरे लिए यह एक कमियों से भरे व्यक्ति और उसकी आत्मबोध की यात्रा को दर्शाने का प्रयास था। उद्देश्य किसी भी समुदाय के बारे में कोई बयान देना नहीं था।’ मनोज बाजपेयी ने अपने पोस्ट में निर्देशक नीरज पांडे के साथ अपने लंबे अनुभव का भी जिक्र करते हुए लिखा- 'नीरज पांडे के साथ काम करते हुए मैंने हमेशा यह देखा है कि वे अपनी फिल्मों को लेकर गंभीरता और सावधानी बरतते हैं। लिहाजा जनभावनाओं को देखते हुए फिल्म के मेकर्स ने सभी प्रमोशनल मटेरियल को हटाने का फैसला लिया है।

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