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ओसवाल बाप-बेटे एक बार फिर आए विवादों के घेरे में: देवास के बाद सिमरोल में भी जमीन धोखाधड़ी की आहट

KHULASA FIRST

संवाददाता

12 जनवरी 2026, 10:05 पूर्वाह्न
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ओसवाल बाप-बेटे एक बार फिर आए विवादों के घेरे में

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
जर, जोरू और जमीन ये तीन कारण सदियों से विवाद की जड़ रहे हैं। मौजूदा दौर में जमीन के आसमान छूते दामों के साथ धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। शहर में चर्चित ओसवाल बाप-बेटे पर कॉलोनी विकास के नाम पर किसानों से कथित धोखाधड़ी के आरोप और गहराते जा रहे हैं।

खुलासा फर्स्ट द्वारा पहले ही देवास जिले के किसानों से जुड़े एक बड़े जमीन सौदे में भुगतान न होने के मामले का खुलासा किया जा चुका है। अब सिमरोल क्षेत्र के नए पीड़ित किसानों ने खुलासा करते हुए अपनी पीड़ा सार्वजनिक की है।

सिमरोल क्षेत्र के कजलीगढ़ रोड स्थित तीन एकड़ भूमि को लेकर राकेशसिंह तोमर और स्थानीय किसानों मार्तंड राव, देवराम, गोपाल और रामचंद्र (निवासी ग्राम सिमरोल, तहसील महू, जिला इंदौर) के बीच सौदा तय हुआ था। यह सौदा 2 करोड़ 43 लाख रुपए प्रति एकड़ के आउटरेट (नकद भुगतान) पर किया गया था, जिसकी कुल कीमत लगभग 7 करोड़ 24 लाख आंकी गई। भुगतान की समय-सीमा दो वर्ष निर्धारित की गई थी।

बाद में ब्रोकर संजय परमार के माध्यम से राकेश तोमर की रेशो डील सार्थक पिता सुधीर ओसवाल से कराई गई। इसमें 40 प्रतिशत हिस्सा बिल्डर और 60 प्रतिशत किसानों का तय हुआ। चारों किसानों की सहमति से 60 लाख डिपॉजिट में सौदा तय हुआ, जिसमें प्रत्येक किसान को साढ़े 12 लाख रुपए देने की शर्त थी। कुल 50 लाख का भुगतान होना था, लेकिन शुरुआत में मात्र 2 लाख 50 हजार रुपए ही दिए गए।

विकास कार्य नहीं होने से किसानों में रोष
अनुबंध अनुसार ग्राम सिमरोल की भूमि (सर्वे क्रमांक 402/1, 402/2, 402/3) पर कॉलोनी विकास, बिजली, पानी, ड्रेनेज, सड़क, गार्डन और बाउंड्रीवॉल सहित समस्त कार्य ओसवाल बाप-बेटे को कराना थे। पीड़ित किसानों का आरोप है कि न तो विकास कार्य शुरू हुए और न ही भुगतान की शर्तों का पालन किया गया, जिससे वे स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

किस्तों में भुगतान, टीएनसी के बाद भी पैसे अटके
किसानों का आरोप है कि लगातार परेशान करने के बाद लगभग एक माह में 50 लाख रुपए किस्तों में दिए गए। एग्रीमेंट में टीएनसी स्वीकृति के समय 10 लाख रुपए अतिरिक्त भुगतान का प्रावधान था, लेकिन टीएनसी मंजूर हुए डेढ़ महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद यह राशि अब तक नहीं दी गई।

ओसवाल की ओर से 50 लाख अग्रिम भुगतान आरटीजीएस के माध्यम से दिखाया गया, जबकि शेष 6 करोड़ 50 लाख से अधिक की राशि समय पर नहीं चुकाई गई।

देवास प्रकरण में खुलासा 11 बीघा जमीन, 27 करोड़ की डील, मिले सिर्फ 41 लाख
इससे पहले खुलासा फर्स्ट ने देवास जिले में 11 बीघा जमीन के सौदे में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया था। आरोप है कि 2 करोड़ 45 लाख प्रति बीघा के हिसाब से 27 करोड़ रुपए से अधिक की डील हुई, लेकिन किसानों को कुल मिलाकर केवल 41 लाख ही दिए गए।

पीड़ित किसानों का कहना था कि टोकन मनी देकर जमीन को जानबूझकर विवाद में डाला गया। न पूरा भुगतान हुआ, न कोई ठोस जवाब मिला। अब फोन कॉल और मुलाकात दोनों ही बंद कर दिए गए।

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