आपदा में अवसर भागीरथपुरा में मुनाफाखोरी का खुलासा: फर्जी मरीज, संदिग्ध इलाज और मुआवजे में गड़बड़ी के आरोप
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भागीरथपुरा जल त्रासदी में मौतों का आंकड़ा बढ़कर 20 तक पहुंच चुका है। हालात यह है अब भी दूषित पानी से प्रभावित लोग लगातार स्वास्थ्य केंद्र पहुंच रहे हैं, जिससे साफ है महामारी समाप्त नहीं हुई है। इसी गंभीर आपदा को कुछ लोगों ने अवसर में बदल लिया है।
सूत्रों के अनुसार भागीरथपुरा और आसपास के प्रभावित क्षेत्रों में कुछ मौकापरस्त घर-घर जाकर परिवारों के सदस्यों के स्वास्थ्य की जानकारी जुटा रहे हैं। जुटाए गए दस्तावेजों के आधार पर फर्जी मरीज चिह्नित कर निजी अस्पतालों में भर्ती कराने के प्रस्ताव दे रहे हैं। इतना ही नहीं, उनकी बात मानने वाले व्यक्तियों या परिवारों को बदले में राशि देने का प्रलोभन भी दिया जा रहा है।
बताया जा रहा है सरकार द्वारा जल त्रासदी से प्रभावितों के इलाज का पूरा खर्च उठाए जाने की घोषणा से क्षेत्र में ऐसे संदिग्ध लोगों की आवाजाही बढ़ गई है। आरोप है इन लोगों ने प्रभावित क्षेत्र के आसपास स्थित बड़े निजी अस्पतालों से भी ‘सेटिंग’ कर रखी है, जहां उल्टी-दस्त जैसे लक्षणों के आधार पर फर्जी इलाज, अस्पताल में भर्ती होने के दस्तावेज, जांच रिपोर्ट और बिल तैयार कर शासन से भुगतान लेने की तैयारी की जा रही है।
मुआवजे में ऐसे हो रही गड़बड़ी
जान गंवाने वालों के परिजनों को प्रशासन की ओर से ₹2 लाख की सहायता राशि दी जा रही है, लेकिन मौतों के कारणों को लेकर सामने आ रहे बयानों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक मामले में परिजनों का कहना है मृतक भागीरथपुरा में कहीं आता-जाता नहीं था और शराब पीने का आदी था।
मौत से पहले भी वह शराब की दुकान गया था, जहां शराब में दूषित पानी मिलाकर पीने से तबीयत बिगड़ी थी। दूसरे मामले में परिजनों ने बताया मृतक भागीरथपुरा में रिश्तेदार के घर गया था, वहां से लौटने के बाद तबीयत खराब हुई। नजदीकी अस्पताल में सामान्य इलाज के बाद उसे दवा दी गई, लेकिन एक-दो दिन में उसकी मौत हो गई।
उसने न भागीरथपुरा के किसी स्वास्थ्य केंद्र में इलाज कराया, न किसी अस्पताल में भर्ती हुआ, न डॉक्टर ने दूषित पानी को मौत का कारण बताया। पोस्टमार्टम हुआ या नहीं, यह भी स्पष्ट नहीं किया गया। तीसरे मामले में मृतक किसी अन्य शहर का निवासी बताया जा रहा है, जिसने गंगवाल बस स्टैंड से भागीरथपुरा जाकर नाश्ता किया था।
आरोप है दूषित जल से बने खाद्य पदार्थ खाने पर मौत हुई। इन अजीबोगरीब मामलों के सामने आने से साफ है मौत और इलाज, दोनों मामलों में बड़ी गड़बड़ी हो रही हैं। हालांकि हालात की नाजुकता को देखते हुए फिलहाल अधिकांश मामलों को चुपचाप आगे बढ़ने दिया जा रहा है।
प्रशासन सतर्क, गोपनीय जांच शुरू
प्रशासन को इस आपदा में अवसर तलाशने वालों की भनक लग चुकी है। संदिग्ध निजी अस्पतालों की गोपनीय जांच शुरू कर दी गई है। अब तक यह बड़ा खुलासा हुआ है कई मरीजों का विधिवत रजिस्ट्रेशन तक नहीं किया गया, जबकि क्षेत्र के दो निजी अस्पतालों के इलाज संबंधी बिल प्रस्तुत किए जा रहे हैं, जिनके आधार पर शासन से भुगतान लेने की तैयारी है।
प्रशासन और लोगों के अनुसार मौतों के आंकड़े में अंतर देखा गया है जिसके पीछे कारण अब इस खुलासे से स्पष्ट हो रहा है हादसे के बाद से मौतें तो रही है लेकिन मेडिकल रिपोर्ट में कारण नहीं आने या रिपोर्ट लेट होने से अंतर था, लेकिन राजनैतिक दलों का पीड़ितों के परिवारों से मिलने की वजह से रातों रात चेक वितरण कर दिए गए। जल त्रासदी के बीच सामने आ रही ये अनियमितताएं न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं बल्कि पीड़ितों के साथ हो रहे अन्याय का खुलासा भी।
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