रसीदों पर दर्ज हो रहा भ्रष्टाचार का खुला खेल: माफिया और सिस्टम की जुगलबंदी से छलनी हो रहा शहर का सीना
KHULASA FIRST
संवाददाता

बिचौली और कनाड़िया में सरेआम धज्जियां उड़ा रहे ‘सेलम’ के ट्रक
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भागीरथपुरा में दूषित जल से मासूमों की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है, लेकिन इंदौर के प्रशासनिक गलियारों में संवेदनहीनता की परतें अब भी जमी हुई हैं। कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने रेसीडेंसी कोठी की उच्च स्तरीय बैठक में जिस सख्ती के साथ नए बोरिंग और अवैध नल कनेक्शनों पर तत्काल मौखिक प्रतिबंध के निर्देश दिए थे, उन्हें जिला प्रशासन ने फाइलों के ढेर में दफन कर दिया है।
हकीकत यह है कि शहर में आज भी माफिया का समानांतर शासन कायम है, जहां रक्षक ही भक्षक बनकर भ्रष्टाचार की रसीदें काट रहे हैं और गिरते भूजल स्तर को रसातल में धकेलने का संगठित प्रयास जारी है।
शहर के पॉश इलाकों, विशेषकर बिचौली मर्दाना और कनाड़िया में कानून का मखौल उड़ाना एक सामान्य प्रक्रिया बन गई है। यहां भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा का प्रमाण बोरिंग उत्खनन के दौरान दी जा रही वे रसीदें हैं, जिनमें बकायदा ‹अन्य खर्च› के नाम पर 5000 रुपए की अवैध वसूली का जिक्र है।
यह दस्तावेज इस बात की तस्दीक करते हैं कि पुलिस और प्रशासन की मौन सहमति से शहर के संसाधनों की लूट मची है। हाल ही में बिचौली मर्दाना के संपत हिल्स में एक रसूखदार के प्लॉट पर हुआ उत्खनन इसी प्रशासनिक हठधर्मिता और मिलीभगत की गवाही दे रहा है।
सिंडिकेट 50 से अधिक पंचायतों में सक्रिय
इंदौर के 85 वार्डों और आसपास की 50 से अधिक पंचायतों में सक्रिय यह सिंडिकेट इतना विशाल है कि तमिलनाडु के सेलम से आए सैकड़ों बोरिंग ट्रक बेखौफ होकर रात-दिन शहर का सीना छलनी कर रहे हैं। विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि इस खेल में डायल-112 की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
जैसे ही कोई गाड़ी कॉलोनी में प्रवेश करती है, मुखबिरी के नेटवर्क के जरिए सूचना प्रसारित होती है और फिर उगाही का व्यवस्थित तंत्र सक्रिय हो जाता है। अनुमान है कि इस प्रतिबंधित धंधे से प्रतिदिन लगभग 50 लाख रुपये और महीने भर में 15 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की जा रही है।
शहर की दीवारों पर ‹साईं राम› और ‹सीबीपी चौधरी› जैसे विज्ञापन सरेआम चस्पा हैं, लेकिन प्रशासन की बंद आंखों के लिए ये अब भी अज्ञात बने हुए हैं।
3.33 लाख तक वसूल रहे सरकारी बोरिंग का पैसा
इस पूरे प्रकरण में व्यापमं व्हिसल ब्लोअर डॉ. आनंद राय ने एक बड़े वित्तीय घोटाले की ओर इशारा करते हुए सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। डॉ. राय का कहना है कि जहां एक आम नागरिक 80 से 90 हजार रुपये में बोरिंग का काम करा लेता है, वहीं विधायक या सांसद निधि से होने वाले सरकारी बोरिंग का बिल आश्चर्यजनक रूप से 3.33 लाख रुपये तक वसूला जा रहा है।
चूंकि इन कार्यों के मुख्य निष्पादन अधिकारी स्वयं कलेक्टर होते हैं, इसलिए जवाबदेही की उंगली सीधे तौर पर शीर्ष नेतृत्व की ओर उठती है। यह विडंबना ही है कि अब कैबिनेट मंत्री और महापौर को अधिकारियों की इस मनमानी और संगठित भ्रष्टाचार की शिकायत मुख्यमंत्री से करने के लिए विवश होना पड़ रहा है।
आधिकारिक रूप से जारी नहीं हुए हैं आदेश
बोरिंग खनन पर प्रतिबंध के आदेश अभी आधिकारिक रूप से जारी नहीं हुए हैं। जब आदेश जारी होंगे, तब इस पर विस्तृत जानकारी दी जाएगी। -शिवम वर्मा, कलेक्टर, इंदौर
जनता के पैसे की खुली लूट की जा रही
सरकारी निधि से होने वाले बोरिंग में भारी भ्रष्टाचार व्याप्त है। जो काम 90 हजार में संभव है, उसे सवा तीन लाख रुपये से अधिक में दिखाकर जनता के पैसे की खुली लूट की जा रही है। -डॉ. आनंद राय, व्हिसल ब्लोअर
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