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नितिन रोचलानी खुद नौ लोगों को लेकर रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचा था: रजिस्ट्री के बाद चेक और आरटीजीएस से तीन माह तक पेमेंट करता रहा पीड़ित

KHULASA FIRST

संवाददाता

12 जनवरी 2026, 10:45 पूर्वाह्न
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नितिन रोचलानी खुद नौ लोगों को लेकर रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचा था

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
खुद का बताकर विवादित प्लॉट का करोड़ों में सौदा कर किसानों से रजिस्ट्री करवाकर करोड़ों ठगने के मामले में पीड़ित महेंद्र जैसवाल का आरोप हैं ठग नितिन रोचलानी रजिस्ट्री वाले दिन नौ लोगों को खुद की कारों में लेकर रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचा था।

जहां रजिस्ट्री के बाद उसने मुझसे चेक लेकर उन नौ लोगों को दिए थे। खुद को शहर का चर्चित कॉलोनाइजर और रुद्राक्ष ग्रुप का चेयरमैन बताने वाला नितिन रोचलानी भरोसे में लेकर धोखाधड़ी करेगा, ऐसी कल्पना भी नहीं की थी।

जैसवाल के मुताबिक सौदे (एग्रीमेंट) के समय नितिन रोचलानी को कुछ अमाउंट चेक से दिया था। जिस दिन रजिस्ट्री होना थी उस दिन ढक्कन वाला कुआं स्थित रजिस्ट्रार कार्यालय पर मुझे नितिन रोचलानी से ही पता चला था उक्त प्लॉट 9 लोगों के नाम पर है।

रुद्राक्ष ग्रुप के नितिन रोचलानी ने भरोसे में लिया और कहा उक्त प्लॉट के मालिक गौराबाई पति स्व. सालगराम, उनके बेटे राधेश्याम, इंदरसिंग बेटी लीलाबाई, सोरमबाई पिता स्व. सालगराम, मांगबाई उर्फ मांगूबाई पति प्रेमसिंह, कल्पना पति कल्याण, राहुल पिता कल्याण और कपिल पिता कल्याण सभी निवासी मानवता नगर, बिचौली हप्सी हैं। इनके नाम पर रजिस्ट्री है ये सभी उक्त प्लॉट बेचने के लिए राजी हैं। रजिस्ट्री आपके नाम पर करवा लो।

रजिस्ट्री के बाद नितिन रोचलानी को अलग अलग तारीख के चेक दिए थे, जो उसने किसानों को दे दिए थे। फिर अपनी कार से सभी को ले गया था। उन सभी को नितिन रोचलानी ही अपनी कार में लेकर लेकर आया भी था।

रजिस्ट्री के बाद नितिन रोचलानी को दिए चेक अलग अलग समय में क्लियर होते गए। यह प्रोसेस तीन माह तक चली। जब रुद्राक्ष ग्रुप के नितिन रोचलानी से कहा उक्त प्लॉट का पूर्ण भुगतान हो चुका हैं।

यह है मामला
पीड़ित ने पुलिस कमिश्नर को की शिकायत में बताया 21 फरवरी 2025 को 10 हजार स्क्वेयर फीट भूमि का विक्रय-पत्र पंजीकृत कराया गया। यह सौदा उसके पार्टनर रवि तकतानी के साले रुद्राक्ष ग्रुप के नितिन रोचलानी के माध्यम से हुआ।

रजिस्ट्री के समय नितिन ने नौ किसानों को उपस्थित कराकर उनसे सीधे रजिस्ट्री करवाई और भरोसा दिलाया उसने सौदा कर लिया है। पारिवारिक और व्यावसायिक संबंधों के चलते अतिरिक्त जांच-पड़ताल पर जोर नहीं दिया—जो बाद में भारी पड़ गया।

शिकायत में नितिन रोचलानी को इस पूरे फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड बताया गया है। आरोप है उसने खुद सामने आए बिना किसानों/विक्रेताओं के नाम से रजिस्ट्री कराई और पर्दे के पीछे से पूरे सौदे को नियंत्रित किया। इसी रणनीति के तहत विवादित जमीन को निर्विवाद बताकर बेचा गया और उससे करोड़ों की राशि ठग ली ।

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